मूवी रिव्यू: वर्तमान का महत्व दर्शाती है ‘बार बार देखो’

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रेटिंग***

करण जोहर, फरहान अख़्तर तथा रितेश साधवानी कामयाब फिल्म निर्माताओं में शुमार है लिहाजा इस बार उन्होंने नित्या मेहरा के निर्देशन में फिल्म ‘बार बार देखो’ के तहत आज के यूथ के विचारों और उनकी महत्वांकक्षाओं के तहत वर्तमान का महत्व दर्शाने की कोशिश की गई है।

कहानी

जय यानि सिद्धार्थ मल्होत्रा और दीया यानि कैटरीना कैफ बचपन के ऐसे दोस्त हैं जिनकी पैदाईश भी एक ही वक्त हुई थी। बड़े होकर जहां जय गणित का प्रोफसर बनाता है वहीं दीया एक आर्टिस्ट, लेकिन दोनों में फर्क ये  है कि जय अपने कॅरियर को लेकर कहीं न कहीं कन्फयूज है क्योंकि बहुत आगे जाना चाहता है  लिहाजा वो सगाई के बाद कैट से शादी करने में टालमटोल करने लगता है क्योंकि उसे विदेश में कैंब्रिज जाकर गणित का बड़ा प्रोफेसर बनना है । यहां कैट उसे कभी वापस न आने के लिये कह कर चली जाती है गुस्से में जय शैंपियन की पूरी बोतल साफ कर जो सपना देखता है वो उसके अगले साठ सालों तक का सफर है। इसके बाद ही उसे पता चलता है कि महत्वाकांक्षा से कहीं जरूरी है हमारे मूल्य, हमारा वर्तमान और रिश्तों की गहराई।baar-baar-dekhogb

निर्देशन

फिल्म अपनी शुरूआत में जिस प्रकार कुछ नया कहने की कोशिश करती है वो बाद में कहीं बिखर जाता है। दरअसल जय का बार बार वर्तमान और भविष्य में आना जाना कहानी को बुरी तरह कन्फयूज करता है। सपनों के साथ कही कहानी विदेश में चली जाती है और अगले साठ साल तक की इस जर्नी में जय और कैटरीना के पेरेन्ट्स भी उनके साथ होते हैं। फिल्म में ये दिखाने की की कल्पना की गई है कि भविष्य में हमारे मोबाइल, गाड़ियां और मकान कैसे होगें। इसके अलावा विदेशी लोकेशन बहुत साफ और सुथरी हैं। अगर फिल्म के पात्रों की बात की जाये तो जय और दीया का सफर साठ साल तक तो दिखा दिया लेकिन निर्देशक ने उनके लुक के अलावा उनकी बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान नहीं दिया। फिर भी कहानी जो कहना चाहती हैं वो कहने में एक हद तक सफल है।bar

अभिनय

सिद्धार्थ मल्होत्रा जैसे यंग कलाकार अपने से दुगनी उम्र के किरदार निभाने के लिये हमेषा उत्साहित रहते हैं यहां उन्होंने बचपन से लेकर साठ साल तक के शख्स को बहुत बढ़िया तरह से जी कर दिखाया है अगर वे अपनी बॉडी लैंग्वेज पर और जरा ध्यान कर लेते तो सोने पे सुहागा साबित होता। अपने करियर, परिवार तथा रिश्तों में विश्वास करने वाली लड़की दीया को कैटरीना ने अच्छी अभिव्यक्ति दी। इनके अलावा राम कपूर और सारिका भी सहयोगी भूमिकाओं में उपयोगी साबित हुये।16vnpqwkkpceh56r-d-0-baar-baar-dekho-movie-song

संगीत

अमाल मलिक का संगीत कहानी के साथ गुंथा हुआ है सिवाय काला चश्मा गीत के, जो अभी भी शीर्ष पर बना हुआ है।

क्यों देखें

वर्तमान और रिश्तों का महत्व दर्शाती इस फिल्म से कुछ तो सीखा जा सकता है।


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Mayapuri

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