मूवी रिव्यू: भव्यता और चमत्कृत कर देने वाले कारनामों में बाहुबली से कहीं आगे है ‘बाहुबली 2 द कनक्लूजन’

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रेटिंग****

निर्देशक एस एस राजमौली की फिल्म ‘बहुबली’ के बाद इसके दूसरे वर्जन  ‘बाहुबली 2 द कनक्लूजन’ का इंतजार आखिर खत्म हुआ। इसके दूसरे भाग के रूप में राजमौली ने पहली से कहीं ज्यादा भव्य और अलौकिक फिल्म दी है।

फिल्म की कहानी पहली फिल्म के आखिरी दृश्य के बाद फ्लैशबैक में चली जाती है। जंहा महारानी शिवगामी (राम्या कृष्णन) अपने बेटे भल्लालदेव (राणा डग्गूबाती) के बदले सोतेले बेटे अमरेन्द्र बाहुबली (प्रभाष)को राजगद्दी पर बैठाने का एलान करती है। इससे भल्लाल और उसके पिता (नासेर) नाराज हो उठते हैं। राजा बनने के ऐलान के बाद बाहुबली और राजकीय सेवक कट्टप्पा (सत्यराज) के साथ देश भ्रमण के लिये निकल जाते हैं। घूमते हुये दोनों का सामना कुंतल राज्य की बहादुर और योद्धा राजकुमारी देवसेना (अनुष्का शेट्टी) से होता है। बाहुबली देवसेना को देखते ही प्यार कर बैठता है। बाद में बाहुबली के शौर्य से प्रभावित हो देवसेना भी बाहुबली से प्यार करने लगती है। जब ये बात भल्लाल को पता चलती है तो शडयंत्र के तहत वो महारानी से देवसेना से शादी करने की बात कहता है और महारानी भल्लाल को देवसेना से शादी कराने का वचन दे देती है। जब देवसेना महारानी का प्रस्ताव सख्ती से ठुकरा देती है, तो महारनी बाहुबली के पास संदेश भेजती है कि वो देवसेना को गिरफ्तार कर यहां ले कर आये। बाहुबली महारानी का आदेश मानते हुये देवसेना को अपने जीते जी उसके सम्मान की रक्षा करने का वचन देता है। राज्य पहुंचने के बाद जब उन्हें हकीकत का पता चलता है तो देवसेना भल्लाल से शादी करने से साफ मना कर देती है। यहां जब बाहुबली देवसेना का साथ  देता है तो उसकी जगह महारानी भल्लाल को राजगद्दी सौंप देती है और बाहुबली को सेनापति बना देती है। बाद में भल्लाल और उसके पिता के शडयंत्र के चलते पहले बाहुबली को सेनापति के पद से मुक्त कर दिया जाता है, इसके बाद उसे राजमहल छौड़ने का आदेश दे दिया जाता है। भल्लाल यहीं नहीं रूकता बल्कि शडयंत्र के तहत महारानी को मजबूर कर देता है कि वो कट्प्पा को बाहुबली को मारने आदेश दे देती है। बाहुबली को मारने के बाद कट्प्पा जब महारानी को बताता है कि वो बाप बेटे के शडयंत्र का शिकार हुई है तो महारनी बाहुबली के नवजात बच्चे को राज्य का वारिस करार देते हुये भल्लाल से उसे बचाने के लिये अपनी जान दे देती है। इस बीच भल्लाल देवसेना को गिरफ्तार कर लेता है। पच्चीस साल बाद बाहुबली का बेटा महेन्द्र बाहुबली जिसे आदिवासियों ने पालपोश कर बड़ा किया, संयोगवश अपने राज्य में आ जाता है। यहां आने के बाद जब उसे असलियत का पता चलता है तो वो भल्लाल और उसका राज्य ध्वस्त कर अपनी मां देवसेना को पच्चीस साल की कैद से आजाद करवाता है।bahubali

दो साल पहले रिलीज बाहुबली की भव्यता और अद्भुत परिकल्पना से दर्शक इस कदर चमत्कृत थे कि उसके दूसरे भाग का पूरी बेसर्बी से दो साल तक इंतजार किया और अब बाहुबली दो, बाहुबली से कहीं ज्यादा भव्य, अलौकिक और आलीशान फिल्म निकली। कल्पना पर आधारित कहानी का दूसरा अध्याय पहले से कहीं ज्यादा प्रभावशाली है। बेमिसाल सेट, कोरियोग्राफी,एक्शन और बढ़िया डबिंग के अलावा वीएफएक्स तथा आधुनिक तकनीक फिल्म को हॉलीवुड की फिल्मों के समक्ष ला खड़ा कर देती है यानि हम राजमौली जैसे डायरेक्टर और फिल्म पर गर्व कर सकते हैं क्योंकि इंडियन सिनेमा में इस तरह की फिल्म न तो आई है और न ही इससे पहले कोई ऐसी भव्य फिल्म की कल्पना कर सकता था लिहाजा राजमौली ने बाहुबली और बाहुबली दो के तहत भारतीय फिल्मों को ऊंचाई दी है। फिल्म की भव्यता, एक्शन दृश्य, युद्ध के दृश्य तथा किरदारों की पोशाकें तथा उनका दंभ, दर्शक को किसी कल्पना लोक में ले जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि बाहुबली से कहीं आगे है बाहुबली दो।bahubali

हमारी हिन्दी फिल्मों के हीमैन सनी देओल अभी तक नल उखाड़कर और अपने ढाई किलो के हाथ पर इतराते फिर रहे हैं लेकिन जब वे बाहुबली में प्रभाष को बड़े बड़े पेड़ उखाड़कर उनसे लड़ते देखेंगे तो जरूर बाहुबली के समक्ष अपने आपको बौना महसूस करेंगे, क्योंकि प्रभाष बाहुबली के बाद एक बार फिर बाहुबली शब्द को अपने अभिनय और एक्शन से सार्थक करते नजर आते हैं, वहीं खलनायक बने राणा डग्गुबाती की ताकत और क्रूरता को देख बड़े बड़े खलनायक शरमाते नजर आयेंगे। कट्प्पा के किरदार ने सत्यराज को जैसे अमर कर दिया तथा भल्लाल के अपाहिज पिता और बाहुबली के दुश्मन की भूमिका में नासेर ने गजब का अभिनय किया है। महारानी की भूमिका को तो जैसे राम्या कृष्णन ने आत्मसात कर लिया। देवसेना की भूमिका को अनुष्का शेट्टी ने अपनी खूबसूरती और अभिव्यक्ति से अविश्वनीय बना दिया। बाहुबली की लीड नायिका तमन्ना भाटिया अंत में दिखाई देती है लेकिन निशब्द।

बाहुबली के बाद एक बार फिर बाहुबली दो के रूप में दर्शकों को अपने शौर्य, भव्यता और सुंदर परिकल्पना से चमत्कृत कर देने वाली फिल्म साबित होने वाली है।


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Mayapuri

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