मूवी रिव्यू: कमजोर कहानी ‘बाईपास रोड़’

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नील नितिन मुकेश के भाई नमन नितिन मुकेश द्धारा निर्देशित सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘ बाई पास रोड़’  तकरीबन सब कुछ सही होने के बावजूद दर्शकों की पंसद पर खरी साबित नहीं हो पाई। उसकी प्रमुख वजह रही पहले से दौहराई जा चुकी बासी कहानी।

कहानी

नील नितिन मुकेश यानि विक्रम कपूर एक धनाड्य फैशन डिजाइनर है। उसके परिवार में उसके पिता रजित कपूर यानि प्रताप कूपर, सोतेली मां गुल पनाग यानि रोमिला तथा छोटी सोतेली बहन नंदिनी यानि चहल मांगे है। अचानक एक दिन  विक्रम का एक्सिडेंट हो जाता हैं जिसमें उसकी दोनों टांगे खराब हो जाती है, उसी दिन उसकी कंपनी की मॉडल शमा सिंकदर यानि सारा बिग्रेंजा भी मारी जाती हैं  जो  ताहिर षब्बीर यानि जिम्मी की मंगेतर है। कहने को तो उसने आत्महत्या की लेकिन  इस केस की जांच कर रहे पुलिस ऑफिसर मनीष चौधरी यानि अभिदेव राय की नजरों में वो आत्महत्या न हो कुछ और ही है यानि दोनों हादसों में कुछ तो संबन्ध है। अभिदेव के रडार पर आगे विक्रम का बिजनिस राइवल सुधांशु पांडे यानि नारंग और जिम्मी हैं। अब सारा की मौत हत्या थी या आत्महत्या, विक्रम के धर के इकलौते नोकर को किसने मारा या विक्रम को मारने की कोशिश कौन कर रहा है। अंत में सारे रहस्य उजागर होते हैं, जिन्हें जानने के लिये फिल्म देखना जरूरी है।

अवलोकन

जैसा कि पहले कहा है कि फिल्म की टेकिंग,बैकग्रांउड म्यूजिक तथा लोकेशंस सभी कुछ बढ़िया हैं लेकिन फिल्म की कहानी इससे पहले कितनी ही बार दौहराई जा चुकी है लिहाजा वो दर्शक को प्रभावित नहीं कर पाती। हालांकि नमन ने थ्रिल और सस्पेंस काफी अच्छा ट्रीट किया लेकिन पुरानी कहानी सब गुड़ गोबर कर देती है। यही नहीं नमन ने शक की सुई कई किरदारों पर रखी लेकिन फिर भी बात नहीं बन पाई। फिल्म की कथा पटकथा और संवाद नील नितिन मुकेश के हैं जिसमें अभी वे नोसिखिये साबति हुये हैं। पहले भाग की कहानी अतीत और वर्तमान के चक्कर में दर्शक को जमकर बौर करती है। दूसरे भाग को संभालने की कोशिश की जाती है लेकिन वहां भी पहले से सब कुछ देखा हुआ लगता है। फिल्म में तीन तीन म्यूजिक कंपोजर्स होने के बावजूद एक भी गीत जबान पर नहीं चढ़ पाता।

अभिनय

नील नितिन मुकेश ने अपनी भूमिका में जमकर मेहनत की है, वो शुरू से आखिर तक काफी हैंडसम लगा है। अदा शर्मा को कुछ करने का मौका ही नहीं दिया गया, शमा सिंकदर अपनी भूमिका में काफी खूबसूरत और हॉट लगी है। इसी प्रकार सुधांशु  पांडे का किरदार भी अधूरा अधूरा लगता है, ताहिर शब्बीर, रजित कूपर,गुल पनाग, चहल मांगे तथा मनीष चौधरी सभी अपने अपने किरदारों में निसंदेह प्रभावी रहे।

क्यों देखें

थ्रिलर और सस्पेंस के रसिया दर्शकों को फिल्म बौर नहीं करेगी।

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