मूवी रिव्यू: देश को आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गुमनाम शहीद हैं ‘चापेकर ब्रदर्स’

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रेटिंग**

देश को स्वतंत्र कराने वाने शहीदों में ऐसे बहुत सारे नाम हैं जिन्हें इतिहास में जगह नहीं दी गई। चापेकर ब्रदर्स ऐसे ही नाम हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिये अपना बलिदान दे दिया था। निर्देशक देवेन्द्र कुमार पांडे की फिल्म ‘चापेकर ब्रदर्स’  में इन्हीं वीरां की कथा दर्शाई गई है।

चापेकर यानि एक ब्राह्मण परिवार में जन्में थे दरामोदर, बालकिश न तथा वासूदेव चापेकर। 1890 के दशक में जब इन तीनों भाईयों को लगा कि उनके पिता उन्हें निठ्ल्ला समझते हैं तो उन्होंने फोज में नौकरी करने का सोचा। दरअसल पिता के काम भजन कीर्तन में उनका मन नहीं लगता था लेकिन वे कुछ कमाकर अपने पिता की सहायता करना चाहते थे लेकिन उन दिनों अंग्रेज पंडितों को सेना में नहीं लेते थे। इसके बाद ये तीनों भाई लोकमान्य तिलक के पास कोई नोकरी मांगने पहुंचे तो उन्हें लगा कि ये लोग बहुत स्वाभिमानी हैं लिहाजा उन्होंने उन्हें देश की आजादी के लिये काम करने के लिये कहा। उन दिनों पूना में प्लेग फैला हुआ था जिसकी आड़ में अंग्रेज जिस घर में कोई मौत होती थी तो उस परिवार को घर से निकाल बाहर करते थे। उन दिनों पूना की कमान मि.रेन्ड के हाथ में थी जो भारतीयों से नफरत करता था इसलिये उन पर नित नये जुल्म ढहाता था। लिहाजा तिलक जी की सहमति के बाद तीनों भाई अपने साथियों के साथ रेन्ड को मारने का प्लान बनाते हैं। दामोदर चापेकर रैन्ड को मार देता है। लेकिन एक गद्दार की बदौलत पहले दामोदर गिरफ्तार हो जाता हैं उसके बाद बालकिशन और बाद में वासूदेव गद्दारों को सजा देने के बाद अरेस्ट होता है। दशक के अंत तक इन तीनों को फांसी दे दी जाती है ।chapekar-brothers

निर्देशन

इस तरह की फिल्मों के लिये उसी दौर में जाना पड़ता है तथा माहौल को दिखाने के लिये उस दौर के लुक तथा लोकेशनों की जरूरत होती है। लेकिन फिल्म के कम बजट के चलते निर्देशक फिल्म में वास्तविकता नहीं ला पाते। क्योंकि किरदारों के मेकअप तक में कटौती की गई है। इसके अलावा फिल्म की पटकथा तथा संवाद भी सुस्त रही। लिहाजा फिल्म में कथा और किरदार प्रभावशाली नहीं लगते।

अभिनय

फिल्म में लोकमान्य तिलक के किरदार में गोविंद नामदेव के अलावा सभी नये कलाकार हैं। लिहाजा गोविंद भी उनके साथ चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। जबकि उन्हें जंहा भी अवसर मिला उन्होंने अच्छा अभिनय किया।

संगीत

दुष्यंत दूबे का म्यूजिक भी साधारण रहा।

क्यों देखें

देश को आजादी दिलाने वाले गुमनाम वीरों के बारे में पता  करना हैं तो फिल्म देखी जा सकती है ।


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Mayapuri

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