फ़िल्म ‘चूहा बिल्ली’  समीक्षा – सुलेना मजुमदार अरोरा

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चूहा बिल्ली

पिछले दिनों निर्देशक प्रसाद कदम की बहुप्रतीक्षित शॉर्ट फिल्म ‘चूहा बिल्ली ‘ ओटीटी यूट्यूब में प्रदर्शित की गई जो अपनी अनोखी कथा के लिए चर्चे में है। आज के वक्त में यह फ़िल्म एक ज्वलंत विषय को रेखांकित करती नज़र आयी जो अपने टाइटल के अनुरूप सटीक है और इसकी चौंकाने वाली डार्क थीम और क्लाइमेक्स का इंतज़ार आपको अपनी कुर्सी से हिलने का मौका भी नहीं देती है। सुलेना मजुमदार अरोरा

सीरत को लगता है कि इस खबर से शायद कैटरीना विचलित हो जाएगी

फ़िल्म की कहानी कैटरीना (अदा शर्मा द्वारा अभिनीत) के इर्द गिर्द घूमती है जो मानसिक तौर पर अस्वस्थ है और बाइपोलर रोग से पीड़ित है। उसकी रूममेट सीरत (अनुप्रिया द्वारा अभिनीत) उसे इस स्थिति से उबारने में बहुत मदद करती है और हर रूप में उसको स्पोर्ट करती है लेकिन फिर भी कैटरीना स्वस्थ नहीं हो पाती। कहानी शुरू होती है सीरत के काम से वापस अपने कमरे में लौटकर कटरीना से बतियाने से। वो बताती है कि उसकी एक पड़ोसी खुशबू ने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली है।

सीरत को लगता है कि इस खबर से शायद कटरीना विचलित हो जाएगी लेकिन उसे तब आश्चर्य होता है जब कैटरीना बिना किसी खास प्रतिक्रिया के कहती है कि वो इस खबर से वाकिफ है। बातचीत के दौरान सीरत को शक होता है कि कैटरीना उससे कुछ छुपा रही है। जब बात आगे बढ़ती है तो दर्शकों को यह देखकर आश्चर्य होने लगता है कि कैटरीना कुछ अलग तरीके से बिहेव कर रही है और बात कहां से कहाँ होने लगती है जो उसके अवसाद, दवाइयां और सोशल मीडिया से दूर रहने की ओर मुड़ जाती है। दोनों सहेलियों की बातचीत के बीच कब चुपके से खतरों का अंदेशा शुरू हो जाता है जिसका खुलासा एक चौंकाने वाले अंत से होता है।

अभनेत्री अदा शर्मा ने अपने रोल में जान डाल दी है

अभनेत्री अदा शर्मा ने एक बदलते मूड वाली अस्वस्थ मानसिक रोगी की भूमिका में अद्भुत रूप से जान डाल दी है। सीरत की भूमिका में अनुप्रिया ने एक जिम्मेदार, सहानुभूति पूर्ण सहेली का किरदार बखूबी से निभाया है जो खुद एक गहरी राज़ दिल में छुपाए बैठी है लेकिन फिर भी अपनी सहेली को समझती और समझाती है।

सोलह मिनट की इस फ़िल्म में निर्देशक प्रसाद कदम ने एक मुश्किल विषय को बहुत सही तरीके से प्रस्तुत किया जिसे इतने कम समय में सम्पूर्ण गहराई से दिखाना असंभव ही है, फिर भी प्रसाद का प्रयास सराहनीय है हालांकि इसमें थोड़ा और खुलकर इस मानसिक रोग पर चर्चा की गुंजाइश हो सकती थी। लेकिन फिर भी यह फ़िल्म जरूर देखनी चाहिए जो साढ़े तीन स्टार (Rating 3.5Starts) की हकदार है।


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Mayapuri

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