मूवी रिव्यू: इमोशनल और भावपूर्ण – ‘धनक’

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रेटिंग***

लेखक निर्देशक नागेश कुकनूर भावपूर्ण इमोशनल फिल्में बनाने के लिये जाने जाते है। इस बार भी उन्होंने अपनी फिल्म ‘धनक’ में  भाई बहन के इमोशन को दर्शाया है।

कहानी

राजस्थान में अनाथ एकल गढ़ा और कृश छाबरिया दो भाई बहन हैं जो अपने चाचा चाची पर आश्रित है। कुपोषण के कारण एकल की आंखें चली जाती हैं । एकल सलमान खान का फैन है जबकि कृष शाहरूख खान की । कृष जब भी अपने चाचा विपिन शर्मा से अपने भाई की आंखों के इलाज की बात करती हैं तो वो टाल देता है। एक दिन उसे पता चलता हैं कि शाहरूख राज स्थान में शूटिंग करने आया हुआ है और वे गरीब बच्चों की आंखों के लिये मुफ्त इलाज करवाते हैं । तो कृश एकल को लकर एक दिन रात को घर से भाग जाती है और वहां पहुंचने की कोशिश करती हैं जंहा शाहरूख शूटिंग कर रहे हैं । रास्ते में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, बावजूद वे अपनी मंजिल पर पहुंच ही जाते हैं लेकिन कृष को उस वक्त बहुत बड़ा आघात पहुंचता हैं जब उसे पता चलता हैं कि शाहरूख वापस चला गया है । बाद में कृष किस प्रकार अपने भाई एकल की आंखें वापस लाने में सफल साबित होती है ।

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निर्देशन अभिनय और संगीत

नागेश को इस प्रकार की फिल्में बनाने में माहरत हासिल है। इस बात का सुबूत उनकी इकबाल और डोर आदि फिल्में हैं। फिल्म में दो बच्चों के आपसी लगाव को उन्होंने बहुत अच्छी तरह से दिखाया हैं एकल अंधा होने के बावजूद बिलकुल नहीं सुनना चाहता कि कोई उसे अंधा कहे । दोनों बच्चों ने बहुत ही भाव पूर्ण और सुंदर अभिनय किया है। दोनों की रास्ते भर चलती नौक झौंक अच्छी लगती हैं। चाचा के रोल में विपिन तथा सह्यदृय कबीलेवाली की भूमिका में फ्लौरा सेनी आकृशित करती है। इनके अलावा सुरेष मेनन, विभा छिब्बर तथा रिशी देशपांडे आदि कलाकार भी उल्लेखनीय रहे। राजस्थान की लोकेषंस लुभावनी हैं। तापस रेलिया का म्यूजिक बढ़िया है उन्होंने राजस्थान के फोग का बढ़िया इस्तेमाल किया है। खासकर दमादम मस्त कंलदर गीत बढ़िया रहा।

क्यों देखें

इमोशन और भावपूर्ण फिल्में देखने वाले दर्शकों को फिल्म निराश नहीं करेगी ।


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Mayapuri

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