मूवी रिव्यू: तीसरे दर्जे की कॉमेडी है – ‘डर्टी बॉस’

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रेटिंग*

बॉलीवुड में दो तरह के प्राणी मिलेंगे, एक जिनकी बदौलत बॉलीवुड बदनाम है दूसरे वो जिनकी वजह से ये चल रहा है। राइटर डायरेक्टर केसर मथारू की फिल्म ‘डर्टी बॉस’ कुछ ऐसा ही कहती है लेकिन बहुत ही भौंडे तरीके से।

कहानी

कहानी महज दो लाइन की है। वो यूं एक बिजनिस मैन राजू खेर को फिल्मों से नहीं बल्कि उनमें काम करने वाली लड़कियों से लगाव है इसीलिये वह फिल्मों में फाईनेंस करता है लेकिन फिल्म का डायरेक्टर केसर मथारू राजू को कुछ ऐसे आयने में उतारता है कि वो एक फिल्म और लांच कर देता है जिसमें वो खुद हीरो और हीरोइन उसकी पहली फिल्म की गीतू गंभीर हैं ये दोनों मिलकर राजू को दबाकर लूटते हैं। लेकिन सही समय पर राजू को होश आता है तो वो गीतू पर लांछन लगाते हुये कहता हैं कि तुम जैसी लड़कियों की वजह से ये लाइन बदनाम हैं लेकिन गीतू उसे जवाब देती है कि हम नहीं बल्कि तुम्हारे जैसे वासना के पुजारियों की बदौलत ये लाइन बदनाम हैं वरना हम जैसी लड़कियां पता नहीं कहां कहां से अपने सपनों के साथ बॉलीवुड में आती हैं लेकिन तुम्हारे जैसे लोग उनका शोषण करते हैं। क्या इसके बाद राजू खेर जैसे विलासी और ठरकी बिजनिसमैनों का यहां आना बंद हो जाता है ?

निर्देशन

अगर निर्देशन की बात की जाये तो निर्देशन ही नहीं बल्कि कथा पटकथा तथा संवाद सभी कुछ तीसरे दर्जे के हैं। राइटर डायरेक्टर जहां फिल्म में भी अपनी भूमिका स्वंय निभा रहे हैं वहीं अपनी बेटी को भी लांच किया है।

अभिनय

पूरी फिल्म राजू खेर पर है लेकिन उसने फूहड़ कॉमेडी में सभी का रिकॉर्ड तोड़ दिया, क्योंकि उसने बुरे तरीके से अपने भाई अनुपम खेर की भौंडी नकल करने की कोशिश की है। बाकी कलाकारों के बारे में जिक्र न ही किया जाये तो बेहतर होगा।

क्यों देखें

न ही देखें तो ज्यादा बेहतर होगा ।

 


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Mayapuri

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