मूवी रिव्यू: फुल मसाला एन्टरटेनमेंट के दर्शकों को भायेगी ‘ढिशूम’

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रेटिंग**

इन दिनों मसाला फिल्मों का चलन हैं जिनमें सारे मसाले मौजूद होते हैं। यही फिल्में दर्शकों को भी खूब भा रही है । रोहित धवन निर्देशित फिल्म ‘ढिशूम’ एक ऐसी ही फिल्म है। जिसमें ये सभी तत्व मौजूद हैं।

कहानी

मिडिल ईस्ट यानि आबू धाबी में इंडिया पाकिस्तान का फाइनल मैच होने जा रहा है। उसी दौरान भारत की टीम के टॉप क्रिकेटर विराज शर्मा यानि साकीब सलीब का अपहरण हो जाता है। इसके लिये इंडिया से स्पेशल टास्क फोर्स के ऑफिसर कबीर शेरगिल यानि जॉन अब्राहम को मिडिल ईस्ट साकिब को तलाश करने के लिये भेजा जाता है। दरअसल कबीर को अपनी प्रेमिका की बेवफाई ने सख़्त और रूख बना दिया है। अमिरात में कबीर वहां का भारतीय मूल के पुलिस ऑफिसर जुनैद अंसारी को अपने साथी के लिये चुनता है। इन्वेस्टिगेशन के दौरान उन्हें एक पॉकेटमार इशिका यानि जैकलिन फर्नांडीज से राहुल देव का पता चलता है कि इस अपहरण का सूत्रधार वाघा यानि अक्षय खन्ना का हाथ है वाघा सट्टा बाजार का बादशाह है। वो विराज को फाइनल में कुछ इस तरह से खेलने के लिये मजबूर करता है कि इंडिया मैच हार जाये और उसका चार सो करोड़ का कर्ज चुकता हो जाये। बाद में किस प्रकार कबीर और जुनैद वाघा तक पहुंच महज छत्तीस घंटो में तलाश कर किस प्रकार विराज को बचाते हैं।

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निर्देशन

रोहित धवन ने एक शुद्ध मासाला फिल्म में जो चाहिये वो सब डाला है लिहाजा वे दर्शकों की रूचि बनाये रखने में एक हद तक सफल साबित हुये हैं। फिल्म में दो हीरो हैं जिसमें एक रूखा है तो दूसरा हंसमुख। जॉन को अक्खड़ भूमिका में तथा  वरूण अपने जोली रोल में दर्शकों को पूरी तरह एन्टरटेनमेनट करने में सफल साबित हुये हैं। इसी तरह फिल्म में दो विलन हैं। बावजूद इसके कहीं न कहीं स्क्रीनप्ले लूज रहा इस लिये एक वक्त दर्शक बोर होना शुरू हो जाता हैं लेकिन रोहित जल्दी ही एक बार फिल्म संभाल लेते हैं। आबू धाबी की लोकेशसं को कैमरामैन ने बहुत ही खूबसूरती से फिल्माया है।

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अभिनय

पहली बार जॉन कबीर शेरगिल की भूमिका में प्रभावशाली लगे हैं वे जो भी करते हैं वो वास्तविक लगता है उनके साथ वरूण धवन एक मस्तमौला पुलिस ऑफिसर के तौर पर दर्शकों का खूब मनोरजंन करते हैं। वैसे भी वरूण अपनी अभी तक की फिल्मों के तहत साबित कर चुके हैं कि वे एक बेहतरीन एक्टर है। इनके साथ पॉकेटमार के तौर पर जैकलिन फर्नांडीज ने अच्छा काम किया है। राहुल देव को खलनायिकी के तहत ज्यादा मौका नहीं मिल पाया। इसी तरह बतौर विलन अक्षय खन्ना की वापसी भी साधारण साबित हुई। अक्षय कुमार अपनी इमेज के खिलाफ एक कैमियो में गे के तौर पर दर्शक को हजम नहीं हो पाते। इसी तरह नरगिस फाकरी भी छोटे से रोल में ठीक ठाक रही। परिणिति चोपड़ा प्रमोशन गीत में वरूण के साथ खूबसूरत लगी। क्रिकेटर के तौर पर साकिब सलीम वास्तविकता दर्शाने में सफल रहे।

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संगीत

फिल्म में प्रीतम का म्यूजिक है। गीत सो तरह के रोग ले लूं के अलावा वरूण और परिणिति पर फिल्माया गीत जानेमन आह चार्ट पर हंगामा किये हुये है।

क्यों देखें

एक फुल्ली एन्टरटेनमेन्ट फिल्म देखने के रसिया दर्शकों को फिल्म खूब भायेगी।


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Mayapuri

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