मूवी रिव्यू: ‘‘संकीर्णताओं और विषमताओं का मंथन है’’ ‘ मसान’

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रेटिंग ****

फिल्म ‘मसान’ से एक और प्रतिभाषाली निर्देशक नीरज घेवण का बाॅलीवुड में आगमन हुआ है ।इस फिल्म से उन्होंने अपनी कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है । मिडिल क्लास परिवेश से एक साथ तीन कहानीयों को नीरज समानांतर रूप से लेकर चले हैं और तीनों कहानीयों को उन्होंने वास्तविकता प्रदान की है ।

कहानी

रिचा चड्डा यानि देवी पाठक एक पढ़ी लिखी बनारस घाट पर धार्मिक सामग्री बेचने वाले ब्राह्मण सजंय मिश्रा के बेटी है । वो एक लड़के से प्यार के चक्कर में सैक्सुअल एन्काउंटर में फंस जाती हैं । इसके बाद एक पुलिस आफिसर उसके पिता को केस को लेकर लाखों की रिष्वत मांगता है । दूसरी कहानी एक जवान बेटी के ब्राह्मण पिता की हैं जो एक अपनी इज्जत बचाने की जद्धदोजहद में वो काम भी करने को मजबूर हैं जो वो दूसरों को करने से मना करता है ।

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तीसरी कहानी में एक डूम जाति का लड़का विक्की कौशल जो घाट पर मुर्दे जलाने का खानदानी काम करता है । वैसे वो उच्च शिक्षित हैं जिसे एक उच्चकुल व जाति की ल़ड़की श्वेता त्रिपाठी से प्यार हो जाता है । ये तीनों कहानियां अपनी अपनी उलझनों से झूंझती हुई अंत में एक साथ गंगा में मिल जाती हैं ।

निर्देशन

मसान में मध्यम परिवारों की वास्तविकता ओर विशमता कुछ इस तरह दिखाई गई हैं कि जिससे लगता है कि आज भी हम छोटे बड़े, जातिवाद, ऊंच नीच जैसी दलदल में फंसे हुए हैं । हमारे भीतर आज भी संक्रीणता विद्यमान है। यह सब निर्देशक ने बहुत ही कुशलता और वास्तविक तरीके से दिखाया है ।

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फिल्म के हर एक्टर से किदार के भीतर घुस कर काम करवाने में निर्देशक पूरी तरह सफल रहा है । बनारस की रीयल लोकेशसं कहानी में वास्तविक रंग भरने में साहयक रही है । इस फिल्म के द्धारा निर्देशक आगे के लिये शिद्दत से संभावनायें जगाता है ।

अभिनय

रिचा चड्डा इससे पहले अपनी हर फिल्म में अपने होने का एहसास करवाती रही हैं । इस फिल्म में भी संर्कीणता को लेकर अपने अंदर चल रहे आक्रोश को उन्होंने बहुत ही सहजता से दर्शाया है । विक्की कौशल एक्शन मास्टर श्याम कौशल के बेटे हैं । अपनी पहली फिल्म के हिसाब से उन्होंने अपनी भूमिका को बहुत प्रभावशाली ढंग से निभाया हैं इसी तरह नई लड़की श्वेता त्रिपाठी ने भी बढिया काम किया है ।

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लेकिन इन सबसे ऊपर सजंय मिश्रा को एक जवान पढी लिखी बेटी के साथ हुए हादसे से हुए मजबूर ब्राह्मण की भूमिका में देखते बनता है । इनके अलावा सहयोगी भूमिकाओं में विनीत कुमार, पंकज त्रिपाठी, सत्यकाम आंनद, भगवान तिवारी, निखिल साहनी तथा भूपेश सिंह ने अपनी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है ।

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संगीत

फिल्म में सबसे बढि़या बात ये रही कि इस बार लेखक वरूण ग्रोवर ने दुश्यंत कुमार, रामधारी सिंह दिनकर तथा कुछ अन्य साहित्यकारों की पंक्तियों को फिल्म में न सिर्फ जगह दी हैं बल्कि उन्हें संगीत ट्रिब्यूट भी किया है ।

क्यों देखें

बनारस की वास्तविक लोकेशनों और इस तरह की रीयल फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों को फिल्म जरा भी निराश नहीं करेगी ।


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Mayapuri

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