मूवी रिव्यू: सिंगल्स थियेटर्स के दर्शकों को भरपूर मनोरंजन देती है फिल्म – ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’

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रेटिंग**

दिल, बेटा और मन जैसी उत्कृश फिल्मों के निर्देशक इन्दर कुमार की तीसरी एडल्ट कॉमेडी ‘ग्रेट ग्रैंड मस्ती’ पहली दो फिल्मों से कमजोर साबित होती है। हालांकि इस बार फिल्म में कहानी भी कहने की कोशिश की गई है ।

कहानी    

विवेक ऑबेरॉय एक होटल में मैनेजर है तो रितेश देशमुख डॉक्टर और इनका तीसरा दोस्त आफताब शिवदसानी स्टेट एजेन्ट है। तीनों ही अपनी पत्नियों के घरवालों से परेशान हैं क्योंकि वे उनके रहते अपनी पत्नियों से शारिरिक सुख नहीं ले पाते। एक बार तीनों मिलकर रितेश के गांव घूमने आते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि गांव की लड़कियों के साथ वे वो सुख प्राप्त कर सकते हैं जो उन्हें उनकी बीवीयों से हासिल नहीं हो सका। गांव में रितेश की पुश्तैनी हवेली है जिसे वो किसी तरह भी बेचना चाहता है। वे तीनों उस हवेली में आ जाते हैं जहां उन्हें एक बेहद खूबसूरत और सेक्सी लड़की उर्वशी रौतेला मिलती है जो अपने आपको उस हवेली की नौकरानी बताती है लेकिन बाद में पता चलता है वो एक अतृप्त आत्मा है जो बरसों से शारिरिक सुख के लिये तड़प रही है। लिहाजा वो इन तीनो से शारिरिक सुख पाने की खातिर उन्हें हवेली में कैद कर लेती है। बाद में एक के बाद एक टर्न एन टवीस्ट आते हैं। क्या अंत में वे तीनों उस भूतनी के चुंगल से छूट पाते हैं ।

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निर्देशन

तुषार हीरानंदानी की कहानी अच्छी थी लेकिन मधुर शर्मा और आकाश कौशिक उसे स्क्रीनप्ले के तहत सही दिशा नहीं दे पाये। फिल्म की शुरूआत बहुत ही साधारण रही। बावजूद इसके इन्दर कुमार संवादों और अपने अनुभवी डायरेक्शन से लोगों का हंसाते रहते हैं। हालांकि कई जगह उटपंटाग प्रसंग खीज भी पैदा करते हैं लेकिन दर्शक उन्हें नजरअंदाज करते हुए एडल्ट कॉमेडी का मजा लेता रहता है। फिल्म में वही एडल्ट संवाद हैं जो यंग अपने दोस्तों के साथ आम भाषा में यूज करते हैं इसलिये कुछ ओवर नहीं लगता। परन्तु ग्रैंडमस्ती की तरह ये सो करोडी फिल्म तो नहीं बन सकती और न ही ये मल्टी प्लक्स की फिल्म है लेकिन सिंगल्स थियेटर्स के दर्शक इसे हाथों हाथ लेगें ।

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अभिनय

इस बार भी विवेक ऑबेरॉय, रितेश देशमुख और आफताब शिवदसानी की तिकड़ी है। इनमें रितेश देशमुख की टाइमिंग पहले की तरह अच्छी है, आफताब ने सबसे अछा काम किया है लेकिन उसे देखकर अफसोस होता है कि इतना शानदार अभिनेता अभी तक अपनी पुख्ता जमीन क्यों नहीं बना पाया, बेशक यंहा किस्मत पर यकीन होने लगता है। इनमें विवेक सबसे कमजोर साबित होते हैं ऐसा नहीं कि वे अच्छे अभिनेता नहीं लेकिन इस तरह के रोल उनकी इमेज से मेल नहीं खाते । भूतनी के तौर पर उर्वशी रौतेला खूबसूरत और सेक्सी तो लगी ही है साथ ही उसने अभिनय भी षानदार किया है। जंहा वो ग्लैमरस दृश्यों में अच्छी लगती है वहीं  लोगों को डराने में भी पूरी तरह कामयाब है। इनके अलावा तीनों की पत्निीयों के रूप में पूजा बनर्जी, मिष्टी और श्रद्धा दास भी काफी खूबसूरत लगी हैं। संजय मिश्रा अंताक्ष्री बाबा और उशा नाडकर्णी एक अमीर सास के रूप में खूब मनोरंजन करते हैं ।

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संगीत

शारीब तौषी और संजीव दर्शन के संगीत में कई गाने अच्छे लगते हैं और उनसे अच्छा उनका फिल्मांकन लगता है। लेकिन एक आध गाना कहानी में अवरोध पैदा करता है ।

क्यों देखें

एडल्ट कॉमडी और सेक्सी फिल्मों के शौकीन दर्शकों के लिये फिल्म में भरपूर मनोरंजन है ।


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Mayapuri

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