मूवी रिव्यू: मनोरजंन और रियलिस्टिक अप्रोच यानि – ‘जय गंगाजल’

1 min


रेटिंग****

प्रकाश झा की फिल्म ‘जय गंगाजल’ का मुकाबला उन्हीं की फिल्म ‘गंगाजल’ से है और क्या बेहतरीन मुकाबला है। दोनों फिल्मों के नायकों के सामने दंभ और गुरूर से भरे भ्रष्ट नेता और पुलिस ऑफिसर हैं लेकिन वो न सिर्फ भ्रष्ट पुलिसवालों को सही रास्ते पर लाते हैं बल्कि भ्रष्ट नेताओं को भी कानून उनकी औकात से परिचित करवाते हैं। दोनों फिल्मों में सबसे बड़ा फर्क ये हैं कि गंगाजल में नायक पुरूष था जबकि ‘जय गंगाजल’ में महिला है।

कहानी

मध्य के किसी प्रांत बांकीपुर के एसपी के लिये गृह मंत्री करण करमाकर अपनी पसंद की आईपीएस ऑफिसर आभा माथुर यानि प्रियंका चोपड़ा को लाते हैं। वे उसे बताते हैं कि यहां पहले से सब कुछ सैट है इसलिये आराम से कुर्सी पर बैठ कर बस सलामी ठुकवाते रहो। आभा को शुरूआत में पता चल जाता हैं कि बाहर विधायक मानव कौल और उसके छोटे भाई निनाद कामत का आतंक है उस आतंक को बढ़ावा देने में कुछ पुलिस ऑफिसर भी शामिल हैं जिनमें प्रमुख हैं डीएसपी बी एन सिंह यानि प्रकाश झा। बी एन सिंह किसी भी काम को सेट करने में महारत हासिल किये हुये है। विधायक का भाई गांव के किसानों की जमीन हथियाकर उस पर किसी उद्योगपति के साथ कोई प्लांट लगवाने पर अमादा है लेकिन कुछ किसान अपनी जमीन किसी कीमत पर नहीं बेचना चाहते। डीएसपी के साथ एक ऐसा हादसा हो जाता है जिससे उनका हृदय परिवर्तन हो जाता है उसके बाद मुजरिमों को पेड़ से लटकाने का सिलसिला शुरू हो जाता है जिसे नाम दिया जाता हें सुसाईट और इस बार पुलिस को पब्लिक का भी समर्थन है। अंत में आभा विधायक को उसके किये की सजा दिलवाने के लिये जेल भेजने में सफल होती है, इस प्रकार आभा माथुर और भोलानाथ सिंह के प्रयासों से बांकीपुर से अपराधी और अपराध दोनों का सफाया हो जाता है।

Jai-Gangaajal-Trailerdf

निर्देशन

प्रकाश झा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ साथ रीयल अप्रोच भी होती है। इसीलिये उनके पात्र वास्तविक लगने लगते हैं। इस फिल्म में भी उनकी चिरपरिचित शैली प्रभावशाली तरीके से दिखाई देती है। जंहा गंगाजल में अपराधियों को गंगाजल यानि तेजाब से अंधा किया गया था, जय गंगाजल में उन्हें पेड़ से लटकाकर सुसाईट करवाया गया है। राजनेता हो या नेतागण या फिर पुलिस डिपार्टमेन्ट सारे जाने पहचाने से लगते हैं। ये करिश्मा सिर्फ प्रकाश झा की फिल्मों में ही देखने को मिलता है। फिल्म की कथा पटकथा शुरू से तेज रफ्तार पकड़े हुए है ऊपर से प्रभावशाली संवाद जैसे कीचड़ को साफ करने के लिये साफ पानी की जरूरत होती है न कि गंदे पानी की या आज समाज में उसकी इज्जत होती है जो कानून तोड़ता है लेकिन मैं उसकी इज्जत करती हूं जो कानून तोड़ने वालों को तोड़ता है या फिर अगर मस्ती से जीना है तो कभी अपनी इमेज मत बनने दो। फिल्म के संगीत की बात की जाये तो फिल्म में एक दर्जन गाने हैं लेकिन सभी बैकग्राउंड में कहानी के साथ साथ चलते हैं। हम कह सकते हैं कि ये फिल्म भी प्रकाश झा की फिल्मों में एक और नग की तरह है।

jai-gangaajal-trailer-story_647_122215055717

अभिनय

प्रियंका चोपड़ा उन अभिनेत्रियों में शामिल हो चुकी है जो किसी भी भूमिका को आत्मसात करने में माहिर होती है। यहां भी उन्होंने एसपी आभा माथुर की भूमिका में जैसे घुस कर काम किया अपनी भूमिका के तहत वे हर सीन में चुस्त दुरूरस्त दिखाई दी हैं। एक्शन सीनों में उनकी फुर्ती और सहजता दिखते बनती है। इसके बाद फिल्म का सरप्राइज हैं खुद प्रकाश झा। इस बार उन्होंने सारी जिम्मेदारियों के अलावा अभिनय भी किया है। डीएसपी बीएन सिंह की भूमिका के निगेटिव और पॉजिटिव पार्ट को उन्होंने एक कुशल अभिनेता की तरह निभाया है। उनकी भूमिका इतनी सशक्त हैं कि इस बार तो कहानी उन्ही की तरफ मुड़ जाती है। इसके बाद नंबर आता हैं मानव कौल का। इससे पहले भी वे एक दो फिल्मों में आ चुके हैं लेकिन बड़े पर्दे पर इस फिल्म से उनका सही अवतरण हुआ है। लंबे समय से थियेटर से जुड़े मानव ने विधायक की नाकारात्मक भूमिका को बिना चीख पुकार के पूरे संयम से अभिव्यक्त किया है। उनके रूप में बॉलीवुड को एक और बेहतरीन अदाकार मिला है। गृहमंत्री के तौर पर किरण करमाकर ने बहुत ही सहज अभिनय कर भूमिका को सशक्त बना दिया। उसी प्रकार विधायक के बाहुबली भाई के रोल में निनाद कामत बढि़या काम कर गये। मुरली शर्मा फिल्म दर फिल्म निखरते जा रहे हैं। मुन्ना मर्दानी की जटिल भूमिका को उन्होंने इतनी कुशलता से निभाया है कि उनकी भूमिका में क्रूरता के साथ साथ उनका जनानापन बड़ी सहजता से दिखाई देता है। उनके अलावा राहुल भट्ट, बेगा अमोटिया, शक्ति सिन्हा तथा प्रणय नारायण आदि कलाकार भी उल्लेखनीय रहे।

fhpcg4z7p1ayngla.D.0.Prakash-Jha-Jai-Gangaajal-Movie-Photo (1)

क्यों देखें

मनोरंजन और रियलिस्टिक अप्रोच फिल्मों को पंसद करने वाले दर्शकों के लिये ये फिल्म एक तोहफा है इसलिये इसे नजरअंदाज करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये