मूवी रिव्यू: एक साधारण एक्शन फिल्म है ‘कबाली’

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रेटिंग**

साउथ इंडियन सुपर स्टार रजनीकांत आज भी वहां इतने लोकप्रिय हैं कि उनकी फिल्मों का आज भी बेसब्री से इंतजार रहता है। पा रंजीत द्धारा निर्देशित फिल्म ‘कबाली’  का साउथ के अलावा बॉलीवुड में भी बेसब्री से इंतजार था। परन्तु फिल्म के बारे में जो सुना गया था वो उन उम्मीदों पर खरी साबित न हो एक साधारण एक्शन फिल्म निकली।

कहानी

कई सो साल पहले मलेशिया में मजदूरी के लिये इंडिया से गये लोग  वहीं बस गये। बाद में उनकी आने वाली नस्ले वहीं बस गई और वहीं की होकर रह गई। उन दिनों वहां चीनी और स्थानीय लोगों को इंडियंस से कहीं ज्यादा तरजीह दी जाती थी। लिहाजा विरोध स्वरूप कबाली नामक नोजवान यानि रजनीकांत भारतीय मजदूरों का रहनुमा बनकर सामने आता है और उन्हें न्याय दिलवाता है। धीरे धीरे कबाली की लोकप्रियता इतनी बढ़ जाती है कि वो कुछ भारतीय और चीनी लोगों के गिरोह की आंख में खटकने लगता है। ये गिरोह आरतों और ड्रग्स का व्यापार करता है जबकि कबाली भारतीयों के लिये स्कूल और बहुत सी ऐसी चीजें शुरू करवाता है जो उनकी भलाई के लिये शुरू की गई हैं, लेकिन दूसरे गिरोह का सरगना चीनी टोनी और विजय सिंह कबाली को फंसा कर लंबी जेल करवा देते हैं तथा उसकी प्रेग्नेंट बीवी राधिका आप्टे को मार देते हैं।

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पच्चीस साल बाद कबाली जेल से बाहर आता है और एक बार फिर अपने बिखरे साम्राज्य को इक्ट्ठा करता है साथ ही वो एक एक करके अपने दुश्मनों से बदला लेता है। उसी दौरान उसे पता चलता हैं कि उसकी बीवी एक बेटी पैदा करके मरी थी। बाद में वो अपनी बेटी को ढूंढ निकालता है बेटी से उसे पता चलता है कि उसकी मां भी जिन्दा है जो अब इंडिया में है। कबाली अपनी बेटी के साथ पहले तो अपनी बीवी को इंडिया जाकर तलाश करता हैं। उसके बाद मलेशिया वापस आकर टोनी और विजय सिंह और उसके पूरे गिरोह का सफाया करने के बाद ही दम लेता है लेकिन बाद में मलेशिया सरकार कबाली को भी उसी के आदमी के द्धारा मरवा देती है लेकिन ये सांकेतिक तरीके से ही दिखाया गया।

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निर्देशक

पा रंजीत की कबाली भी साउथ की अन्य एक्शन फिल्मों की तरह एक साधारण फिल्म है जिसमें दो गिरोह के बीच मारधाड़ और खूनखराबा ही दिखाया गया है। इससे पहले रजनीकांत की फिल्म शिवाजी भी कुछ ऐसी ही एक्शन फिल्म थी। चूंकि हिन्दी में फिल्म डब की गई है लेकिन डबिंग अच्छी है। फिल्म की शूटिंग ज्यादातर मलेशिया और थाइलैंड में की गई है वहां की कुछ लोकेशनें काफी दर्शनीय है। इसके अलावा साउथ में भी थोड़ी शूटिंग की गई है।

अभिनय

रजनीकांत पहले की तरह आज भी चुस्त दुरूस्त हैं उनके अभिनय में वही चपलता है लेकिन उम्र का प्रभाव भी उन पर दिखार्द देता है। उनसे उम्र में आधी राधिका आप्टे ने बहुत बढ़िया काम किया है। उनकी बेटी के रोल में धनसिका काफी सुंदर और आकर्षक लगी है। छोटी सी भूमिका में नासिर भी अच्छा काम कर गये। तथा दिनेश रवि ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है ।

Kabal

म्यूजिक

संतोष नारायणन के गीत हिन्दी में तो समझ से बाहर हैं लेकिन हो सकता है साउथ में वो पंसद किये गये हों।

क्यों देखें

रजनीकांत के प्रशंसक आज भी उनकी चुस्ती फुर्ती भरे एक्शन के लिये ये फिल्म देख सकते हैं।

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Mayapuri