मूवी रिव्यू ‘लव फिर कभी’ बढि़या कहानी घटिया निर्देशन

1 min


जब आप फाकाकशी कर रहे हों और कोई ऐसी लड़की आपकी लाइफ में आ जाये जो आपसे प्यार बेशक न करे लेकिन आपकी फाकाकशी को दूर करने के तरीके जरूर बता सकती है । लेकिन क्या वे तरीके सामाजिक तौर पर आपको मान सम्मान दिला सकते हैं? ये डायरेक्टर अजय यादव की फिल्म ‘ लव… फिर कभी’ की टैग लाइन है ।10897103_1516578205233655_8631051305687769582_nआगरे का एक लड़का सौरभ राॅय एक होटल में वेटर कम बारमैन है । उसकी जिन्दगी में सिर्फ ये होटल और उसमें काम करना ही है । बावजूद इसके वो हर बार सोते हुए पकड़ा जाता है । अर्जिता राॅय एक ऐसी लड़की है जिसका मकसद अमीर लोगों को फोसकर उनके पैसे पर ऐश करना ही है । एक दिन वो उसी होटल में आती है जहां सौरभ उसे सोता हुआ मिलता है ।

10891912_1514074982150644_6037752560098200522_nवो उसे भी कोई अमीरजादा समझते हुये अपने जन्मदिन का पार्टनर बना लेती है। और उसके साथ उसी होटल में एक रात तक गुजार लेती है ओर जब इस बात का उसके अतीर पार्टनर को पता चल जाता है तो वो उसे भगा देता है तब वो सौरभ के पास वापस आती है लेकिन जगब उसे पता चलता है कि वो कोई पैसेवाला नहीं बल्कि उसे होटल का मामूली वेटर है तो वो आगरा छौड़ दिल्ली आकर कोई दूसरा मुर्गा ढूंढना शुरू कर देती है । लेकिन एक रात साथ रहने के बाद सौरभ उसे प्यार करने लगता है और नौकरी से निकाले जाने के बाद दिल्ली आ जाता है लेकिन इस बार अर्जिता उसे मुहं नही लगाती । उसी दौरान उसकी मुलाकात एक ताजी ताजी विधवा हुई बेहद अमीर लेडी मेघना पठेल से होती है वो उसे अपने खेलने के लिये एक खिलोने के तौर पर रख लेती है। उसी दौरान अर्जिता को भी एक मुर्गा मिल जाता है । तब वो सौरभ को बताती हैं कि अपनी अमीर पार्टनर से जितना फायदा उठा सकते हो उठाने की कोशिश करो । लेकिन धीरे धीरे दोनों एक दूसरे को प्यार भी करने लगते हैं । और एक दिन सब ऐशोआराम छौड़ एक दूसरे के हो जाते हैं ।10891611_1514074965483979_8425893102688179627_nबेशक एक नई सी कहानी पर एक बेहतरीन फिल्म बन सकती थी लेकिन कमजोर कलकारों और कमजोर निर्देशन की बदौलत वो एक अतिसाधारण फिल्म बन कर रह जाती है । अगर आर्टिस्टों की बात की जाये तो सिर्फ अर्जिता राॅय ही पूरी फिल्म अपने कंधो पर लेकर चलती है । अर्जिता में वो सब कुछ है जो बाॅलीवुड की हीरोइन में होना चाहिये । लेकिन अफसोस उसका डेब्यु एक कमजोर फिल्म से हुआ । फिल्म का बस एक उजला पक्ष है वो है अश्फाक का संगीत । क्योंकि फिल्म के सभी गााने अच्छे है । लेकिन जितने अच्छे गाने है उतनी ही बुरी फिल्म साबित होती है । फिल्म के प्रोडयूसर ओ पी राय इससे पहले लेख टंडन तथा कई अन्य निर्देशकों के साथ फिल्में बना चुके है । इतना अनुभव होने के बाद भी उनका ऐसी फिल्म से जुड़ना समझ से बाहर की बात है


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये