मूवी रिव्यू: दबंग ‘मिर्ज़ा जूलिएट’

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रेटिंग****

एक अच्छा निर्देशक कई बार देखी जा चुकी कहानीयाें को जोड़ इतनी बढि़या फिल्म बना देता है कि उसे देख कर मुंहू से वाह निकलता है। निर्देशक राजेश राम सिंह की फिल्म ‘मिर्ज़ा जूलिएट’ इस बात का उत्कृष नमूना है।

जूली शुक्ला यानि  पिया बाजपेयी मिर्जा़पुर के दबंग धर्मराज यानि प्रियांशू तथा उसके भाइयों की उन जैसी ही दबंग और मुंहूफट बहन है जो हर किसी से पंगा लेती फिरती है। उसका रिश्ता प्रयाग के एक धूर्त नेता स्वानंद किरकिरे के बेटे चंदन सान्याल से हो चुका है। चंदन हमेशा उसे जूलियट कहते हुये फोन पर कामुक और सेक्सी बातें करता रहता है जो उसे जरा भी पसंद नहीं। मिर्जा़ यानि दर्शन कुमार ऐसा मुस्लिम युवक है बचपन में जिसके मां बाप की हत्या कर दी गई थी बदले में उसने भी उनके हत्यारे को मार दिया था उसके बाद उसका बचपन ऐसे आदमी के साये में गुजरा जिसने उसे हत्यारा बना दिया था लेकिन एक दिन वो अपनी पिछली जिन्दगी छोड़ अपने मामू के पास मिर्जापुर आ जाता है। वहां उसकी मुलाकात उसके बचपन की साथी जूली से होती है। जूली उसके साथ भी अंतरंग बातें खुुुुलकर करती है और एक दिन स्वंय उसके साथ हमबिस्तर हो जाती है, बावजूद इसके उसके दिल में मिर्जा के प्रति कोई प्रेमभाव नहीं है जबकि मिर्जा उस पर मर मिटता है । बाद में  मिर्जा  जूली के दिल में अपने लिये प्यार का एहसास करवाने के अलावा, चंदन सान्याल तथा उसके भाईयों से  अपने प्यार को छीन पाता है  या नहीं ? ये फिल्म में देखना ज्यादा बेहतर होगा।mirzajuuliet-

बेशक कहानी कई बार देखी जा चुकी फिल्मों का मिश्रण है लेकिन दिलचस्प है। फिल्म के किरदार ऐसे हैं जो एक हद तक रीयल लगते हैं। फिल्म में मिर्जा़  रोमियो की जगह मिर्जा है जो जूलियट के लिये मरने मारने तक को तैयार है। बेशक यहां यूपी के बाहुबली और नेता का गठजौड़ है जो काफी सहज है क्योंकि उसे जरा भी ग्लौरीफाई नहीं किया गया । फिल्म का बैकग्राउंड विश्वसनीय है। लेकिन फिर भी कुछ किरदार अधूरे अधूरे से लगते हैं। जैसे मिर्जा और धर्मराज के किरदार। जिन्हें और मजबूत बनाया जा सकता था। निर्देशक ने कहानी में रोमांस और राजनीति को बैलेंस रखने की कोशिश की है। फिल्म कई जगह शिथिल होने लगती है। बावजूद इसके दर्शक की दिलचस्पी बनी रहती है। फिल्म का संगीत भी कहानी में इस तरह मिक्स है कि कोई भी गाना याद नहीं रहता।Mirza

साउथ इंडियन फिल्में कर चुकी पिया बाजपेयी ने फिल्म ‘लाल रंग’ से हिन्दी फिल्मों में कदम रखा था लेकिन  मौजूदा फिल्म में उसने अपने किरदार की चुनौतियों को जिस प्रकार अपने अभिनय में ढाल कर उसे दिलचस्प बनाया हैं उसे देखकर उसे अलग अभिनेत्रीयों की जमात में देखा जाता है । उसने अपने किरदार को इतने बेहतरीन ढंग से निभाया है कि दर्शन कुमार जैसा थियेटर एक्टर भी कितनी जगह उसके पीछे हांफता दिखाई देता है । वैसे भी  दर्शन की भूमिका पर ज्यादा मेहनत नहीं की गई । प्रियांशू चटर्जी का जितना प्रभावशाली गैटअप है रोल उतना दमदार नहीं दिखाई दिया,फिर भी वे बढि़या काम कर गये। उनके छोटे भाई की भूमिका निभाने वाला आर्टिस्ट आकर्षित करता है । इसके अलावा स्वानंद किरकिरे अपने रोल में सहज हैं वहीं उनके कामुक बेटे की भूमिका में चंदन सान्याल शुरू से अंत तक एक जैसे ही दिखाई देते हैं ।

अगर आप दबंग जूलियट और उसके अलग से प्रेमी को देखना चाहते हैं तो फिल्म एक बार जरूर देखें ।


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Mayapuri

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