मूवी रिव्यू: इस बार बच्चों के अलावा बड़ों का भी मनोरंजन करते हैं ‘मोटू पतलू किंग ऑफ किंग्स’

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रेटिंग***

बाल पत्रिका लोटपोट के कार्टून पात्र ‘मोटू पतलू’ पिछले पेंतालिस वर्षों से लगातार बच्चों और बड़ों का मनोरंजन करते आ रहे हैं तथा पिछले कुछ अरसे से वे निक चैनल पर एनिमेटिड किरदारों के रूप में ड्राइंग रूम के दर्शकों के बीच इस कदर लोकप्रिय हैं कि उनकी लोकप्रियता को देखते हुये केतन मेहता, दीपा साही तथा जे एस मेहता ने सुहास कादव के निर्देशन में एनिमेशन फीचर फिल्म ‘मोटू पतलू किंग ऑफ किंग्स’ थ्रीडी  का निर्माण किया है।

कहानी

सर्कस में आग लगने की वजह से वहां काम करता गुडडू गालिब शेर भाग कर फुरफुरी नगर में आ जाता है जो गाजर मूली खाने का शौकीन है। वह वहां रह रहे ‘मोटू पतलू’ से गुडडू कहता है कि अब वो वापस सर्कस में नहीं जाना जाता तो वे उससे वायदा करते हैं कि वे उसे उसकी मर्जी के मुताबिक जंगल में छोड़कर आयेंगे। उधर जंगल में नरसिंंघा नामक खलनायक जो जगंल को बरबाद कर वहां दबा सोना पाना चाहता है लेकिन जंगल के राजा सिंंघा शेर के होते हुए ऐसा मुमकिन नहीं लिहाजा वो सिंंघा को मारने में कामयाब हो वहां अपने दलबल के साथ जंगल में घुस आता है। इस बीच जब ‘मोटू पतलू’ को पता चलता है तो पहले वे गुडडू से सिंंघा की जगह लेने के लिये कहते है लेकिन जब गुडडू असर्मथता दिखाता है तो वे जगंल के अन्य जानवरों के साथ स्वंय नरसिंंघा को सबक सिखाने निकल पड़ते हैं। बाद में गुडडू भी उनका साथ देने का मन बना लेता है। इस तरह मोटू पतलू नरसिंंघा और उसके साथियों को मार कर जंगल और और वहां रह रहे जानवरों की रक्षा करते हैं।motu-patlu-stills

निर्देशन

दरअसल ‘मोटू पतलू’ वर्षों से बच्चों और बड़ों के प्रिय पात्र हैं इसलिये फिल्म में उन्हें नये सिरे से समझने की जरूरत नहीं पड़ती। बस दर्शक इस बार उन्हें थ्रीडी फॉर्मेट के साथ एक नया कारनामा करते हुए देखते है। दूसरे निर्देशक उन्हें फिल्म में इतनी सरलता से पेश करते हैं कि दर्शक फिल्म और उसमें विचरते उनके अलावा अन्य पात्रों के कारनामों को खूब एन्जॉय करता है। फिल्म में गुड्डू की आवाज बने हैं विनय पाठक, उनके अलावा अन्य पात्रों की डबिंग भी बढ़िया रही। एनिमेशन के तहत लोकेशनों की संरचना लुभावनी है जो थ्रीडी फार्मेट के तहत और ज्यादा अच्छी लगती हैं। फिल्म के अंत में प्रमोशन गाने पर थिरकते एनिमेटिड पात्र अपने डांस से दर्शक को रूकने पर मजबूर करते हैं।motu-patlu-king-of-kings

संगीत

फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘मोटू पतलू’ की जोड़ी जो गुलजार साहब द्वारा लिखा गया और सुखविन्दर की आवाज में गाया पहले से ही पॉपुलर है। इसके अलावा विशाल भारद्वाज की कंपोजिंग का गाना भी आकर्षक है।cr-wvdbw8aa8z3m

क्यों देखें

मोटू पतलू पहली बार थ्रीडी फॉर्मेट में बनी इस एनिमेशन फिल्म में बच्चों के अलावा बड़ों का मनोरंजन करने में भी पूरी तरह कामयाब हैं।


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Mayapuri

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