मूवी रिव्यू: दर्शकों की कसौटी पर खरी साबित होती है ‘मुश्किल’

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रेटिंग***

हॉरर फिल्मों का हमेशा से एक दर्शक वर्ग रहा है । जो हर प्रकार की हॉरर सस्पेंस फिल्में देखता आ रहा है । इसी श्रृंखला में निर्देशक राजीव एस रूइया की हॉरर फिल्म ‘ मुश्किल’ जो जाना पहचाना मसाला होने के बावजूद दर्शक वर्ग की पंसद पर खरी साबित होती है ।

कहानी

चार सहेलियां पूजा बिष्ट, नाजिया हुसैन,शफ्फाक नाज़ तथा अर्चना शास्त्री घूमने ग्रीस जाती हैं । वहां एक गाइड कुणाल राय कपूर उन्हें न सिर्फ घुमाता है बल्कि रहने के लिये उन्हें एक बंगला भी दिलवाता है । घूमते हुये पहले इन चारों को कुछ अलग सा एहसास होता है, लेकिन रात को बंगले में साफ हो जाता है कि वहां भूत प्रेत का साया है, जो एक दिन उन चारों को लगभग कैद कर लेता है । बनारस का रहने वाला रजनीश दुग्गल एक अघोरी है, जो एक शापित  घाट को अपने तंत्र मंत्र द्धारा शापमुक्त करता है । एक दिन उसे पता चलता है कि उसकी प्रेमिका पूजा बिष्ट ग्रीस में अपनी सहेलियों के साथ एक प्रेत के चुंगल में फंसी हुई है लिहाजा वो पूजा और उसकी सहेलियों को बचाने के लिये ग्रीस पहुंच जाता है । वहां जाकर वो ढे़र सारी दुष्वारियों का सामना करते हुये भी क्या अपनी प्रेमिका और उसकी सहेलियों का प्रेत मुक्त कर पाता है ?

अवलोकन

राजीव रूइया माई फ्रेंड गणेशा जैसी सुपर हिट सीरीज के तहत जाने जाते हैं । इसके अलावा भी उन्होंने अलग अलग विषयों पर फिल्में बनाई हैं । सांसे के बाद ये उनकी दूसरी हॉरर फिल्म है । फिल्म में सारे एलीमेंट्स हैं जो  हॉरर फिल्म में होने चाहिये । एक वक्त था जब बिगड़े हुये चेहरों से डराया जाता था लेकिन रामू, रूइया  जैसे मेकर्स डराने के लिये कहानी और प्रेजेंटेशन का सहारा लेते हुये हॉरर फिल्मों का स्वरूप ही बदलने में एक हद तक कामयाब रहे । यहां भी राजीव ने एक साधारण सी कहानी को अपनी प्रेजेंशन के तहत खास बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी । जिस प्रकार इस बार राजीव फिल्म को ग्रीस में ले गये, लेकिन वहां की नई और फौरन लोकेशनों का जमकर इस्तेमाल नहीं कर पाये । डायरेक्शन के बाद फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष बैकग्राउंड म्युजिक है जो दर्षकों को पूरी तरह डराने में कामयाब रहा, लेकिन म्युजिक औसत दर्जे का साबित हुआ ।

अभिनय

चार लड़कियों में पूजा बिष्ट रजनीश की प्रेमिका के तौर पर ठीक ठाक काम कर गई । कुणाल के प्रेमिका के तौर पर नाजिया के हिस्से में महज एक गाना आया । बाकी अर्चना शास्त्री और शफ्फाक नाज़ भी ठीक ठाक रहीं । कुणाल राय कपूर ने इस बार भी अपने अभिनय में सहजता बरकरार रखी । रजनीश दुग्गल जैसे इस तरह की भूमिकाओं के अभयस्त हो चुके हैं इसलिये इस बार भी उसने अघोरी की भूमिका  कुशलता से निभाई है ।

 क्यों देखें

हॉरर फिल्मों के शौकीन दर्शकों की कसौटी पर फिल्म खरी साबित होती है ।

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Mayapuri