मूवी रिव्यू: नीरस कथानक अच्छी अभिव्यक्ति ‘नूर’

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रेटिंग**

उपन्यास पर फिल्म बनाना आसान काम नहीं क्योंकि निर्देशक को उपन्यास की मूलता को ध्यान में रखते हुये कहानी गढनी होती है। पाकिस्तानी उपन्यासकार सबा इम्तियाज के उपन्यास कराची: यू आर किलिंग मी पर आधारित ‘नूर’  को निर्देशक सुनील सिप्पी सही दिशा नहीं दे पाये ।

नूर राय चौधरी यानि सोनाक्षी सिन्हा एक ऐसी फ्रिलांस जर्नलिस्ट है जिसकी निजी और पेशवर जिन्दगी में नीरसता भरी हुई है । वह पत्रकारिता में कुछ और करना चाहती जबकि उसका बॉस मनीष चौधरी उसे सनी लीयोनी  के इन्टरव्यू के लिये असाइनमेंट देता है। यहां तक उसका कोई ब्वायफें्रड तक नहीं है सिवाय एक दोस्त साद के जो लंदन में रहता है। जो इंडिया आता जाता रहता है । उसी दौरान उसे आयान मुखर्जी फोटोग्राफर जर्नलिस्ट मिलता है जिससे उसे प्यार हो जाता है। एक दिन नूर को अपनी मेड मालती यानि स्मिता तांबे के जरिये ऐसी स्टोरी हाथ लगती है जिसमें किडनी रैकट का पता चलता है ये स्टोरी पत्राकिरता के क्षेत्र में नूर की वाह वाह कर सकती है लेकिन उसकी स्टोरी चुराकर आयान किसी दूसरे चैनल पर चला देता है। इसके बाद नूर बिखर सी जाती है। यहां एक बार फिर साद उसका साथ देता है और कुछ दिनों के लिये उसे लंदन ले जाता है । वापस आने के बाद नूर अपने शहर मुंबइ्‍​ को टारगेट कर ऐसी स्टोरी लिखती है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो धूम मचा देती है। इस तरह नूर का एक नया जन्म होता है।noor

जैसा कि कहा गया है कि उपन्यास पर फिल्म बनाना हर किसी के बस की बात नहीं ।निर्देशक ने पहले तो पाकिस्तानी उपन्यास का कमजोर मुबंइ्‍​र्रकरण कर दिया,फिर विषय को पूरी तरह धार नहीं दे पाया लिहाजा शुरू के बीस पच्चीस मीनिट तो उसे नूर को रजिस्टर्ड करने में ही लग जाते हैं । उसके बाद भी फिल्म बेस्वाद मंथर गति से चलती हुई अपने गंतव्य तक पहुंचती है । फिल्म की पटकथा कमजोर रही लेकिन संवाद एक हद तक अच्छे रहे। फिल्म  आजकल की चैनल पत्रकारिता पर भी सवाल उठाती है जंहा जर्नलिस्ट स्टोरी के लिये मानवता तक को ताक पर रख रहे हैं । अमान मलिक के संगीत के तहत गुलाबी आंखे तथा मूव योर लक आदि गीत उल्लेखनीय रहे।sonakshi-sinha-noor

अपनी हर फिल्म में निखरती जा रही सोनाक्षी सिन्हा ने इस बार अपनी भूमिका को प्रभावशाली ढंग से जी कर दिखाया  है, लेकिन निर्देशक की विफलता से उसकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया । पूरब कोहली अपने अभिनय से चौंकाते हैं । एम के रैना और स्मिता तांबे का सुंदर अभिनय आंखे नम कर देता है । कनन गिल और शिबानी दांडेकर  भी अच्छी अभिव्यक्ति देने में सफल रहे ।

फिल्म अपने कथानक नहीं बल्कि सोनाक्षी सिन्हा समेत सभी कलाकारों के अच्छे अभिनय के लिये देखी जा सकती है।


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Mayapuri

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