मूवी रिव्यू: ताजा हवा के झोंके का अहसास ‘पल पल दिल के पास’

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pal pal dil ke paas

रेटिंग 2.5

हमेशा की तरह सनी देयोल ने भी अपने डायरेक्शन में बनी लव स्टोरी फिल्म ‘ पल पल दिल के पास’ के जरिये अपने बेटे करण देओल को लवर ब्वॉय के तौर पर सिल्वर स्क्रीन पर उतारा है । सनी ने फिल्म में रोमांस के अलावा सफलता के लगभग सभी मसालों का इस्तेमाल किया है ।

कहानी

करण सहगल यानि करण देओल की अपनी ट्रेकिंग कंपनी है । जबकि सहर सेठी यानि सहर बांबा एक वीडियो ब्लॉगर है । सहर अपनी फैमिली से बचने के लिये पर्वतारोही करण के साथ पर्वतारोहण के लिये निकलती है।  शुरू में दोनों में खूब नोंक झोंक होती है लेकिन बाद में ये प्यार में बदल जाती है । इसके बाद क्या उनका प्यार परवानगी पाता है ? इसके लिये फिल्म देखना जरूरी है ।

अवलोकन

फिल्म को रोमांटिक टच देने के लिये सनी ने सारे फॉर्मूलों का उपयोग किया है, जैसे सहर और करण की आपस में नोंक झोंक,उसके बाद प्यार तथा रोमांचक एक्शन आदि । फिल्म में पहले भाग में ये सब चलता रहता है । फिल्म की कथा जानी पहचानी और पटकथा लूज तथा संवाद साधारण हैं फिल्म का म्यूजिक, एक्शन और फोटोग्राफी बेहद खूबसूरत है, खासकर हिमालय के दृष्य नयनाभिराम है । लेकिन दोनों प्रमुख किरदार सब कुछ करते हुये भी दर्शक को प्रभावित नहीं कर पाते ।

अभिनय

करण देओल धर्मेन्द्र के पोते और सनी के बेटे हैं । दर्शक, दादा और बाप को पोते और बेटे में देखने की भरसक कोशिश करते हैं, लेकिन करण एक हद तक नैचुरल लगे हैं अगर उसकी डायलॉग डिलीवरी को नजर अंदाज कर दिया जाये तो उसे प्रमोटिड पास किया जा सकता है । सहर बांबा पहली फिल्म के हिसाब से अच्छी लगी, उसके चेहरे पर स्वाभिकता झलकती है । बावजूद इसके दोनों को ही अभिनय के क्षेत्र में काफी कुछ सीखना बाकी है ।

क्यों देखें

धर्मेन्द्र की तीसरी पीढ़ी के तौर पर करण देयोल को  सहर बांबा के साथ देखना ताजा हवा के झोंके का अहसास दे सकता है ।

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Mayapuri