मूवी रिव्यू: क्रूरता की पराकाष्ठा दर्शाती – ‘रमन राघव 2.0’

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रेटिंग***

सन 69 के दौरान रामन राघव नामक स्ट्रीट किलर का जबरदस्त आंतक हुआ करता था। उस दौरान उसने करीब चालीस से ज्यादा हत्यायें की थी। उसी से प्रेरित हो अनुराग कश्यप ने ‘रमन राघव 2.0’ का निर्देशन किया है। जो अपनी अभिव्यक्ति से बार बार चौंकाता है ।

कहानी

रमन यानि नवाजूद्दीन सिद्दीकी एक ऐसा पथभ्रष्ट, विक्षिप्त और क्रूर हत्यारा है जो हत्यायें जानबूझकर करता है। वो इसे भगवान का काम मानता है और अपने आपको यमदूत मानता है और हत्या कर आत्मसमर्पण भी करता है। दूसरी तरफ पुलिस ऑफिसर रघुवेन्द्र सिंह उर्फ अब्बी यानि विक्की कौशल जो पुलिस अधिकारी होने बावजूद नशेबाज स्त्रीभोगी ऐसा शख्स है जिसे शादी आदि सिस्टम से परहेज है। वह औरत को सिर्फ भोग की चीज मानता हैं अपने मतलब के लिये वो किसी का भी खून तक कर सकता है। इसीलिये उसके किसी से भी अच्छे ताल्लुकात नही हैं यहां तक की उसके अपनी प्रेमिका और पिता से भी अच्छे ताल्लुक नहीं है । उसी प्रकार रमन भी स्त्रीयों के प्रति क्रूर है। वो अपनी बहन के पूरे परिवार की हत्या कर देता है। इसके बाद ढेर सारी हत्यायें करने के बाद अंत में किस प्रकार वो एक बार फिर पुलिस आफिसर अब्बी के सामने आत्मसमर्पण करता है। उसके बाद कई भेद खुलते हैं। जो अब्बी को बेनकाब करते हैं ।

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निर्देशन

ये भी टिपिकल अनुराग कश्यप टाइप फिल्म है जिस प्रकार वे किसी बात को अपने मुताबिक कहते हैं फिल्म में दोनो मुख्य चरित्रों का भी उन्होंने उसी प्रकार चित्रित्र किया है। कहानी महज रामन राघव से प्रेरित है बाकी उन्होंने अपने मुताबिक कहानी को आधार दिया है। फिल्म में न तो अन्य फिल्मों की तरह पुलिस और हत्यारे के बीच पकड़ा पकड़ी का खेल है और न ही कुछ और फिल्मी हथकंडे। कहानी ज्यादातर स्लम एरिया में ही घूमती है। रमन और राघव कई बार दर्शकों को बेहद भयभीत करने में सफल हैं। कहानी को कई अध्यायों में पेश किया गया है। फिल्म के संवाद किरदारों को वास्तविक बनाते हैं ।

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अभिनय

एक बार फिर नवाजूद्दीन क्रूर हत्यारे रमन को साक्षात जीवित करने में सफल साबित हुये हैं। खासकर उसकी बहन के परिवार को मारने का दृश्य बहुत ही भयावह बन पड़ा है। एक दरिन्दगी भरे किरदार में नवाज की सहजता देखते बनती है। उनकी बहन के छोटे से किरदार में अमृता सुभाष प्रभावित करती हैं । इसी तरह विक्की की साउथ इंडियन प्रेमिका शोभिता धूलीपाला ने शानदार ढंग से अभिव्यक्त किया है । जंहा तक विक्की कौशल की बात की जाये तो उसने एक नशाखोर स्त्री भोगी और कन्फयूज पुलिस अफिसर को अच्छी तरह से निभाया है लेकिन वे कहीं से भी ड्रग एडिक्ट नहीं लगते ।

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संगीत

फिल्म में संदीप ने बैकग्राउंड म्यूजिक से फिल्म को और ज्यादा प्रभावी बनाने में कोई कसर नहीं छौड़ी ।

क्यों देखें

नवाजूद्दीन सिद्दीकी की अदाकारी के दीवाने दर्शकों  को लिये फिल्म एक तोहफा साबित हो सकती है ।


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Mayapuri

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