मूवी रिव्यू: हिमाचली दर्शकों की कसौटी पर खरी साबित होगी ‘सांझ’ (हिन्दी में रिश्तों की सांझ)

1 min


रेटिंग***

आज  हमारा फिल्म संसार पूरी तरह समर्द्ध और फल फूल रहा है ऐसे में आज भी देश के कितने ही राज्य हैं जहां इस विधा को पूरी तरह नजर अंदाज किया जा रहा है। इन्हीं में हिमाचल प्रदेश भी एक ऐसा ही राज्य है जहां कल्चर और भाषा में भी भारी परिवर्तन आ रहा है। इसके अलावा वहां फिल्म जैसी लोकप्रिय विधा के लिये किसी ने कुछ नहीं किया और न ही किसी ने कोई कोशिश की। ऐसे में लेखक निर्माता निर्देशक अजय सकलानी ने पहल करते हुये हिमाचली भाषा और कल्चर को दुनिया के सामने लाने के लिये हिमाचली भाषा की पहली फिल्म ‘सांझ’ बनाई जिसे हिन्दी में रिश्तों की ‘सांझ’ के नाम रिलीज किया जा रहा है।

डा. आसिफ बसरा हिमाचल के गांव में पैदा होने के बाद शहर में अपनी बीवी और सोलह साल की बेटी संजू यानि अदिति चारक के साथ रहता है जबकि उसकी मां तरनजीत कौर गांव में अकेली रहती है। अचानक संजू के साथ कुछ ऐसा हो जाता है कि उसके बाद आसिफ उसे गांव में अपनी मां के पास कुछ दिन के लिये छौड़ जाता है । शहर में पली बढ़ी संजू गांव में नहीं रहना चाहती, उधर हमेशा अकेली रहते हुये दादी भी चिड़चिडी हो चुकी है लिहाजा दोनों में एक मीनिट नहीं बनती। दादी के पास गांव का एक अनाथ और दिमागी तौर पर कमजोर लड़का विशाल परपग्गा यानि जौंदा रहता है जिसे दादी बहुत चाहती है। पहले तो संजू जौंदा को देखकर चिड़ती और उसे मारती पीटती रहती है लेकिन धीरे धीरे उसे वो अच्छा लगने लगता है। बाद में तीन पात्रों को लेकर कहानी आगे बढती है। अंत में दिखाया गया है कि किस तरह जौंदा दादी पोती के बीच प्यार मौहब्बत का वातावरण पैदा करने में कामयाब होता है।

अजय सकलानी का ये पहला प्रयास है। उसने अपने कल्चर और भाषा से मेल खाती ऐसी कहानी का चुनाव किया जिसमें द्वेश, ईर्ष्या, अलगावपन तथा इमोशन आदि सभी कुछ था। फिल्म की कास्टिंग फिल्म को रीयल बनाती है। एक दो कलाकारों को छौड़ सभी कलाकार लोकल और नये है लेकिन उनसे बहुत अच्छा काम लिया गया। गौरव गुलेरिया का संगीत और हिमाचल की मनोरम लोकेशनें फिल्म को और ज्यादा दर्शनीय बनाने में मदद करती है। हिमाचली भाषा के अलावा हिन्दी में की गई डबिंग अच्छी है। लिहाजा फिल्म दोनों भाषाओं में एक साथ रिलीज हुई है ।

आसिफ बसरा हिन्दी फिल्मों का जाना पहचाना चेहरा है,उसने अपनी भूमिका को एक कुशल अभिनेता के तौर पर निभाया है। तरनजीत कौर ने एक मां की भूमिका को पूरी तरह साकार किया है। अर्धपागल के रोल में विशाल कई जगह इमोशनल कर जाता है।  अभिनय से पूरी तरह अंजान अदिति चारक भी एक हद तक अच्छा काम कर गई ।

सांझ एक ऐसी रीजनल फिल्म है  जो हिमाचली दर्शकों की कसौटी पर खरी साबित होने वाली है। इसके अलावा इसका हिन्दी वर्जन हिन्दी दर्शकों को  पंसद आ सकता है।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये