मूूवी रिव्यू: एजुकेशन पर सवाल उठाती है – ‘रफ बुक’

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रेटिंग**

एजुकेशन में किस कदर बदलाव और भ्रष्टाचार आ चुका है। ये इससे पहले कई फिल्में प्रभावशाली ढंग से कह चुकी हैं। अब वही बात निर्देशक अनंत नारायण महादेवन ने अपनी फिल्म ‘रफ बुक’ में कहने की कोशिश की है। लेकिन वे वो सब कहने में आंशिक तौर पर ही सफल हो पाये हैं।

कहानी

तनिष्ठा चटर्जी एक ऐसी टीचर है जो थ्यौरी नहीं बल्कि प्रेक्टिकल में बिलीव करती है दूसरे वो आज की शिक्षा प्रणली में बिलीव नहीं करती। जब उसे पता चलता हैं कि उसका पति रिश्वतखोर हैं तो वो उससे तलाक ले किसी दूसरे स्कूल में टीचर बन जाती है । लेकिन वहां उसे लगता है कि अब टीचिंग भी एक सेल्समैन की तरह हो गई है क्योंकि कॉलेज में ही कोचिंग लेने की तैयारी हो रही हैं जिसका वो विरोध करती है लेकिन उसे स्कूल से सस्पेंड कर दिया जाता है लेकिन तब तक उसके स्टूडेंट समझ जाते हैं कि उनकी टीचर एक हद तक सही है । लिहाजा वे उससे अलग से कोचिंग लेने लगते हैं। और एक दिन सफल होकर दिखाते हैं ।

Rough Book

निर्देशन

अनंत महादेवन की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि वे सो प्रतिशत कहना चाहते हैं लेकिन बीस प्रतिशत से ज्यादा नहीं दिखा पाते। यहां भी वे शिक्षा को लेकर काफी कुछ कहना चाहते हैं लेकिन वे अपनी बात प्रभावशाली तरीके से नहीं कह पाते। उन्होंने स्कूल टीचर्स और स्टूडेंट्स वगैरह का माहौल ठीक रखा है। और वे जो कहना चाहते हैं एक हद दर्शक उस पर सोचता भी है ।

Tanishta Chaterjee

अभिनय

तनिष्ठा चटर्जी एक अंतर्राष्ट्रीय अभिनेत्री है। उसने शिक्षा के चालू सिस्टम से अलग सोच वाली टीचर को बेखूबी निभाया है। उसके अलावा फिल्म तकरीबन सारे छोटे छोटे किरदार हैं जिन्हें निभाने वाले किरदार अपने किरादारों के साथ न्याय करते नजर आते हैं। जिनमें अमाल एफ खान, कैजाद कोतवाल, जॉय सेनगुप्ता तथा विनय जैन उल्लेखनीय रहे ।

संगीत

फिल्म का म्यूजिक कहानी के अनुरूप साधारण है ।

क्यों देखें

विचारात्मक फिल्में पंसद करने वाले फिल्म देख सकते हैं ।

 

 

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Mayapuri