मूवी रिव्यू: सही तरह से अपनी बात नहीं कह पाती शादी रनिंग…..

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रेटिंग**

निर्देशक अमित राय की पहली निर्देशकीय प्रस्तुति ‘शादी रनिंग डॉट कॉम’ अपनेक टाइटल से डॉट कॉम हटने के बाद अधूरी सी होकर रह जाती है । कहानी में निर्देशक ने एक नया प्रयोग करने की कोशिश की जिसमें वो पूरी तरह से नाकामयाब साबित होता है ।

अपनी कुछ इच्छाओं के साथ पटना से पंजाब आकर भरोसे यानि अमित साद निम्मी यानि तापसी पन्नू के पिता की कपड़े की दुकान पर काम करता है । वहां पिता के भरोसमंद कर्मचारी के अलावा वो निम्मी का भी राजदार है और उसे प्यार भी करता है । इतना सब कुछ होते हुये भी जब उसे निम्मी और उसके पिता से कुछ नहीं मिलता तो वो नोकरी छौड़ देता है । कुछ दिन बाद वह अपने रूम पार्टनर और दोस्त अर्श बवेजा के साथ एक बिजनिस शुरू करता हैं जिसका नाम है ‘शादी रनिंग’ जिसके तहत वो घर से भाग कर शादी करने वाले जोड़ों की शादी करवाता है । कुछ समय बाद निम्मी भी उनके साथ आ मिलती है और एक दिन वो उनके पचासवें केस के तहत उन्हें किसी के साथ भागकर अपनी शादी करवाने का ही ऑफर दे डालती है । बाद में पता चलता हैं कि निम्मी ने झूठ बोला था कि वो किसी से और से नहीं बल्कि वो भरोसे के साथ शादी करने के लिये ही घर से भागी है । जबकि भरोसे की शादी उसके मामा ब्रिजेश काला ने पटना में तय की हुई है । इस सिचवेशन में पहले तो भरोसे घबरा जाता हैं लेकिन बाद में संयत हो निम्मी के घरवालों से बचने के लिये वो अर्श और निम्मी को लेकरे पटना अपने मामा के घर आ जाता है ।यहां आकर उन तीनों को पता चलता है कि भरोसे के मामा जौर शौर से उसकी शादी के इंतजाम में लगे हैं । बाद में किस प्रकार भरोसे अपने दोस्त और निम्मी के साथ मिलकर अपनी शादी रोकने में कामयाब हो पाता है । इसके बाद जब जब वो वापस निम्मी को लेकर पंजाब उसके घर जाता है तो क्या होता है…?running shaadi

फिल्म पंजाब में शुरू होती है और फिर मध्यांतर के बाद पटना बिहार पहुंच जाती है लेकिन जब तक वो पंजाब में रहती हैं तब तक सब असली लगता है लेकिन बिहार पहंुचते ही सब नकली लगने लगता है यहां तक लोकेशन भी, सिवाय भरोसे के मामा ब्रिजेन्द काला और उसके होने वाले साले पंकज झा के, क्योंकि ये दो पात्र ही ऐसे हैं जो अपनी भाषा और कारगुजारियों से बिहार होने का एहसास करवाते हैं । दरअसल पटना के कुछ जाने पहचाने स्थानों के अलावा पता नहीं क्यों पटना को किसी और जगह से बदल दिया गया । इसलिये लोकेशन बदलने से फिल्म भी बदल जाती है । दूसरे, शीर्षक से डॉट कॉम का हट जाना भी फिल्म को अधूरा कर जाता है। जबकि फिल्म के प्रडयूसर शूजीत सरकार हैं बावजूद इसके फिल्म इतनी बिखरी बिखरी सी है । लगता है शूजीत फिल्म की कोचिंग सही तरह से नहीं कर पाये या अपनी फिल्म ‘ पिंक’ में व्यस्त होने के तहत उन्होंने फिल्म को पूरी तरह अमित राय के हवाले कर दिया । लिहाजा फिल्म में जहां पंजाब पूरी तरह से दिखाई देता हैं लेकिन पटना नहीं । इन सारी बातों से फिल्म लगभग मर सी जाती है । फिल्म का संगीत भी कहानी का साथ नहीं दे पाता । वो तो अचछा हैं कि फिल्म पिंक से पहले बनी थी इसलिये उसका पिंक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ पाया ।Running-shaadi.

अमित साद बिहारी महत्वाकांक्षी युवक की भूमिका में कन्फयूज से दिखाई्र दिये हैं जबकि तापसी पन्नू निम्मी बनने में पूरी तरह कामयाब रही, उसी तरह अर्श बवेजा भी अमित के दोस्त का निर्वाह आखिर तक सफलता पूर्वक करता है । फिल्म में सबसे ज्यादा मनोरंजन के क्षण जुटाते हैं ब्रिजेश काला और पंकज झा । फिल्म की सबसे भारी कमी रही कि वो अपनी बात सही तरह से नहीं कह पाती ।


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Mayapuri

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