मूवी रिव्यू: भारतीय फौज को सेल्यूट करती फिल्म ‘सैटेलाइट शंकर’

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रेटिंग****

हीरो के करीब चार साल बाद रिलीज सूरज पंचोली की इरफान कमल द्धारा निर्देशित फिल्म ‘ सैटेलाइट शंकर’ दूसरी फिल्म है। जो एक फोजी द्धारा देश की अखंडता की बात करती है। जंहा एक फोजी, हर किसी के लिये कुछ करने वाले स्वभाव के तहत पूरे देश को जोड़ देता है।

कहानी

भारतीय आर्मी का फौजी शकंर यानि सूरज पंचोली जो अपनी यूनिट में सैटेलाइट शंकर के नाम से जाना जाता है। उसकी वजह है एक डिवाइस जो उसके पिता ने उसे दिया था। वो उस डिवाइस को सामने रख किसी की भी मिमिक्री कर सकता है। घायल होने के बाद आठ दिन के रेस्ट के एवज में शंकर अपने कमांडर से घर जाने की इजाजत मांगता है, जो उसे इस षर्त के बाद मिल जाती हैं कि वो आठवे दिन बेस में रिपोर्ट करेगा। अपनी मां से मिलने जाते शंकर को उसके साथी भी अपने सगे संबधियों के लिये कुछ सामान दे देते हैं। काश्मीर से अपने गांव पालोवी जाते समय वो एक बंगाली बुजुर्ग दंपती की मदद करता है लेकिन इस बीच उसकी ट्रेन छूट जाती है। इसके बाद रास्ते में उसकी मुलाकात एक वीडियो ब्लॉगर से होती  है जो एक टैक्सी ड्राइवर की भ्रष्टता का पर्दाफाश करती है। इसके बाद वो एक ट्रेन एक्सिडेंट में फंसे लोगों को बचाता है, यही नहीं वो अपने साथी की कोमा में गई मां को होश में लाता है तथा अपने ही एक साथी के भाईयों को जमीन जायदाद हड़पने से पहले उनका जमीर जगाता है। सामाजिक सेवा के चक्कर में उसके पास महज दो दिन बचे हैं। लेकिन अभी तक वो अपनी मां से नहीं मिल पाया। उसी दौरान उसका संपर्क एक नर्स प्रमिला यानि मेघा आकाश से होता है, जिसे उसकी मां ने शादी के लिये पसंद किया है। प्रमिला उसे बचे हुये दो दिनों में अपनी मां से मिलने और वक्त पर अपने बेस में जाकर रिपोर्ट करवाने का वादा करती है। इसके बाद न सिर्फ शकंर अपनी मां से मिलकर उसकी आंख का ऑपरेशन करवाता है बल्कि वक्त पर अपने बेस पर भी पहुंच जाता है।

अवलोकन

इसमें कोई दो राय नहीं कि फिल्म एक शख्स के जरिये पूरे देश को जोड़ने का काम करती है जंहा शंकर एक फौजी होने के अलावा असल जिन्दगी का नायक बन जाता है। फिल्म की पटकथा दिलचस्प है उसके बाद भी मेलोड्रामा दिखाई देता है। आर्मी बैकग्राउंड पर हम अभी तक इंडिया पाकिस्तान को लेकर फिल्में देखते आये हैं लेकिन इस बार निर्देशक ने बिलकुल नये क्लेवर, नये आइडिये से सजी फिल्म से रूबरूं करवाया है, जो देश को भाईचारे से जोड़ने का काम करती है तथा भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी छूती है। पहले भाग में शंकर की भागदौड़ है लेकिन दूसरे भाग में रोमांस,इमोशन और एक्शन के तहत कहानी की गति तेज हो जाती है । फिल्म के नये सीक्वेंस में एक है कि सोशल मीडिया से किस प्रकार लोगों की मदद की जा सकती है तथा जिसके तहत किसी शख्स के भले कार्यो को दिलचस्पी भरे ढंग से कैसे दिखाया जा सकता है। फिल्म का कैमरावर्क बेहतरीन है लेकिन तीन तीन कंपोजरों द्धारा तैयार किया गया संगीत औसत दर्जे का रहा।

अभिनय

सूरज पंचोली के अभिनय को देख ऐहसास होता है कि काश उसकी ये डेब्यू फिल्म होती जो उसके कॅरियर को कहीं का कहीं ले जाती। सूरज ने किरदार के हर पहलू को प्रभावी ढंग से जीया है,फिर चाहे वो एक्शन हो, इमोशन हो या रोमांस हो। बस उसे थोड़ा अपनी डॉयलॉग अदायगी पर घ्यान देना होगा। प्रमिला की भूमिका में मेघा आकाश ने पूरी तरह से निर्दोश अभिनय किया है। वो साउथ की हिन्दी मिश्रित भाषा बोलती हुई बहुत ही क्यूट लगती है। पालोमी घोष ने वीडियो ब्लॉगर की भूमिका को अपने अभिनय से सार्थक किया है। इसके अलावा तमाम सहयोगी कलाकार भी उल्लेखनीय रहे।

क्यों देखें

एक फौजी के हीरोइज्म के तहत देश को जोड़ती ये फिल्म ‘सैटेलाइट शंकर’ हर किसी को देखनी चाहिये।

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