मूवी रिव्यू: हल्की फुल्की फन फिल्म है ‘शानदार’

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शादी पर अभी तक ढेर सारी फिल्में बनी है जिनमें मजाक मस्ती, गाना बजाना सभी कुछ होता है। क्वीन फेम विकास बहल की फिल्म ‘शानदार’ भी एक अलग सी शादी को लेकर एक हल्की फुल्की फन फिल्म है।

कहानी

पंकज कपूर एक बेहद रिच दिखाई देने वाले लेकिन कंगाल हो चुके परिवार से है। उनकी मां सुषमा सेठ आज भी उसी ठाट बाट से रहने के लिये पंकज की बेटी की एक रिच सिंधी सजंय कपूर के एट पेक्स एब भाई से शादी नहीं बल्कि एक डील करती है। पंकज की एक और बेटी आलिया है जो वास्तव में उन्हीं की बेटी है लेकिन उन्होंने अपनी पत्नि निकी अनेजा के सामने शो किया हुआ हैं कि वे उसे कहीं से ले कर आये हैं। आलिया की सबसे बड़ी प्रोब्लम हैं कि उसे नींद नहीं आती और न ही वो दिन में सोती है। लंदन में होने वाली इस शादी का अरेजमेंट शाहिद कपूर यानि गजिन्दर जोगेन्दर के हाथ में है। शाहिद को भी रात में नींद न आने की बीमारी हैं। आलिया और शाहिद धीरे धीरे नजदीक आ जाते हैं दोनो का साथ होता है तो उन्हें नींद भी आनी शुरू हो जाती है लेकिन पंकज को शाहिद जरा भी पंसद नहीं। बाद में पता चलता हैं कि पंकज का सिंधी रिच समधी भी वास्तव में कंगाल हो चुका है और उसका भाई भी पंकज की मोटी बेटी से शादी नही करना चाहता। लिहाजा एक समय सब एक दूसरे के सामने ओपन हो जाते हैं।

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निर्देशन

विकास बहल ने पहली फिल्म चिल्लर पार्टी बनाई थी जो नेशनल अवार्ड विनर फिल्म थी उसके बाद क्वीन में उन्हें नेशनल अवार्ड हासिल हुआ। लेकिन ‘शानदार’ में ये पूरी तरह कन्फ्यूज पाये गये। फिल्म देखने के बाद पता चलता है कि उन्हें भी पता नहीं था कि वे क्या बना रहे हैं। फिल्म में कलाकारों की भीड़ हैं लेकिन उनमें ढ़ेर सारे किरदारों का परिचय तक नहीं दिया गया। फिल्म की लोकेशंस बेहद खूबसूरत है और कितने ही सीन कल्पना में बहते दिखाई देते है। विकास इस बेहद रिच लगने वाली फिल्म को उस तरह नहीं बना पाये जैसी उनसे उम्मीद की गई थी और ये बस एक हल्की फुल्की फन फिल्म बन कर रह गई है ।

अभिनय

चूंकि फिल्म कॉमेडी है तो उसमें हर शख्स चाहे वो सीरियस ही क्यों न हो कॉमेडी करता लगता है। फिर चाहे सुषमा सेठ हों, पंकज कपूर हों, सजंय कपूर हों या फिर शाहिद और आलिया हों। सभी ने अपनी भूमिकाओं को मजे ले लेकर निभाया है।

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संगीत

अमित त्रिवेदी की कंपोजिंग में गुलाबो गाना तो पहले ही सुपर हिट हो चुका हैं लेकिन बाकी गीत साधारण हैं ।

क्यों देखें

मौज मस्ती हंसी मजाक के और हल्की फुल्की हास्य फिल्मों के शौकीन दर्शक फिल्म का आंनद उठा सकते हैं।

 


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Mayapuri

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