हल्की फुल्की कामेडी और सस्पेंस जो दर्शकों बोर नही होनी देती

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करीब तीन सान बाद जायेद की वापसी गुरमीत सिंह द्धारा निर्देशित कॉमेडी फिल्म‘ शराफत गई तेल लेने’ से हुई है फिल्म एक आम आदमी के पास ढेरों पैसा आ जाने को लेकर गढ़ी दिलचस्प कहानी है जिसे देखते हुए दर्शक के चेहरे पर कितनी ही बार मुस्कराहट आती जाती रहती है ।

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जायेद खान और रणविजय सिंह रूम पार्टनर हैं । जायेद एक सीधी सादी नौकरी करने वाला ऐसा बैचलर लड़का है जो एक हद तक संतोषी बंदा है जबकि रणविजय के सपने हैं कि उसके पास ढेर सारा पैसा हों जिसके सदके वो जिन्दगी में एश कर सके । एक दिन अचानक जायेद के एकाउंट में सो करोड़ जैसी भारी भरकम रकम आ जाती है। बाद में पता चलता है कि वो रकम दाउद नामक डॉन की है जो जायेद के तहत वो रकम किश्तो में किसी को देना चाहता है और हर किश्त पर जायेद के लिए दो लाख कमिशन तय करता है । एक दिन पता चलता है कि उस डॉन को पुलिस ने एन्काउंटर में मार गिराया है ।

उसके बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से चलता है जिसमें कई खुलासे होते हैं । फिल्म की कहानी में नयापन तो है ही वो थोड़ी दिलचस्प भी है । मेन लीड में जायेद खान और रणविजय सिंह ने अपनी भूमिकाओ को निभाने के लिये मेहनत तो की है लेकिन फिर भी डायरेक्टर अगर दोनो पर और मेहनत करता तो फिल्म और अच्छी बन सकती थी । टीना देसाई के हिस्से में जितना काम आया उसने सही ढंग से निभा दिया । अनुपम खेर इससे मिलती जुलती ढेरों भूमिकायें निभा चुके हैं इसलिये इस रोल को निभाते हुए उनका चेहरा सपाट रहता है । फिल्म का संगीत कानो को भला लगता है । कहने का तात्पर्य ये हैं कि फिल्म की हल्की फुल्की कामेडी और सस्पेंस दर्शक को बोर नही होने देती।


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Mayapuri

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