मूवी रिव्यू: साउथ के क्रांती शूरवीरों की भव्य गाथा “सई रा नरसिम्हा रेड्डी”

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रेटिंग***

रोबोट, साहो तथा बाहुबली जैसी बड़े बजट वाली भव्य साउथ इंडियन फिल्मों का प्रर्दशन, तमिल तेलगू के अलावा जब हिन्दी में भी होने लगा तो इसके बाद अन्य साउथ इंडियन फिल्मों ने भी हिन्दी का रुख करना शुरू कर दिया । इसी क्रम में इस सप्ताह निर्देशक सुरेन्द्र रेड्डी की भव्य बिग बजट फिल्म ‘ सई रा नरसिम्हा रेड्डी’ रिलीज हुई है । फिल्म 1857 के राश्ट्रीय आंदोलन से दस साल पहले हुई क्रांती को लेकर सच्ची कहानी को लेकर है ।

कहानी

राष्ट्रीय आंदोलन के दस साल पहले नरसिम्हा रेड्डी(चिरंजीवी) ने अंग्रेजों खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया था । उय्यलवाडा के पालेदार नरसिम्हा रेड्डी अपनी प्रजा की भलाई के लिये किसी भी हद तक जा सकता था । वह अपने गुरू जी(अमिताभ बच्चन) द्वारा दिखाये गये रास्ते पर चलने वाला वीर था । उसे नर्तकी लक्ष्मी (तमन्ना भाटिया ) से प्यार हो जाता है और इसका इजहार वो लक्ष्मी से कर भी देता है । लेकिन बाद में उसे गुरु जी द्वारा पता चलता है कि बरसों पहले एक यज्ञ के लिये उसका विवाह सिद्धमा (नयनतारा) के साथ हो चुका है और अब सूखे से राहत पाने के लिये उसे एक बार फिर अपनी पत्नि के साथ बैठ कर यज्ञ करना होगा । ये सुन कर लक्ष्मी का दिल टूट जाता है बाद में वो नरसिम्हा के क्रांती वाले रास्ते पर चल निकलती है । दरअसल, अंग्रेजों द्वारा गलत लगान मांगने को अस्वीकार कर नरसिम्हा उनके खिलाफ खड़ा हो जाता है बाद में अंग्रेज उसकी प्रजा के साथ जुल्म करते हैं तो वो उनके सामने हथियार बंद हो खड़ा हो जाता है,बाद में उसकी ये लड़ाई अंग्रेजों के खिलाफ बगावत एक जन आंदोलन बन जाता है । उसके साथ अनेक वीर हैं जैसे अवकू राजू( सुदीप किच्चा)राजा पांडी (विजय सेतुपति) रवि किशन, जगपति बाबू आदि । लक्ष्मी राज्य से बाहर नृत्य कर लोगों में आजादी का बिगुल बजाती है और बाद में शहीद हो जाती है । नरसिम्हा रेड्डी द्वारा चलाई गई क्रांती की मुहीम आगे चलकर स्वतंत्रा संग्राम का रूप धारण कर लेती है । जो 1857 में पूरे देश में फैल गई थी। फिल्म का विषय इतिहास के पन्नों से लिया गया एक सच्चा किस्सा है ।

अवलोकन

इसमें शक नहीं कि उस दौर को दिखाने के लिये निर्देशक ने अद्भुत सेट्स का इस्तेमाल कर किस्से को सच्चा रूप देने की सफल कोशिश की है । फिल्म में ग्रेग पॉल, ली विटाकर, राम लक्ष्मण तथा वी विजय द्वारा किये गये स्टंट हैरान कर देने वाले है । बेशक पटकथा और चुस्त की जा सकती थी । ऐसी फिल्मों में बैकग्राउंड का जितना महत्व होता है उसे बेखूबी अंजाम दिया गया है । हैरतज़दा युद्ध के दृष्यों में दिया गया एक्शन कमाल का है ।

अभिनय

जंहा सीमित भूमिका में अमिताभ बच्चन अपना काम असरदार तरीके से कर गये, वहीं चिरंजीवी एक जबरदस्त लड़ाके के रूप में बेहद प्रभावशाली लगे हैं, उन्होंने अपनी बॉडी लैंग्वेज को इस्तेमाल करते हुये युद्ध के दृष्यों में कमाल पैदा किया है । उनके सहयोगियों के तौर पर सुदीप किच्चा, जगपति बाबू, विजय सेतुपति बेहतरीन काम कर गये । तमन्ना भाटिया शुरूआत में एक दो सीन के बाद गायब हो जाती हैं लेकिन बाद में वो जबरदस्त तौर पर वापसी करती हैं और अपने अंतिम नृत्य में तो सिहरन पैदा कर जाती है । नयनतारा ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है । अनुश्का शेट्टी रानी लक्ष्मी बाई की मेहमान भूमिका में सुंदर लगी है । खलनायक की छोटी भूमिका में रवि किशन ठीक रहे ।

क्यों देखें

अमिताभ बच्चन, चिरंजीवी व सुदीप किच्चा जैसे साउथ इंडियन सितारों के दर्शक ढाई सौ करोड़ के बिग बजट वाली इस भव्य फिल्म को देखना न भूलें ।

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