मूवी रिव्यू: इस बार भी दर्शकों पर नहीं चढ़ा – ‘तेरा सुरूर’

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रेटिंग**

अभी तक हिमेश रेशमिया को दर्शक कई फिल्मों में देख चुके हैं उनकी पिछली फिल्म ‘रेडियो’ उल्लेखनीय रही। इस बार वे शॉन अरान्हा निर्देशित फिल्म ‘तेरा सुरूर’ में आज के बॉडी पैक नायकों की बराबरी की कोशिश करते हुये नजर आ रहे हैं। खासकर अपनी सिक्स पैक ऐब्स बॉडी के साथ एक्शनमैन के रूप में।

कहानी

रघु (हिमेश रेशमिया) एक ऐसा शख्स है जिससे बचपन में ही एक ऐसा अपराध हो गया था जिसकी वजह से उसे बचपन जेल में काटना पड़ा। बाद में वो पुलिस और सरकार के लिये अपराधियों को पकड़वाने का काम करने लगता है। वो तारा (फराह करीमी) से बेपनाह मोहब्बत करता है। एक दिन तारा उससे नाराज हो आयरलैंड चली जाती है और वहां अनिरूद्ध नामक एक शख्स की साजिश का शिकार हो जेल चली जाती है। अब रघू का काम है किसी भी तरह तारा को जेल से बाहर निकालना। डबलिन में वो इंडिया के राजदूत राजबीर (शेखर कूपर) से मिलता है उन्हें ऊपर से उसकी मदद करने के आदेश हैं। इधर मुबंई के पुलिस कमिश्नर खान (कबीर बेदी) भी उसे हर तरह से सहयोग कर रहे हैं। रघू की मुलाकात संटिनो (नसीरूद्दीन शाह) से होती है जो अभी तक दुनिया भर की जेलों से करीब उन्नीस बार भाग चुके हैं इन दिनों वो डबलिन की जेल में आराम फरमा रहे हैं। पैसा लेकर वे तारा को जेल से फरार कराने में रघु की मदद करते हैं। तारा को आजाद करवाने के बाद रघु उस आदमी को ढूंढ कर सजा देता है जिसकी साजिश का तारा शिकार हुईं थी।

Himesh

निर्देशक

फिल्म का पहला पॉजिटिव पक्ष है डबलिन की लोकेशन। जो कि इतनी खूबसूरत और लुभावनी है कि हर एंगल से बेहतरीन लगती है। लिहाजा डायरेक्टर ने लोकेशन को कवर करने के लिये हर तरह के शॉट लगाये हैं। निर्देशक ने पूरी फिल्म में नायक को पता नहीं क्यों, जरा भी नहीं हिलने दिया लिहाजा वो अंत तक अपनी भूमिका से बाहर नहीं निकल पाता। फिल्म की कथा पटकथा कोई विशेष नहीं, लेकिन फिर भी एक हद तक कसी हुई है तथा संवाद भी औसत दर्जे के हैं।

अभिनय

जैसा कि बताया गया है कि इस बार हिमेश रेशमिया ने अन्य हीरोज की तरह बॉडी में फिट और शर्ट उतार कर अपने शरीर का प्रर्दशन किया लेकिन न तो उसके सिक्स पैक एब्स में आकर्षण है और न ही अभिनय में। इस बार वो न जाने क्यों शुरू से अंत तक चेहरे पर शून्यता के साथ सिर्फ नरेशन में संवाद बोलता है। फराह करीमी खूबसूरत हैं, बस। नसीर, कबीर बेदी तथा शेखर कपूर आदि का महज फिल्म का वजन बढ़ाने के लिये इस्तेमाल किया है न कि अभिनय के लिये। मां के रोल में शहनाज पटेल साधारण रही। अगर फिल्म में किसी ने अभिनय किया है तो अंत में निगेटिव किरदार निभाने वाला एक्टर एक सीन में ही अपने जबरदस्त अभिनेता होने का सुबूत दे जाता है।

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संगीत

फिल्म में संगीत चूंकि हिमेश का ही है इसलिये उसने अपनी स्टाइल के गीत कंपोज किये है जो अब पुराने हो चुके हैं साथ ही फिल्म में हिमेश द्वारा नाक से गाया हिट गीत तेरा सुरूर भी बजता रहता है।

क्यों देखें

हिमेश रेशमिया के गीतों और लुभावनी लाकेशंस के रसिक दर्शक फिल्म एक बार तो देख ही सकते हैं।

 


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Mayapuri

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