मूवी रिव्यू: फिल्म के नाम पर चूंचू का मुरब्बा है ‘तेरे बिन लादेन डेड और एलाईव’

1 min


रेटिंग*

अभिषेक शर्मा की फिल्म तेरे बिन लादेन एक बेहतरीन फिल्म थी उसमें एक कन्टेंट था कहानी थी। उसी फिल्म से अली जफर जैसे एक्टर ने डेब्यू भी किया था, लेकिन तेरे बिन लादेन डेड और एलाईवयानि पार्ट टू में न तो कन्टेंट है और न ही कहानी।

कहानी

कहानी के नाम पर फिल्म में कुछ भी नहीं। एक डायरेक्टर मनीष पॅाल हैं जो कुछ युनिक बनाना चाहता है। उसी दौरान उसे प्रद्युमन सिंह दिखाई देता है जो आंतकवादी लादेन से हूबहू मिलता है। बस मनीष उसे और फिल्म स्टार अली जफर को लेकर फिल्म बना डालता है। फिल्म हिट हो जाती है और जब वो उसका सीक्वल बनाने जा रहा है तो अली जफर मनीष को डायरेक्टर न लेकर किसी बड़े डायरेक्टर को फिल्म में लेना चाहता है। इससे चिढ़ कर मनीष प्रद्युमन को लेकर अलग फिल्म बनाने की सोचता हैं तभी पता चलता है कि अमेरिका ने एक ऑपरेशन कर लादेन को मार दिया है। अमेरिकी प्रेसीडेंट जब एयूएस एजेन्ट  सिकंदर खेर से सुबूत मांगता है लेकिन उसके पास इस बात का कोई सुबूत नहीं। उसी दौरान उसकी नजर नकली लादेन पर पड़ती है तो वो उसे यूज करने की सोचता है। पीयूष उपाध्याय आंतकवादियों को हथियार बेचता है। वो भी नकली लादेन के पीछे है। इसके बाद से अंत तक ऐसा कुछ चलता है कि दर्शक सिनेमा हॉल से बाहर आकर राहत की सांस लेता है।

terebinladen-deadoralive759

निर्देशन

लेखक निर्देशक अभिषेक शर्मा ने खुल्लमखुला तेरे बिन लादेन पार्ट टू के नाम पर दर्शकों को बेवकूफ बनाया है। फिल्म में कुछ पात्र पहले हैं और कुछ इस बार और जोड़ दिये हैं। लेकिन सभी शुरू से अंत तक अपनी भूमिकाओं को लेकर कंफ्यूज दिखाई देते हैं। फिल्म में न तो कथा है न ही पटकथा और संवाद ऐसे कि दर्शक अपने बाल नोचना शुरू करते हुये फिल्म खत्म होने का इंतजार करता रहता है।

अभिनय

फिल्म में गेस्ट रोल में अली जफर हैं वो कुछ देर के लिये आते हैं और एक गाना तथा अपने सिक्स पैक एब्स दिखाकर चलते बनते हैं। दूसरी तरफ मनीष पॉल और प्रद्युमन सिंह हैं जिनकी कॉमेडी देख हंसी कम रोना ज्यादा आता है। सिकंदर खेर एयूएस एजेन्ट के रूप में हमेशा ऐसे मेकअप में रहता है कि उसकी असली सूरत अंत तक दिखाई नहीं देती। पता नहीं कैसे पीयूष मिश्रा जैसा उम्दा कलाकार इस फिल्म में काम करने के लिये तैयार हो गया ।

_da1f9778-beaa-11e5-bf87-369b775511f2 (1)

म्यूजिक

म्यूजिक के नाम पर वैसे तो कई गीत हैं लेकिन एक ही गीत अच्छा हैं वो भी फिल्म में नहीं बल्कि बाहर अच्छा लगता है।

क्यों देखें

जिसे अपना दिन और पैसा खराब करना है वो ये फिल्म देख सकता है।

 

 


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये