मूवी रिव्यू: बुराई के खिलाफ जंग का एलान करती ‘थोड़ी थोड़ी सी मनमानियां’

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रेटिंग**

आम आदमी ज्यादातर किसी के पचडे में पड़ना पंसद नहीं करता। जबकि कहा ये जाता है कि हर किसी को बुराई के खिलाफ लड़ना चाहिये। निर्देशक आदित्य सरपोतदार की फिल्म ‘थोड़ी थोड़ी सी मनमानियां’ मजबूती से यही बात कहने की कोशिश करती है।

अर्श सहरावत यानि सिद्धार्थ कौल एक ऐसा लड़का है जो पढ़ाई कर अमेरिका सैटल होने की तैयारी कर रहा है लेकिन उसे म्यूजिक में भी महारत हासिल हैं,उसका एक बैंड है जिसे एक म्यूजिक कंपटीशन में मौका मिल जाता है। एक दिन वो श्रेणू पारिख यानि नेहा दत्ता को सुनता है तो उसकी आवाज का दीवाना हो जाता है लिहाजा वो उसे अपने बैंड में शामिल होने का ऑफर देता है। उस वक्त तो नहीं, लेकिन किसी जरूरत को लेकर बाद में नेहा उसका बैंड ज्वाइन कर लेती है। नेहा के साथ रहते हुये सिद्धार्थ को पता चलता है कि वो एक ऐसी बाहदुर लड़की है जो हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़ी रहती है जबकि सिद्धार्थ की मां ने उसे हमेशा सिखाया है कि सिर्फ अपने काम से काम रखो किसी के फटे में टांग मत अड़ाओ। एक दिन नेहा से उसे पता चलता है कि उसके पिता मुकेश तिवारी यानि अजय कोल एक्सिडेंट में नहीं मारे गये थे बल्कि उनका मर्डर हुआ था। दरअसल अजय कौल सौशल वर्कर थे वे नुक्कड नाटकों के द्धारा अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिये हमेशा तैयार रहते थे। जब वे  गरीब लोगों को बेघर करने की फिराक में एक बिल्डर के खिलाफ खड़े हुये तो उसने उनका मर्डर करवा दिया, लेकिन उसकी मां ने उसे झूठ बोलते हुये इन सब बातों से दूर रखा । इन दिनों नेहा भी एक बिल्डर के खिलाफ लड़ रही है और उस बिल्डर का आदमी  नेहा को गोली मार देता है जिसे सिद्धार्थ देख लेता है। इसके बाद अपने पिता की तरह सिद्धार्थ भी अन्याय के खिलाफ खड़ा हो उस बिल्डर को उसके अंजाम तक पहुंचाता है।

कई बार दौहराई गई कहानी होते हुये भी  उसे अलग तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है । फिल्म की सबसे अचछी बात ये लगी कि बिना किसी मारधाड़ या विलन को बिना ग्लौरीफाई किये हुये  किरदारों के जरिये, अपनी अपनी बात कहने में सफल हैं । हालांकि पटकथा, संवाद तथा संगीत सभी कुछ औसत दर्जे का रहा।

कलाकारों की बात की जाये तो अर्श सहरावत अपनी भूमिका में सही लगे। श्रेणू पारिख कई धारावाहिकों  में काम कर चुकी है और कर रही हैं खूबसरूत होने के साथ अच्छी अदाकरा भी है उसने अन्याय के खिलाफ लड़ने वाली लड़की को अच्छी अभिव्यकित दी है । इसके अलावा शिल्पा तुलसकर, मुकेश तिवारी,राहुल राज मल्हौत्रा तथा कुलदीप सरीन आदि सहयोगी कलाकरों का अच्छा सहयोग रहा।

 फिल्म के बारे में यही कहा जा सकता है कि वो अपनी बात कहने में एक हद तक सफल है।

 


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Mayapuri

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