मूवी रिव्यू: अधूरी कहानी ‘ट्रैप्ड’

1 min


रेटिंग*

आजकल जिस तरह बड़े महानगरों में मल्टी स्टोरी बिल्डिंगों का जाल सा बिछा हुआ है। उनमें कितनी ही कानूनी पचड़ों में फंस कर सालों ऐसे ही खड़ी रहती हैं। इस प्रकार ये बिल्डिंग्स असामाजिक तत्वों के आकर्षन का केन्द्र बन जाती हैैं। विक्रमादित्य मोटवानी की फिल्म ‘ट्रैप्ड’ में ये सब बताने की कोशिश की गई है ।

राजकुमार राव जिस लड़की से प्यार करता है उससे शादी करना चाहता है। उस लड़की की शादी होने वाली है जबकि  राजकुमार के पास न तो रहने के लिये घर है और न ही उसकी इतनी औकात है कि वो अपनी होने वाली बीवी के लिये कोई अच्छा सा घर किराये पर भी ले सके । इसी चक्कर में उसे एक  फर्जी ऐजेंट एक ऐसी बिल्डिंग में घर दे देता है जो किसी कानूनी चक्कर में फंसी हुई है इसलिये वो पूरी तरह से खाली है । राज कुमार बिल्डिंग की बीसवी मंजिल के  फ्लैट में रहने आ जाता है । लेकिन जब वो अगले दिन अपनी प्रेमिका से मिलने के लिये जाने लगता है तो जल्दबाजी में  अचानक दरवाजा बंद हो जाता है और उसकी चाबी बाहर ही रह जाती है । बाद में राज कुमार की हर कोशिश के बाद भी दरवाजा नहीं खुल पाता । दूसरे फ्लैट में न तो पानी है न ही लाइट। राज कुमार की हर कोशिश के बाद भी उसे कोई हेल्प नहीं मिल पाती । आखिर आठ दस दिन अकेले भूखे प्यासे रहने के बाद किसी तरह राज कुमार उस फ्लैट से आजाद होने में कामयाब हो जाता है।trapped

ट्रैप्ड जैसी  अधूरी फिल्म विक्रमादित्य मोटवानी जैसा निर्देशक  बनाता है तो ताज्जुब होता है । फिल्म बताती है कि किस प्रकार आजकल  कानूनी पचड़ों में  पड़ी मल्टी स्टोरीज बिल्डिंगों में बस एक वॉचमैन रखकर इतिश्री कर दी जाती है । इस बात का फायदा आसपास के असामाजिक तत्व तो उठाते ही है ,इसके अलावा फ्राड किस्म के ऐजेन्ट जरूरत मंद लोगों को फंसा कर इन बिल्डिंगों के खाली पड़े फ्लेट्स किराये पर दे देते हैं। फिल्म में ऐसे ही एक जरूरतमंद  बंदे की त्रासदी दिखाई गई है लेकिन अंत में वो किसी तरह आजाद होता है और अस्पताल पहुंच जाता है। इसके बाद अपनी पुरानी जिन्दगी में वापस । इस बारे में वो न तो किसी से कुछ कहता है न कोई एक्साइटमेंन्ट । वरना होना ये चाहिये था कि कोई उसे आकर उस बिल्डिंग से निकालता । पुलिस को पता चलता और उसके जरिये गलत लोग एक्सपोज होते और एक सार्थक संदेश जाता । परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । लिहजा इसे एक अधूरी  फिल्म कहा जाये तो गलत नहीं होगा ।

आर्टिस्ट के नाम पर पूरी फिल्म एक ही किरदार पर आधारित है और उसे राजकुमार राव ने बेहतरीन तरीके से निभा कर अपनी अभिनय प्रतिभा का परिचय दिया है।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये