मूवी रिव्यू: मैसेज युक्त हल्की फुल्की कॉमेडी है ‘वाह ताज’

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रेटिंग**

निर्देशक अजीत सिन्हा की फिल्म ‘वाह ताज’ में किसी समस्या के समाधान के लिये जिस प्रपंच की रचना की गई हैं उस पर यकीन करना मुश्किल है, लेकिन उसे हास्य के रंग में रंगते हुये सही ठहराने की कोशिश उस वक्त तक कि गई है जब तक असली कहानी से पर्दा नहीं उठ जाता।

कहानी

तुकाराम मराठे यानि श्रेयष तलपड़े और सुनंदा मराठे यानि मंजरी फडणवीस पति पत्नि अपनी छोटी बेटी के साथ आगरा पहुंच जाते हैं उस जमीन पर अपना दावा ठोकने, जिस पर ताज महल बना हुआ है। उनका कहना है कि वो जमीन उनके पुरखों की है जिसे शहाजंहा ने उनके पुरखों से जबरदस्ती छीन कर उस पर ताज महल बनवा दिया था। बाद में वो कोर्ट में भी साबित हो जाता है कि वो वाकई तुकाराम की जमीन है। इसलिये उसकी अपील पर फैसला आने तक ताज महल पर स्टे ले लिया जाता है। बाद में राज्य सरकार तुकाराम को ताज वाली जमीन के बदले कोई और जमीन देने का प्रस्ताव रखती है तो तुकाराम अपने गांव में खेती की जमीन मांगता है। जब उसकी मांग मान ली जाती है। इसके बाद उनके इस पूरे नाटक से पर्दा उठता है तो एक ऐसी समस्या सामने आती है। जिसे सरकार के सामने लाने के लिये ही तुकाराम अपनी पत्नि के साथ ये नाटक रचता है।wah-taj

निर्देशक

निर्देशक अजीत सिन्हा ने फिल्म के जरिये बिल्डर माफिया द्धारा किसानों की उपजाऊ जमीनें हथियाने पर सवाल उठाते हुये बताने की कोशिश की है कि अगर सारी जमीनों पर मॉल और बिल्डिंगें बन जायेगीं तो किसान अनाज कहां उगायेगा। उनका सवाल अच्छा है लेकिन उसे  बताने का तरीका जरूरत से ज्यादा काल्पनिक और हजम न होने वाला है जो फिल्म के संदेश को हल्का भी बनाता है। यानि कहानी की नीयत ठीक थी लेकिन बताने का तरीका गलत रहा।

अभिनय

इसमें दो राय नहीं कि श्रेयस एक उम्दा अभिनता हैं यहां भी उन्होंने तुकाराम जैसे किसान और एक पढे लिखे शख्स की भूमिका को विश्वसनीय तरीके से निभाया है। मंजरी फडणवीस ने उनका अच्छा साथ दिया है। दोनों ने मराठी लहजे में किरदारों को मनोरंजक बनाने की पूरी कोशिश की है। वहीं आगरा की भाषा को इस्तेमाल करते हुये वहां की सरकार के जेल मंत्री की भूमिका में हेमंत पांडे अपनी चिरपरिचित शैली में नजर आते हैं। बाकी किरदार साधारण रहे ।waah-taj

संगीत

फिल्म में कई गाने हैं लेकिन मंजरी पर फिल्माया गया लावणीयुक्त आइटम सांग अच्छा बन पड़ा है ।

क्यों देखें

मैसेज युक्त हल्की फुल्की कॉमेडी का मजा लेना है तो फिल्म देखने में कोई हर्ज नहीं हैं ।


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Mayapuri

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