मूवी रिव्यू: ग्लैमर, सेक्स और एक्शन यानि ‘वॉरियर सावित्री’

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रेटिंग**

एक तो आस्था से जुड़ी किसी कथा को आधुनिक रूप देने का अपराध, दूसरे उसे बुरी तरह पेश करने का तरीका। लिहाजा लोगों में निर्देशक परम गिल की फिल्म ‘वॉरियर सावित्री’ से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के एवज में भारत में बैन कर दिया गया है तथा लोगबाग फिल्म के खिलाफ जगह जगह निर्देशक के पुतले जलाने पर तुले हैं।

कहानी

राजस्थान के अच्छे घराने की बेटी सावित्री यानि निहारिका रायज़ादा अपने साथ बचपन में हुये हादसे के बाद बाकायदा जूडो कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेती है। बड़ी होने पर वो एक एनआरआई लड़के रजत बरमेचा यानि सत्या से प्यार करने लगती है। लेकिन उनके पारिवारिक ज्योतिशी का कहना है कि अगर सावित्री ने सत्या से शादी की तो वो एक सप्ताह बाद ही मर जायेगा। बावजूद इसके सावित्री सत्या से शादी कर अमेरिका चली जाती है जहां सत्या के अंधे पिता गुलशन ग्रोवर का एक कॅसिनो था जिसे ब्याज पर पैसे देने वाला डॉन टिम मैन उनका कॅसिनो इसलिये जला देता हैं क्योंकि वे उससे लिया पैसा उसे वक्त पर वापिस नहीं दे पाये थे। अब टिम की निगाह कॅसिनो की जमीन पर है जो सत्या के नाम है। इसलिये वो सत्या पर हमले करवाता है जिसे सावित्री बार बार नाकाम कर देती है। एक बार सावित्री को साक्षात यमराज ओमपुरी दिखाई देते हैं जो बताते हैं कि वे सत्या को लेने आये हैं। इसके बाद सावित्री और यमराज के बीच जिरह चलती हैं जिसमें जीत सावित्री की होती है।kl

निर्देशन

बेशक विषय यूनिक था लेकिन निर्देशक उसे ही तरह हैंडल नहीं कर पाया। लिहाजा कथा, पटकथा तथा संवाद सभी कुछ कमजोर साबित हुआ। दरअसल निर्देशक सही तरीके से एक भी किरदार को रजिस्टर्ड नहीं कर पाता। सावित्री हर वक्त स्वीमिंग सूट में या फिर सत्या के साथ किसिंग सीन इतने धड़ल्ले से देती रहती है कि आज की आधुनिक नायिकायें भी शरमा जाये। यमराज सूट बूट और टाई में क्यों रहते हैं समझ से बाहर है। गुलशन ग्रोवर को अंधा क्यों बताया। इसके अलावा फिल्म में काफी बड़े टेक्निशियर्स हैं जैसे कैमरामैन कबीर लाल, लेकिन फिल्म की इससे घटिया फोटोगाफी हो ही नहीं सकती। यही हाल साउंड का है। सबसे बड़ी बात एक तो निर्देशक ने भारतीय आस्था से जुड़ी कहानी का चुनाव किया, ऊपर से उसे फुहड़ तरीके से दिखाने की कोशिश की लिहाजा दर्शकों का भड़कना जायज है। म्यूजिक भी स्वंय निर्देशक ने ही दिया है जो ठीक ठाक है।savitri

अभिनय

फिल्म में कई लोग पहली बार इस फिल्म से पर्दे पर आगमन कर रहे हैं। जैसे फिल्म की लीड अभिनेत्री निहारिका रायजादा जो एनआरआई है। बावजूद उसकी हिन्दी बहुत साफ है वो फिगर वाईज भी खूबसूरत है। इसके अलावा एक्शन सीन्स में वो काफी प्रभावशाली रही है। रजत बरमेचा शक्ल से ही सुस्त किस्म का एक्टर लगा जिसे देखकर ऐसा लगता हैं जैसे उसे बंदूक दिखाकर एक्टिंग करवाई जा रही हो। विदेशी मॉडल लूसी पिंडर काफी खूबसूरत और सेक्सी लगी। विलन द मोंक और मनी जोहन ठीक ठाक काम कर गये । इनके अलावा गुलशन ग्रोवर, करमवीर चौधरी तथा आदित्य राज कूपर आदि सहयोगी कलाकारों ने भी अच्छा सहयोग दिया लेकिन यमराज के रूप में ओमपुरी को वेस्ट किया गया है।

क्यों देखें

ग्लैमरस, सेक्सी तथा एक्शन फिल्में देखने वाले दर्शकों के लिये फिल्म में काफी कुछ है।


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Mayapuri

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