मूवी रिव्यू: बदले की साधारण फिल्म साबित होती है ‘ वज़ीर’

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रेटिंग**

निर्माता निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा ने करीब बारह साल पहले एक कहानी लिखी थी जिसे नाम दिया था ‘चैस’। वो कहानी उस वक्त भी अमिताभ बच्चन को पसंद थी और आज भी पंसद है। लेकिन अब इसका नाम हैं ‘वजीर’। विनोद और अभिजात्य द्वारा लिखी इस कहानी को निर्देशित किया हैं बिजॉय नांबियार ने। पूरी तरह बदले पर आधारित फिल्म की कहानी इस प्रकार है।

कहानी

ओमकार धर यानि अमिताभ बच्चन एक कशमीरी पंडित है जो शतरंज के महान खिलाड़ी हैं लेकिन वे एक दुर्घटना में दोनों पैर गवां बैठे लिहाजा आज पूरी तरह वे आधुनिक व्हील कुर्सी के अधीन हैं। इसी बीच उनकी बेटी की सीढ़ियों से गिरकर मौत हो जाती है लेकिन अमिताभ इसे दुर्घटना नहीं बल्कि मर्डर मानते हैं और उनकी नजर में कातिल है एक कश्मीरी नेता मानव कौल, जिसे बेनकाब करने के लिये वे एटीएस ऑफिसर फरहान अख़्तर की सहायता लेते हैं फरहान की बेटी भी एक आंतकी हमले में मारी जाती है इसके लिये उसकी बीवी अदिति राव हैदरी फरहान को जिम्मेदार मानते हुये उससे अलग रहती है। फरहान अपनी बेटी का बदला उस आंतकी को मार कर ले लेता है बावजूद इसके उसकी बीवी उसे माफ नहीं करती। लेकिन अमिताभ फरहान को अपना दोस्त बना लेते हैं और जब वे फरहान को अपनी कहानी बताते हैं तो वो भी उनकी सहायता करने के लिये तैयार हो जाता है। बाद में अमिताभ, फरहान और अदिति को मिलवा देते हैं। आखिर में फरहान नेता का पर्दाफाश कर उसे मार कर उनका बदला लेता है लेकिन इससे पहले अमिताभ बम का शिकार हो जाते हैं।

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निर्देशन

बिजॉय नांबियार ने जितनी भी फिल्म बनाई हैं वे सभी ग्रेशेड तथा डार्क रही हैं लेकिन इस बार उन्होंने एक थ्रिलर फिल्म में अपनी शैली को चेंज किया है। फिल्म की शुरूआत बड़े प्रभावी ढंग से होती है लेकिन बाद में धीरे धीरे वो एक आम बदला लेने वाली फिल्म में बदल जाती है। लिहाजा दर्शक को लगने लगता है कि वो कई बार दोहराई गई कहानी को नये क्लेवर के साथ देख रहा है। फिल्म में जो सस्पेंस हैं वो कतई हजम नहीं होता। लिहाजा ये फिल्म भी जबरदस्ती के सस्पेंस के साथ खत्म होती है ।

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अभिनय

जहां तक अमिताभ की बात की जाये तो इससे पहले वे न जाने कितनी भूमिकाओं को लाजवाब अभिव्यक्ति दे चुके हैं शायद इसीलिये ये भूमिका भी उनके लिये एक खेल साबित हुई जिसे उन्होंने एक अभियस्त अभिनेता की तरह बढि़या तरह से खेला। इसी तरह फरहान अख्तर ने इस तरह की एक्शन भूमिका के लिये अलग से मेहनत और रिसर्च की है लिहाजा वे भी अपनी भूमिका में पूरी तरह से स्वाभाविक लगे हैं। अदिति राव हैदरी भी मां और पत्नि के रोल में काफी मेहनत करती दिखाई दी। लेकिन नील नितिन मुकेश ने वज़ीर के रूप में महज एक सीन में, वो भी अमिताभ बच्चन के साथ जबरदस्त अदाईगी पेश की है। निस्संदेह वे आगे चलकर बढि़या खलनायक साबित हो सकते हैं।

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संगीत

फिल्म में पांच संगीतकारों ने आठ सिंगर्स की आवाजें ली हैं लेकिन सभी गाने बैकग्राउंड हैं उनमें अंकित तिवारी का गाया हुआ गीत पूरी फिल्म में सुनाई देता रहता है ।

क्यों देखें

बेशक ‘वज़ीर’ एक तेज रफ्तार ऐसी थ्रिलर फिल्म हैं जिसे अमिताभ बच्चन, फरहान अख्तर तथा नील नितिन मुकेश जैसे उच्च कोटि के कलाकारों की कलाकारी के लिये देखा जा सकता है।


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Mayapuri

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