मूवी रिव्यू नई बोतल पुरानी शराब ‘वेडिंग पुलाव’

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रेटिंग**

सूरज बड़जात्या से लेकर करण जौहर तक ढेरों डायरेक्टर्स ने शादियों को लेकर बेहतरीन फिल्में बनाई है। लिहाजा अब ये सब्जेक्ट इतनी बार रिपीट हो चुका है कि अब तो दर्शक किसी ऐसी फिल्म का क्लाईमेक्स पहले ही जान लेता है। कैमरामैन निर्देशक बिनोद प्रधान की फिल्म ‘ वेडिंग पुलाव’ ऐसी ही एक पंजाबी शादी पर आधारित फिल्म हैं जिसमें दिखाई गई सारी बातें पहले से ही कितनी ही बार देखी जा चुकी हैं। इस फिल्म से निर्माता निर्देशक शशि रजंन की बेटी अनुष्का रजंन ने कन्नड फिल्मों के स्टार दिगंत मनचाले के साथ डेब्यू किया है।

कहानी

दिगंत मनचाले का एक ही सपना हैं कि वो अपनी डिजाइन की गई बाइक लांच करे। उसका सपना पूरा करने का बीड़ा उठाते हैं परमीत सेठी, जिसकी बेटी सोनाली सहगल से दिगंत की शादी होने वाली है। उसकी सगाई में उसके दोस्तों के साथ उसकी बेस्ट फ्रेंड अनुष्का रंजन खास तौर से लंदन से आती है। अनुष्का भी एक पेन्टर करण वी ग्रोवर को डेट कर रही है। बाद में दोनों के पेरेन्ट्स तय करते हैं कि दिगंत और सोनाली की शादी के साथ ही अनुष्का और करण की भी शादी कर दी जाये। इस शादी के लिये थाइलैंड फिक्स किया जाता है।

वहां अचानक अनुष्का और दिगंत को महसूस होता हैं कि बेशक उनकी शादियां अलग अलग लोगों से हो रही है लेकिन वास्तव में वे एक दूसरे को पहले से प्यार करते हैं लेकिन कभी एक दूसरे को कह नहीं पाये। इसी कशमकश में दोनों की शादी का दिन आ जाता हैं। तब दिगंत अपने प्यार के बारे में सबको बताता है। बाद में हमेशा की तरह दोनों तरफ से कुछ नोक झोंक के बाद आखिर उनके प्यार को मान लिया जाता है।

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निर्देशन

बिनोद प्रधान इंडस्ट्री के बहुत जाने माने सिनेमाटोग्राफर रहे हैं। ये बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म है। बेशक उन्होंने फिल्म अच्छी बनाने की कोशिश की लेकिन उसमें सबसे बड़ी खामियां रही घिसी पिटी कहानी और बेहद धीमी पटकथा। फिल्म इतनी स्लो हैं कि दर्शक जानी पहचानी चीजें धीरे धीरे देखते हुये उबासियां लेता रहता है । मध्यातंर के बाद वही जाने पहचाने झटके वही ट्वीस्ट, जो दर्शक को पहले सीन से ही पता होते हैं। बिनोद प्रधान ने निर्देशन के कहीं बेहतर कैमरे का इस्तेमाल किया हैं उन्होंने थाइलैंड और पटाया को बहुत खूबसूरती से फिल्माया है। लेकिन क्या फायदा, क्योंकि फिल्म में नया कुछ नहीं है यानि बोतल नई हैं और शराब पुरानी ।

अभिनय

अनुष्का रंजन काफी खूबसूरत है। उसने पहली फिल्म के मुताबिक काफी आत्मविश्वास से काम किया है। लेकिन डेब्यू के लिये उसके लिये ये फिल्म गलत साबित हुई। दिगंत ने अपने रोल के साथ पूरा न्याय किया है वहीं करण वी ग्रोवर काफी हैंडसम लग रहे हैं लेकिन उसकी भूमिका कई बार दोहराई जा चुकी है। बाकी सारे किरदार ऐसे हैं जिन्हें हम ऐसी फिल्मों में पहले भी देख चुके हैं। सतीश कौशिक और उपासना सिंह दिगंत के माता पिता हैं, परमीत सेठी और किट्टू गिडवानी सोनाली सहगल के माता पिता की भूमिका में हैं। अनुष्का अनाथ हैं उसे पाला हैं गुलाबो यानि हिमानी शिवपुरी ने। फिल्म में ऋषि कपूर भी हैं लेकिन ऐसे रोल में जो कोई साधारण एक्टर भी कर सकता था। उन्होंने होटल मैनेजर की अति महत्वहीन भूमिका निभाई है ।

संगीत

सलीम सुलेमान ने कुछ गीतों की धुने अच्छी बनाई हैं जो सुनने में अच्छी लगती हैं। लेकिन फिर भी वे जुबान पर चढ़ने जैसी नही है ।

क्यों देखें

वैसे तो फिल्म देखने की कोई वजह दिखाई नहीं देती फिर भी फ्रैश पेयर और पंजाबी शादी में होने वाली मस्तियों को एन्जॉय करना हैं तो वे एक बार फिल्म देख सकते हैं ।

 

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Mayapuri