‘किसान की बेटी‘ का संगीतमय मुहूर्त

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singar kalpna

हाल ही में नीलकमल फिल्म एंटरटेन्मेंट के बैनर तले बनने वाली हिन्दी फिल्म ‘किसान की बेटी‘ का भव्य संगीतमय मुहूर्त किया गया, संगीतकार राज इंद्र राज के संगीत पर गायक कलपना ने अपनी सुरों से समां बंधा। जीप ट्रेक स्टुडियो अंधेरी मुम्बई में। इस मौके पर निर्माता विजय सिंह, लेखक युसुफ भाई शेख और राम सजन मोर्य, सत्येन्द्र सिंह, हरि त्रिपाठी, मनाज कुमार, चन्द्रवंशी, राहूल गुप्ता, आतिष सिंह, संजीव चौधरी, जावेद मिर्जा, दिलीप सहानी, सुनील प्रजापती, चितरंजन इत्यादी मौजूद थे।
पिछले कुछ सालों में वूमैन ओरिएंटेड फिल्मों के हिट होने से छोटे निर्माताओं का मनोबल बढ़ा है। ऐसे निर्माता, जिनके पास सामाजिक विष्यों को छूती अच्छी कहानी है लेकिन बड़ी स्टारकास्ट और बड़ा बजट न होने से वे दर्शकों को अच्छी फिल्में नहीं दिखा पाते लेकिन निर्माता विजय सिंह ने ठान लिया है कि उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म किसान की बेटी न सिर्फ परदे पर आएगी, बल्कि दर्शकों की संवेदाओं के साथ भी जुड़ेगी। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि फिल्म किसानों के दर्द को छूती है। वे किसान जो देशवासियों का पेट भरने के लिए दिन रात खेतों में जुटे रहते हैं, पर यह भी एक विडंबना है कि नतीजा दर्दनाक हादसों के रूप में सामने आता है यानी किसानों द्वारा की जाने वाली आत्महत्या, जो इन दिनों महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में विकराल रूप धारण कर चुकी है। इस समस्या को परदे पर उतार रहे हैं लेखक युसुफ भाई शेख और राम सजन मोर्य व निर्माता विजय कुमार ने, जिनकी फिल्म् किसान की बेटी का मुहूर्त पिछले दिनों गायिका कल्पना द्वारा गाए गीत के साथ हुआ जिसका संगीत दिया है राज इंद्र राज ने।

kisan ki beti
निर्माता विजय कुमार कहते हैं कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, जहां युवा पीढ़ी लाखों करोड़ों रूपया कमाती है, पर इसी राज्य का किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है क्योंकि भूमाफिया, राजनीतिकों और बिल्डरलॉबी की घेराबंदी उन्हें तिल तिल मरने को मजबूर कर देती है। तब प्रकट होती है एक जांबाज व जोशीली लड़की, जो गांव के एक पीड़ित किसान की बेटी है और उस किसान को पीड़ा दी है करप्ट सिस्टम ने। वही लड़की जब शहर से लौटकर गांव आती है तो उसे सच्चाई का पता चलता है और तब वह गांववासियों को जागरूक करते हुए विरोधियों को अच्छा सबक सिखाती है पर उसे अफसोस है कि उसके पिता ने उच्च शिक्षा दिलाने के लिए उसे किस आर्थिक मजबूरी के तहत शहर भेजा और पिफर हालात ऐसे बने कि पिता को भूमाफिया और नेताओं के शोषण के चलते अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस फिल्म में आठ गीत हैं। संगीतकार राज इंद्र राज कहते हैं कि फिल्म का हर गीत जोशीला और संदेश देने वाला है, जिसमें भरपूर मैलाडी है।

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Mayapuri