मुंबई स्थित वेदा फैक्ट्री नामक स्टूडियो में नाटक ‘वार सत्रह बार’ का मंचन हुआ

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एक लंबे कोरोना काल के बाद दर्शकों ने रंगमंच को बढ़ावा देने के लिए भारी मात्रा में उपस्थिति दर्ज की| दर्शकों में कई फिल्म और टेलिविज़न से जुड़ी हस्तियाँ भी मौजूद थी| फिल्म कलाकार परितोष त्रिपाठी, गीतांजलि मिश्रा , टेलिविज़न कलाकार अनुषा मिश्रा, राष्ट्रीय सम्मान विजेता गीतकार देवमणी पाण्डेय, वरिष्ठ कवि श्री कृष्ण अग्रवाल, रंगमंच कलाकार अतुल सत्य कौशिक और बृजेश नारायण कार्यक्रम में मौजूद थे|
नाटक की तारीफ में परितोष त्रिपाठी ने कहा की वो पिछले चौदह साल से रंगमंच से जुड़े हुए हैं लेकिन इस तरह की बेहतरीन और दुर्लभ प्रस्तुति उन्होंने पहली बार देखी है| अतुल सत्य कौशिक ने कहा की ये नाटक और आगे बढ़ना चाहिए और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंचन का सामर्थ्य रखता है|
वार सत्रह बार एक काव्य नाटक है जिसे अभिनेता कुनाल हृदय एकल करते हैं| नाटक के लेखक भी वही हैं| नाटक का निर्देशन अलकशेन्द्र प्रभाकर ने किया है जो मुंबई यूनिवर्सिटी से रंगमंच में मास्टर्स हैं| नाटक सत्रह वीर रस की कविताओं* के इर्द गिर्द बुन गया जिसमे हिंदुस्तान के राजाओं की वीरगाथा का उल्लेख है|
 छायाकार : रमाकांत मुंडे मुंबई 

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