मुमताज – दारासिंह से दिलीप कुमार

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Mumtaz

 

मायापुरी अंक 50,1975

जिस तरह मधुबाला, मीना कुमारी, वहीदा रहमान और वैजयंती माला एकमात्र अपने ढंग की अभिनेत्री कहलायी हैं उसी तरह मुमताज भी अपने ढंग की एक मात्र अभिनेत्री होंगी।

अपनी शादी से चंद दिनों पहले मुमताज ने एक इंटरव्यू में उक्त बात कही थी। हालांकि इस बात में उनका गर्व झलकता है, लेकिन इस हकीकत से इंकार नहीं किया जा सकता कि इसकी पूर्ति कोई भी अभिनेत्री नहीं कर पायी है। उनका उक्त कथन बिल्कुल सही सिद्ध हुआ है।

मधुबाला, मीना कुमारी, वहीदा रहमान और वेजयंती माला की तरह अभिनय में सर्वोच्च स्थान पाने के लिए मुमताज को बहुत कड़ा परिश्रम और लंबा समय गुजारना पड़ा है। यह मुमताज की विशेषता थी कि दारा सिंह से लेकर दिलीप कुमार जैसे महान कलाकारों के साथ अभिनय कर पाने में सफल हुई।

मुमताज से मेरी पहली मुलाकात ‘अपना देश की’ पार्टी में हुई थी। उस पार्टी में वह बहुत खामोश थीं। अन्य अभिनेत्रियों की तरह पार्टी में शराब पीकर इधर-उधर लड़खड़ाने की बजाय वह एक कोने में एक सहायक नृत्य निर्देशिका के करीब बैठी, गपशप कर रही थीं, मगर होले-होले, धीरे-धीरे मैं उनके करीब पहुंचा और उन्हें ‘खिलौना’ में सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए प्राप्त फिल्म फेयर अवार्ड के लिए बधाई दी। यह अवार्ड उन्हें एक वर्ष पहले मिला था, लेकिन मुलाकात साल बाद हुई थी, इसीलिए मैंने बधाई देना गैर मुनासिब नहीं समझा।

तब उन्होंने कहा था कि आपको एक बार पुन: बधाई देने का मौका शीघ्र मिलेगा।

मैंने पूछा,

वह कैसे?

मुमताज ने बताया,

उसे विजय आनंद निर्देशित फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ के लिए भी फिल्म फेयर अवार्ड मिलेगा।

मैं बुरी तरह चौंका था, तब क्योंकि इस तरह की गर्वोक्तियां कलाकारों को नहीं करनी चाहिए। इसमें कोई शक नहीं कि ‘खिलौना’ के बाद ‘तेरे मेरे सपने’ में भी उसे अभिनय-प्रतिभा का प्रदर्शन करने का सुअवसर मिला था। लेकिन अब एक सवाल मुंह बायें खड़ा है कि ‘खिलौना’ और ‘तेरे मेरे सपने’ के अलावा और कौन-सी फिल्म है जिसमें मुमताज ने सर्वात्तम अभिनय पेश किया?

मेरे विचार से एक भी फिल्म नहीं है। आज तक जितनी फिल्में मुमताज की प्रदर्शित हुई हैं सब की सब ग्लैमर से प्रदर्शित हैं।

कहा जाता है कि जो कलाकार स्वर्ग सिधार जाता है, तो उसकी आलोचना करना ठीक नहीं, इसी तरह मेरा विचार है, जो कलाकार फिल्मों से सन्यास ले ले, उसकी भी आलोचना नहीं की जानी चाहिए अत: इस लेख में हम अन्य बातों पर गौर करेंगे।

पिछले दिनों से एक खबर यह सुनने को मिल रही है कि मुमताज फिर से फिल्मों में आने वाली हैं?

जब भी मुमताज मुंबई आती हैं, तब हमारे निर्माता फिल्मों के ऑफर लेकर उसके पास जाते हैं, लेकिन मालूम हुआ है कि मुमताज ने अभी तक एक भी फिल्म स्वीकार नहीं की है।

जब हम लोगों से कहते हैं कि मुमताज फिल्मों में काम नहीं करेंगी तो वे तर्क पेश करते हैं कि वह अभी तक मां क्यों नहीं बनी?

भई, यह मयूर माधवानी जाने! लेकिन इतना सच है, अभी मुमताज अपने पति मयूर माधवानी के साथ आराम से अपना गृहस्थ जीवन जी रही हैं और उचित भी यही रहेगा कि हम उसे चैन से जीने दें।

मुमताज का फिल्मी जीवन तेरह चोदह वर्ष की छोटी-सी आयु से आरंभ होता है। इस छोटी-सी उम्र में वह फिल्मी माहौल से परिचित होती गयी। उनकी पहली फिल्म ‘पठान’ आज तक रिलीज़ नहीं हुई है।

अपने खिलंडरे स्वभाव की वजह से हर बार उनके साथ एक के बाद एक नाम जुड़ते गये शम्मी कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, देव आनंद, विजय आनंद, राजेश खन्ना, जीतेन्द्र, यश चोपड़ा, फिरोज़ खान, दिलीप कुमार आदि किस कलाकार-निर्देशक के साथ उसका नाम नहीं जुड़ा? शम्मी कपूर के साथ तो उनकी शादी भी होने वाली थी, लेकिन राज कपूर की वजह से यह शादी नहीं हो पायी। जीतेन्द्र स्वंय शादी का प्रस्ताव लेकर उनके पास आये थे, लेकिन मुमताज स्वंय शादी के लिए राजी नहीं हो रही थी, जबकि बकौल रेखा जीतेन्द्र को रोमांस की शिक्षा देने वाली मुमताज ही हैं। और यही शोभा सिप्पी भी कहती हैं।

जीतेन्द्र को लेकर रेखा और मुमताज में काफी तू-तू मैं भी हुई। बाद में कई दिनों तक मनमुटाव चलता रहा।

मुमताज की हमेशा से यह विशेषता रही है कि जिस कलाकार के साथ काम करती हैं, उससे वह निडर हो कर घुल-मिल जाना अधिक उचित समझती हैं। फिर भले ही अखबार वाले उसकी इस विशेषता को ‘रोमांस’ का नाम दे दें। अक्सर वह कहा करती थी।

कौन परवाह करता है ऐसी वे सिर पैर की खबरों की। मैं किसी से नहीं डरती।

और सचमुच मुमताज ने कभी किसी की परवाह नहीं की, न रोमांस के मामले में और न ही अभिनय के मामले में।

एक बार मुमताज ने यहां तक कहा था कि अब मीना कुमारी के बाद अभिनय के क्षेत्र में मुझे न किसी अभिनेत्री का डर है न परवाह।

मुमताज का यह कहना किसी हद तक सही भी है क्योंकि आज तक उन्होंने कभी किसी प्रसिद्ध अभिनेत्री के अभिनय का सहारा नहीं लिया।

आज तक मुमताज ने लगभग पचास-साठ फिल्मों में अभिनय किया है। इन फिल्मों में उसके प्रमुख हीरो थे दारा सिंह, राजेन्द्र कुमार, देव आनंद, धर्मेन्द्र, जीतेन्द्र, फिरोज़ खान, संजय, रणधीर कपूर, मनोज कुमार दिलीप कुमार।

दिलीप कुमार के साथ जब उन्हें ‘राम और श्याम’ के लिए लिया गया तब दिलीप कुमार ने यह कह कर उनके साथ काम करने से इंकार कर दिया कि यह बहुत छोटी हैं और इसकी मेरी जोड़ी जमेगी नहीं, लेकिन बाद में दिलीप साहब ने जब मुमताज की कोई फिल्म देखी तो मुमताज के अभिनय की बहुत प्रशंसा की और उसे अपने साथ अभिनय करने का मौका दिया।

मुमताज की दृष्टि में दिलीप साहब एक महान कलाकार हैं। हिंदुस्तान का कोई भी कलाकार उनकी बराबरी नहीं कर सकता।

आज फिल्म उद्योग में कई प्रसिद्ध अभिनेत्रियां ऐसी भी मौजूद हैं, जो दिलीप कुमार के सथ निर्माता से एक भी पैसा लिए बिना काम करने को तैयार हैं। ऐसी अभिनेत्रियों में जया भादुड़ी और हेमा मालिनी प्रमुख हैं। दोनों ही प्रथम श्रेणी की अभिनेत्रियां हैं। सिर्फ अभिनेत्रियां ही नहीं कई अभिनेता भी दिलीप साहब के साथ काम करने को उत्सुक हैं। अमिताभ, धर्मेन्द्र आदि उनके जबरदस्त फैन हैं।

मुमताज ने एक बार मुझे बताया था,

दिलीप कुमार के साथ काम करना कोई खेल नहीं है। सामने वाला कलाकार चाहे कितना ही सफल कलाकार क्यों न हो, दिलीप कुमार के सामने उनकी एक भी नहीं चलती है। सबके सब होप्लेक्स हो जाते हैं। मैंने कई सितारों के साथ काम किया है। लेकिन जितना आनंद मुझे दिलीप साहब के साथ काम करने में आया, उतना किसी के साथ काम करने में नहीं आया मुझे दुख है कि मैं उनके साथ सिर्फ एक ही फिल्म में काम कर पायी।

दिलीप कुमार के बाद मुमताज, धर्मेन्द्र को बहुत पसंद करती हैं। वह धर्मेन्द्र को बहुत पसंद करती हैं। वह धर्मेन्द्र को उन दिनों से जानती हैं, जब वह स्वंय संघर्ष कर रही थी। तब से धर्मेन्द्र से उनकी दोस्ती है।

संजीव कुमार को वह जानबूझ कर हरी भाई कहती थी, तब संजीव परेशान होकर कहते थे कि प्लीज वह उसे हरी भाई न कहे, सिर्फ प्यार से संजीव कहे।

राजेश खन्ना के साथ उसकी बिंदिया इस तरह चमकी कि निर्माताओं को फिल्म उद्योग में सिर्फ यही एक सफल जोड़ी नज़र आने लगी। एक के बाद एक कई फिल्में इस जोड़ी की हिट हुई मगर राजेश में वे खूबी होती जो मयूर में है तो वह अवश्य राजेश खन्ना से ब्याह रचा लेती मगर मुमताज का कहना है कि हम दोनों में जमीन असमान का अंतर है। मैं स्पष्ट वक्ता हूं जबकि राजेश बातें छिपाते हैं, मन में रखते हैं। वह पक्के पॉलिटिशियन हैं। बहुत होशियारी और चालाकी से अपना काम निकालते हैं।

मुमताज चाहती थी कि उसकी शादी ऐसे नौजवान से हो, जो खूबसूरत तो हो ही, लेकिन पति हो मतलब सीधा, साफ, स्पष्ट, सच्चा हो, उसे डांटने की हिम्मत हो और उसने यह सब कुछ मयूर माधवानी में पाया।

मयूर माधवानी को मुमताज उस वक्त से जानती हैं जब वह सिर्फ तेरह चौदह वर्ष की थी। यानी बचपन से मयूर से परिचित थी। मुमताज की बचपन की सहेली कलपना की शादी मयूर माधवानी के बड़े भाई प्रताप माधवानी से हुई थी कल्पना की वजह से मुमताज का माधवानी परिवार में आना-जाना लगा रहता था। तब शायद मुमताज ने भी कल्पना नहीं की थी कि उसका ब्याह भी इसी परिवार में हो जायेगा। जब वह कल्पना से मिलने जाती थी, तब मयूर से मुलाकातें हुआ करती थी, लेकिन तब ‘प्यार प्यार’ का कोई जन्म नहीं हुआ था।

मुमताज मयूर से उन दिनों आकर्षित हुई, जब वह अपनी छुट्टियां

बिताने लंदन गयी थी। और यही यात्रा, यही दिन मुमताज मयूर को निकट ले आये।

प्यार की शुरूआत हो गयी थी अत: मुलाकातें बढ़ने लगी मयूर माधवानी मुंबई आने लगे। मुमताज अगर कश्मीर में शूटिंग कर रही होती तो वह वही पहुच जाते और अगर मद्रास होती (आइना की शूटिंग में) तो मयूर मद्रास में नज़र आते।

दिन ब दिन दोनों निकट आते गये और 29 मई 1974 के दिन मयूर ने मुमताज से सिविल मैरिज करके फिल्म प्रेमियों की चहेती अभिनेत्री मुमताज छीन ली। उसके बाद 8 जून को हनीमून के लिए बैरूत पहुंचे। जहां से वे दोनों लंदन और अमेरिका पहुंचे। और अब मुमताज अपने पति के घर में गृहस्थ-जीवन का सुख उठा रही हैं, अपना धर्म निभा रही हैं, अपना कर्तव्य पूरा कर रही हैं।


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Mayapuri

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