‘‘कलाकार के तौर पर अपनी एक नयी पहचान बनाने की कोशिश रंग ला रही है..’’ -मुरली शर्मा

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अभिनय के क्षेत्र में मुरली षर्मा ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है.उन्होेने कॉमेडी और मेन विलेन के किरदार निभाते हुए जबरदस्त सफलता बटोरने के बाद अब चरित्रों को प्रधानता देने लगे हैं.2015 में उनके कैरियर की शुरूआत धमाके दार रही.सबसे पहले फिल्म ‘‘बेबी’’ में वह मंत्री के पी ए मि.गुप्ता के किरदार में नजर आए. उसके बाद वह फिल्म ‘‘बदलापुर’’ में नवाजुद्दीन सिद्दकी जैसे कलाकार के साथ टक्कर लेते हुए नजर आए. अब वह बहुत जल्द प्रदर्षित हो रही फिल्म ‘‘धर्मसंकट’’ में परेश रावल और अन्नू कपूर के साथ नजर आने वाले हैं.

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आप अपने कैरियर को किस मुकाम पर पाते हैं?
-एक गैर फिल्मी और मध्यवर्गीय परिवार से आकर बॉलीवुड में पैर जमाना मेरे लिए बहुत बड़ा स्ट्गल रहा. मैंने शुरूआत पत्रकारिता से की थी. धीरे धीरे टीवी तथा फिल्मों में अभिनय करते हुए अब अपनी एक अलग जगह बना ली है. फिल्म ‘‘मैं हूं ना’ ’से मेरे कैरियर को जो गति मिली थी, वह ‘गोलमाल’ और ‘सिंघम’ से होते हुए ‘धर्मसंकट’ तक पहुंच गयी है. मैंने हास्य, विलेन ही नहीं बल्कि मेन विलेन के किरदार भी निभाए. मेरी खुश किस्मती यह रही कि दर्शकों ने हर बार पसंद किया. मेरे अभिनय को सराहा.2015 मेरे कैरियर में नयी खुशियां और एक नयी दिशा लेकर आया है.सबसे पहले फिल्म ‘बेबी’ रिलीज हुई, जिसमें मैंने डैनी व अक्षय कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया. इस फिल्म में मंत्री के पीए गुप्ता के किरदार में लोगों ने मुझे बहुत पसंद किया. मैंने भी अपने कैरियर में पहली बार कॉमेडी या विलेन से हटकर सीरियस चरित्र निभायी.और उम्मीद से कहीं ज्यादा मुझे पसंद किया गया. मैंने खुद अपनी अभिनय प्रतिभा के बारे में दर्शकों की राय जानने के लिए दर्शकों के बीच बैठकर फिल्म ‘बेबी’ देखी. स्क्रीन पर जब जब गुप्ता का किरदार आता था, तब तब जिस तरह से दर्शकों का रिस्पॉंस मिल रहा था, उससे मुझे अहसास हुआ कि मैं अच्छा काम कर रहा हूं. इसके बाद फिल्म ‘‘बदलापुर’’ रिलीज हुई, जिसमें मैंने जेल में बंद कैदी का किरदार निभाया. जेल के अंदर कई बार नवाजुद्दीन सिद्दिकी के किरदार के साथ मुठभेड़ होती है. नवाजुद्दीन सिद्दिकी के सामने आने पर दर्शकों की क्या प्रतिक्रिया होती है,इसे जानने व अपनी प्रतिभा को समझने के मकसद से मैं थिएटर में फिल्म देखने गया.वहॉं पर दर्शकों के मुह से अपने किरदार के बारे में बातें सुन और उनके रिस्पॉंस को देखकर मुझे लगा कि मेरा स्ट्गल व मेरी मेहनत काम आ गयी. दर्शकों का रिस्पॉंस देखकर  मुझे जो खुशी मिली, उसे षब्दों में बयां नहीं कर सकता. पर इस बात का सुखद अहसास हो रहा है कि अब 2015 में मेरेे कैरियर को नई गति मिली है, एक नई दिशा मिली है, जो मुझे उंचाईयों पर पहुॅचा सकती है. पर अभी मुझे ज्यादा मेहनत करना है. अब मुझे उम्मीद है कि फिल्म ‘‘धर्म संकट’’ में भी लोग मुझे पसंद करेंगे.

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फिल्म ‘‘धर्म संकट’’ के किरदार को लेकर क्या कहेंगे?
-इस फिल्म में मैंने एक मौलाना का किरदार निभाया है, जो ठेठ उर्दू भाषा बोलता है. यह मौलाना, परेश रावल के किरदार को परेषान करने में कोई कसर नहीं छोड़ता. मैंने इस किरदार को निभाने के लिए विषेश रूप से उर्दू भाषा सीखी.परेश रावल के साथ मैंने ‘ओह माय गॉड’ सहित कई फिल्में की हैं. लेकिन पहली बार इस फिल्म में मैंने अन्नू कपूर के साथ काम किया.
अन्नू कपूर के साथ काम करने के क्या अनुभव रहे?
-अन्नू कपूर भी कमाल के कलाकार हैं. उनके पास फिल्मी दुनिया से जुड़ी कहानियों का खजाना है. सेट पर मैंने उनसे ढेर सारी कहानियां सुनी. काम करते हुए इंज्वॉय किया. अन्नू कपूर से बहुत कुछ सीखने को मिला.

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इसके अलावा कौन कौन सी फिल्में कर रहे हैं?
-कई फिल्में कर रहा हूं. जिनमें से सबसे पहले रेमो फर्नांडिस निर्देशित फिल्म ‘‘एबीसीडी 2’’ रिलीज होगी. वरूण धवन के साथ यह मेरी दूसरी फिल्म है. इसमें मैंने शेट्टी का किरदार निभाया है. मुझे उम्मीद है कि जब फिल्म ‘एबीसीडी 2’ रिलीज होगी, तो फिल्म देखकर लोग मेरे शेट्टी के किरदार को भुला नहीं पाएंगें. इसके अलावा विजय नांबियार के निर्देशन में बनी फिल्म ‘‘वजीर’’ की है, जिसमें मेरे साथ फरहान अख्तर और अमिताभ बच्चन भी हैं. अमिताभ बच्चन के साथ मेरा कोई सीन नही है. मेरे ज्यादातर सीन फरहान अख्तर के साथ हैं. इसके अलावा अभय देओल के साथ एक फिल्म ‘‘स्नॉफू’’ कर रहा हूं. महेश मांजरेकर के निर्देशन में ‘‘काकश स्पर्श’’ की है, जो कि मराठी, हिंदी व तमिल में बनी है. इन सबके बीच मैं एक तेलगू, एक तमिल और एक मराठी फिल्म भी कर रहा हूं.
फरहान अख्तर के साथ फिल्म ‘‘वजीर’’ करने के क्या अनुभव रहे?
-मैं अपने आपको खुषकिस्मत मानता हूं कि मुझे शुरू से ही बडे़ बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिलता रहा है. फिल्म ‘‘वजीर’’ में फरहान अख्तर के साथ काम करते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा. इसी फिल्म में अमिताभ बच्चन जी भी हैं. मेरी कोशिश रही है कि इन तमाम दिग्गज कलाकारों के साथ ईमानदारी के साथ काम करते हुए अपनी प्रतिभा को साबित कर सकूं.एक कलाकार के तौर पर अपनी एक नयी पहचान बना सकूं.

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विलेन के किरदार निभाते हुए आपने अपनी एक अलग व अच्छी पहचान बनायी थी. पर अब आप भी ‘करेक्टर्स’ निभाने लगे हैं?
-मैंने हमेशा कुछ अलग करने की कोशिश की है.अब सिनेमा भी बदल रहा है. हीरो या विलेन का कॉंसेप्ट खत्म होता जा रहा है. अब लोग विलेन की बजाय करेक्टर को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. इस कारण मैं भी इन दिनों कैरेक्टर को ज्यादा तवज्जो दे रहा हूं.फिल्म ‘बेबी’ और ‘बदलापुर’ करेक्टर निभाकर जिस तरह से मैंने रेस्पोंस पाया,शोहरत पायी, प्रशंसा पायी, उससे यह बात साबित हो गयी कि दर्शक चाहते हैं कि मैं करेक्टर्स निभाउं. लेकिन इसके यह मायने नहीं है कि मैंने विलेन के किरदार निभाने एकदम बंद कर दिए हैं. महेश मांजरेकर निर्देशित फिल्म ‘‘काकश स्पर्श’’ में मैं विलेन बना हूं.
एक कलाकर के तौर पर क्या महसूस करते हैं?
-अभिनेता की जिंदगी बहुत मजेदार जिंदगी होती है.हम एक ही जिंदगी में ढेर सारे किरदारों को निभा जाते हैं.एक कलाकार के जीवन की असली यात्रा यही होती है कि वह अपने कैरियर में कितने विविधतापूर्ण किरदारों को अपने अभिनय से परदे पर संवारता है.कलाकार के तौर पर मेरी यह जो यात्रा चल रही है,उसे मैं बहुत इंज्वॉय कर रहा हूं.

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Mayapuri