सीरियल “सिंदूर की कीमत” में मेरा मिश्री का किरदार काफी चुनौतीपूर्ण है- वैभवी हंकरे

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बाल कलाकार के तौर पर सीरियल “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” में टप्पू की बहन का किरदार निभाने से लेकर कई सीरियल और नंदिता दास के साथ हॉलीवुड फिल्म में अभिनय कर चुकी वैभवी हंकरे इन दिनों कुछ ज्यादा ही उत्साहित नजर आती हैं। उनके इस उत्साह की मूल वजह 18 अक्टूबर से “दंगल” टीवी चैनल पर सीरियल “सिंदूर की कीमत” में मिश्री का लीड किरदार निभाना है

प्रस्तुत है “मायापुरी” के लिए वैभवी  हंकरे से हुई एक्सक्लूसिब बातचीत के अंष

 क्या आपके परिवार में कला का माहौल है?

जी नहीं… मेरे घर में कला का दूर दूर तक कोई माहौल नहीं रहा। मेरी मां पहले इंजीनियर थीं,अब होम मेकर हैं। जबकि मेरे पापा टाटा इंस्टीट्यूट में नौकरी करते हैं। मेरे घर में डाक्टर व इंजीनियर का माहौल है। मेरी बड़ी बहन डाक्टर है और दूसरे नंबर की बहन साइंस से पढ़ाई कर रही है। मैं भी साइंस की स्टूडेंट रही हूँ। यानी कि हम सभी पढ़ाकू हैं। हमारे यहां टीवी या फिल्म का कोई माहौल नहीं रहा। जब मैं नौंवी कक्षा में पढ़ रही थी,तभी मुझे एक शोपिंग मॉल में देखकर सीरियल “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” में अभिनय करने के लिए बुलाया गया था। रक्षाबंधन वाला एपीसोड था। टप्पू की बहन बनी थी। उस वक्त तक मुझे अभिनय की एबीसीडी नही आती थी। लेकिन जब मैं कैमरे के सामने गयी,तो मुझे अहसास ही नही हुआ कि मैं पहली बार कैमरे का सामना कर रही हॅूं। सब कुछ स्वाभाविक तौर पर हो रहा था। मैं नर्वस भी नही थी। फिर ‘सावधान इंडिया’ के कुछ एपीसोड किए। ’एक था राजा एक थी रानी’भी किया था। उसके बाद मैने कई दूसरे सीरियल ही किए। सब कुछ शौकिया ही चल रहा था, मैंने राष्ट्रिय पुरस्कार विजेता निर्देषक फिरोज अब्बास खान के साथ एक सीरियल ‘कुछ भी कर सकती हूँ’ में भी अभिनय किया था। इस सीरियल में मैने बाल विधवा मीना का किरदार निभाया था। उन्होने मुझसे कहा कि मैं बहुत अच्छा अभिनय करती हूँ और इसे मुझे कैरियर बनाना चाहिए। वहीं से मुझे अभिनय को कैरियर बनाने की प्रेरणा मिली। और मेरे दिमाग में आ गया कि मुझे अभिनय को ही कैरियर बनाना है। जबकि 12 वीं तक मैने साइंस से ही पढ़ाई की। लेकिन उसके बाद मेरे दिमाग में अभिनय ही घूमने लगा। अब लोग 18 अक्टूबर से “दंगल” टीवी चैनल पर सीरियल”सिंदूर की कीमत”में मुख्य किरदार निभाते हुए देख सकते हैं।

मैंने अभिनय की कोई ट्रेनिंग नहीं ली। मगर नौंवी कक्षा से अब तक अभिनय करते हुए ही सेट पर सीखती गयी और अब मैं अभिनय में निपुण हो गयी हॅूं। वैसे तो मैं बचपन से भारत नाट्यम सीखती आयी हॅूं।

नंदिता दास के साथ हालीवुड की फिल्म कैसे मिली थी?

मारिया रिपोल निर्देषित हालीवुड फिल्म “ट्ेसेस आॅफ सैंडलवुड”के कास्टिंग डायरेक्टर विषाल गुप्ता ने ‘लाॅयन फिल्मस’के तहत मेरा आॅडीषन लिया था,पर निर्देषक के साथ हमारी सारी मीटिंग स्काइप पर हुई थी। उस वक्त उन्हें नंदिता दास जैसी दिखने वाली लड़की चाहिए थी। वह कई लड़कियों का आॅडीषन ले चुके थे। फिर किसी के माध्यम से उन्हे मेरे बारे में पता चला,तो उन्होने मुझसे संपर्क किया था। नंदिता दास के साथ काम करते हुए मैने न सिर्फ इंज्वाॅय किया था,बल्कि बहुत कुछ सीखा था। इस फिल्म में मैने नंदिता दास के किरदार मीना के बचपन का किरदार निभाया था। छह वर्षीय मीना एक नवजात बच्ची को नदी से बचाती है,जिसे अवंाछित रूप में किसी ने नदी मे फंेक दिया था। फिर वह उसकी देखभाल अपनी बहन की तरह करती है। बड़े होने पर क्या होता है,वह सब इसकी कहानी है। यह फिल्म 2014 में स्पेन में प्रदर्षित हुई थी।

अब तक आपने जो काम किया,उसका क्या अनुभव रहा?

मेरा अनुभव बहुत अच्छा ही रहा। मैने अब तक सभी बेहतरीन निर्देषकांे व सह कलाकारों के साथ काम किया। अब पहली बार मुझे सीरियल “सिंदूर की कीमत”में लीड किरदार निभाने का अवसर मिला है,इस वजह से मैं बहुत ही ज्यादा उत्साहित हॅूं। मेरे लिए खुषी की बात है कि गुल मैम मुझे लीड किरदार में पेष कर रही हैं।

सीरियल “सिंदूर की कीमत “के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

इसमें मेरा मिश्री का किरदार बबली लड़की का है। वह हमेषा खुष रहती है। हर सिच्युएषन मंे खुष रहती है। दूसरों के लिए सैक्रीफाय करती है। वह तकलीफ सह सकती है,दुख झेल सकती है,पर दूसरों के लिए त्याग करने में पीछे नहीं रहती। एकदम बिंदास लड़की है।

सीरियल “सिंदूर की कीमत”को लेकर क्या कहना चाहेंगी?

सीरियल की कहानी बिंदास और बबली लड़की मिश्री के इर्द गिर्द घूमती है। मिश्री की जिंदगी में ऐसा क्या होता है,कि उसे सिंदूर की कीमत का अहसास होता है। या मिश्री की जिंदगी में सिंदूर की क्या कीमत है,इसी के इर्दगिर्द सारी कहानी घूमती है। इसमें टर्निंग प्वाइंट हैं। वैसे यह तमिल सीरियल “रोजा”का रीमेक है।

मिश्री के किरदार को निभाने के लिए किस तरह की तैयारी की?

तमिल सीरियल “रोजा” में मेरे किरदार से  जुड़े जो दृष्य थे,उन्हे मुझे देखने के लिए दिया गया। इसके अलावा लेखक व निर्देषक ने मुझे मेरे किरदार के बारे में समझाया।

किसी भी किरदार को निभाने मंे लुक या मेकअप की कितनी अहमियत होती है?

बहुत ज्यादा। लुक की ही वजह से मुझे हॉलीवुड फिल्म “ट्ेसेस आफ सैंडलवुड”मिली थी। फिर अब सीरियल “सिंदूर की कीमत”में मुझे मेरे लंबे बाल की वजह से काम करने का अवसर मिला। मुझे भी अपना लुक और इसमे जो पोषाक पहनने को मिल रहा है,वह सब मुझे बहुत पसंद है।

मिश्री और वैभवी हंकरे में कितना अंतर है?

बहुत अंतर है। मैं निजी जिंदगी में मिश्री जैसी नही हॅूं।  वैभवी हंकरे यानी कि मैं बहुत ही ज्यादा अंतमुर्खी हॅूं।  मैं बहुत ही ज्यादा संकोची व षाय लड़की हॅूं। मुझे बात करने में ज्यादा सोचना पड़ता है। मजेदार बात यह है कि इस सीरियल में अर्जुन का किरदार निभा रहे अभिनेता षहजाद बिलकुल मिश्री की तरह एक्स्ट्ोवर्ड हैं। दृष्य का फिल्मांकन खत्म होते ही षहजाद गाना गाने लगेंगे या कुछ न कुछ बोलने लगते हैं। वैसे धीरे धीरे समझ में आ रहा है कि कलाकार को कई बार एक्स्ट्ोवर्ड ही होना चाहिए। खुद को अंदर से खोलना और प्रोवोक करना बहुत बड़ी चुनौती है।

अब किस तरह के किरदार निभाना चाहती हैं?

ऐसा कुछ सोचा नही है

भरत नाट्यम से अभिनय में कितनी मदद मिलती है?

भरत नाट्यम नृत्य कहानी कथन की एक प्रक्रिया है। भरत नाट्यम में जो हम नृत्य करते हैं,जो मुद्राएं होती हैं,मसलन सूर्य देव या अन्य किसी भगवान के लिए कोई मुद्रा है,तो वह मुद्रा कहानी कहती है। हम भरत नाट्यम में संवाद की बजाय आँखों, चेहरे या हाथ व पैर के भावों या मुद्रा बनाकर ही व्यक्त करते हैं और दर्शक समझ जाता है कि क्या कहा जा रहा है। तो भरत नाट्यम की वजह से हमें एक्सप्रेषन करने की आदत सी पड़ जाती है,जो कि अभिनय करते समय,किसी भी किरदार को निभाते समय बड़ी सहजता से मदद करता है। कम से कम कैमरे के सामने मेरे एक्सप्रेषन नेच्युरली निकलते हैं। मेेरे लिए भरत नाट्यम का जानकार होना वरदान जैसा है।

शॉक क्या हैं?

नृत्य करना,स्वीमिंग करना,किताबे पढ़ना। मैं कूकिंग बहुत अच्छी कर लेती हॅूं।

सोशल मीडिया में कितना व्यस्त रहती हैं?

अभी तक बिलकुल नही रहती थी। लेकिन अब सीरियल ‘सिंदूर की कीमत’के निर्माताआंे से वादा करने के बाद सोशल मीडिया खासकर इंस्टग्राम से जुड़ी हॅूं। अब मैने इस सोशल मीडिया पर अपने फैंस से बात करने का फैसला किया है।

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Mayapuri