नकल मारने वाले फिल्मी लेखक

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मायापुरी अंक 11.1974

कभी-कभी सम्पादक जी भी बड़े अजीव लेख दे देते है। जैसे इस बार दे दिया है फिल्मों में नकल अब आप ही बताइए, भला इसके बारे में मैं क्या लिखूं ? फिल्मों में तो शुरू से आखिर तक नकल ही होती है। और तो और, यह नाम ‘फिल्म ही विदेशी भाषा से नकल किया हुआ है।

अब अगर हीरो भाइयों की चर्चा की जाए तो पायेंगे कि दिलीप कुमार एक विदेशी कलाकार की नकल करते है। दिलीप की नकल करके राजेन्द्र कुमार व मनोज जी हिट हो गए आजकल राकेश पांडे बडे जोर-शोर से दूसरा दिलीप कुमार बनने की कोशिश कर रहे है. देव आनन्द ग्रेगरी पैक’ की नकल कर-कर के इस उम्र में भी हीरो बने हुए है। राजकपूर सारे जीवन ‘चार्ली’ चैपलीन को अपना खुदा मानते रहे। उन्ही के कदमों पर आजकल चला रहें है रणधीर कपूर। तो अब किस-किस का रोना रोया जाए।

यहां फिल्में बनती है, तो वह भी नकल से। ‘राम और श्याम’ हिट हुई तो उसकी नकल पैदा हो गई। सीता और गीता। जॉनी मेरा नाम’ से देव साहब पर क्या जवानी छाई कि लग गए हाथ धोकर ‘जॉनी मेरा नाम’ की नकलें पैदा करने में। अब उनकी हर फिल्म में उसी फिल्म का रंग होता है। विदेश में एक फिल्म ‘गॉड फादर’ का जो शोर उठा, फिरोज खान साहब ने दिन-रात एक करके ‘धर्मात्मा’ बना ली। जिन्होंने ‘गॉड फादर के साथ इस फिल्म के कुछ रश प्रिंट देखे है, उनका कहना है कि यह दूसरी गॉड फादर है पीछे महेन्द्र सन्धु व डैनी को लेकर एक फिल्म बनी थी। ‘खून खून यह एक विदेशी फिल्म ‘डर्टी हैरी की नकल थी विदेशी फिल्म साऊंड आफ म्यूजिक की नकल में परिचय बनाकर गुलजार ने काफी नाम कमाया है। इधर ऋषिकेश मुखर्जी ने भी विदेशी फिल्म ‘बकेट पर नमक हराम बनाकर खूब वाह-वाही लूटी। शम्मी कपूर ने विदेशी फिल्म इरमा ला डूस’ की नकल ‘मनोरंजन पैदा कर दी।

कई बार यह फिल्मी नकलबाज बड़े चक्कर में पड़ जाते है। पीछे गुलशन नन्दा जी की कहानी पर फिल्म बनी थी ‘जोशीली’ उसी के साथ प्रदर्शित हुई थी एक नारी दो रूप इन दो फिल्मों को देखकर भारतीय फिल्म दर्शक चक्कर में पड़ गया थे क्योंकि दोनों फिल्मों की कहानी एक सी थी। दरअसल हुआ यह कि दोनों फिल्मों के कहानी लेखकों ने एक ही विदेशी उपन्यास कार (जेम्स हेडले चेज) के एक उपन्यास से कहानी चुराई थी। यह तो उनकी किस्मत खराब थी कि दोनों फिल्में एक साथ प्रदर्शित हो गई और एक साथ पिट भी गई।

गुलशन नन्दा जी ने काफी नाम पाया है उपन्यास लेखक के रूप मे साथ ही नाम गंवाया भी है दूसरों की नकल करके। यह ‘जोशीला ही उनके नाम पर धब्बा हो ऐसा नही है। पीछे फिल्म नया जमाना की कहानी भी इन्होनें लिखी थी जो एक बंगला फिल्म की पूरी नकल थी। फिल्म शर्मीली के लिए भी कहा जाता है कि वह शिवानी के उपन्यास ‘विष कन्या की नकल है।

तो पाठक भाइयो, बात यह है कि फिल्मों में तो शुरू से आखिर तक नकल ही नकल है। और सम्पादक जी कहते है कि फिल्मों मे नकल पर एक लेख लिख दो। अब आप ही बताइए मैं क्या लिखूं ?


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Mayapuri

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