नाना पाटेकर

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नाना पाटेकर को जन्मदिन मुबारक हो

“आ गये मेरी मौत का तमाशा देखने” ये डायलॉग सुनते है याद आ जाता है क्रांतिवीर मूवी का वो नो जवान याद आ जाता है जो अपनी फाँसी के मौके पर पूरी भीड़ को भड़काऊ भाषण दे रहा होता है क्या आपको याद है याद ही होगा वो थे अपने नाना पाटेकर। नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के वो बेहतरीन एक्टर हैं जो अपनी बेबाक आवाज़ और डायलॉग डिलीवरी के अलग अंदाज के लिए जाने जाते हैं। नाना पाटेकर ने सामजिक मुद्दों पर कई फिल्मे की जिसमे उसके दमदार अभिनय को सराहा गया।

 बॉलीवुड के इस बेबाक एक्टर जिसे लोग नाना पाटेकर के नाम से जानते है का जन्म 1 जनवरी 1951 को मराठी परिवार में हुआ था जिनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर है लेकिन फिल्मो में इन्हें नाना पाटेकर के नाम से जाना जाने लगा । नाना पाटेकर के पिता दिनकर पाटेकर कपड़े के व्यापारी और माँ संजनाबाई पाटेकर एक गृहणी थी। नाना पाटेकर ने अपनी ग्रेजुएशन सर जे जे इंस्‍टीट्यूट ऑफ अप्‍लाईड आर्ट, मुंबई से की और नाना पाटेकर की शादी नीलकंठी पाटेकर से हुई और उनका एक बेटा मल्हार पाटेकर है लेकिन वैवाहिक जीवन में समस्याओ के चलते उनका बाद में तलाक हो गया। तब नाना पाटेकर ने अपने साथी मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर “नाम फाउंडेशन” की स्थापना की जो किसानो की मदद करती है |

 नाना पाटेकर ने अपने करियर की शुरूत कई सालो तक थिएटर कर के की और बात में उन्होंने 1974 में मुज्जफर अली द्वारा निर्देशित “गमन” से अपना फ़िल्मी डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने मोहरे (1987) और सलाम बॉम्बे (1988) फिल्मो में काम किया | 1989 में आयी “परिंदा” फिल्म में  विलन का किरदार निभाकर फिल्मकारों की नजरो में आ गये । इस फिल्म ने उनको इंडस्ट्री में अहम स्थान दिलाया और उनको इस फिल्म के लिए सपोर्टिंग एक्टर का रास्ट्रीय पुरस्कार मिला ।

 1991 में नाना ने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और अपनी पहली फिल्म “प्रहार” निर्देशित की और इस फिल्म में वो खुद एक्टर और माधुरी दीक्षित एक्ट्रेस थी । इसके बाद 1992 में अंगार फिल्म में उनको बेस्ट विलेन का अवार्ड मिला । 1994 में उनकी फिल्म क्रान्तीवीर के  लिए उनको नेशनल फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर मिला।  इस फिल्म में उनके दमदार डायलाग को भुलाया नहीं जा सकता। 1994 में अभय फिल्म में उन्होंने एक भूत का किरदार निभाया जिसके लिए भी उनको अवार्ड मिला। इसके बाद उन्होंने अग्नी साक्षी (1996) , खामोशी (1996) और वजूद (1998). फिल्म में अलग अलग किरदार निभाए  नाना पाटेकर ने बॉलीवुड में हीरो और विलन दोनों तरह के किरदार निभाए।  ख़ामोशी मूवी के बाद नाना कई सालो तक फिल्मो से दूर रहे और फिर 1999 में कोहराम से फिल्मो में वापसी की इसमें उन्होंने एक पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया उसके बाद फिर कई सैलून बाद वो 2005 की फिल्म “अब तक छप्पन” में दिखाई दिए। इसके अलावा नाना पाटेकर को पहली बार 2007 में बनी फिल्म वेलकम में हास्य अभिनेता का किरदार निभाते दिखाया गया ।| नाना ने कई मराठी नाटको और फिल्मो में भी काम किया | इनके अलावा इनकी कुछ जानी मानी फिल्मे ब्लफमास्टर , टैक्सी न. 9211 , राजनीति , पाठशाला , यहाँ के हम सिकन्दर , इट्स माय लाइफ , और हुतुतू है |

 नाना पाटेकर ने 2011 में  देओल और  2014 में डॉक्टर प्रकाश बाबा आम्टे नाम की मराठी फिल्मो में भी काम किया | 2015 में अब तक छप्पन की सीरीज अब तक छप्पन 2 में काम किया |नाना पाटेकर ने कुछ फिल्मो जैसे आंच (2003) , वजूद (1998) और यशवंत (1997)  में पार्श्व गायक का काम भी किया | इन सबके अलावा दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले “जंगल बुक” कार्टून शो में शेरखान की आवाज़ दी।नाना पाटेकर ने अपने जीवन में अब तक कई फिल्मो में काम किया जैसे गमन (1978), प्रतिघात (1987), परिंदा (1990), प्रहार (1991), तिरंगा (1992), राजू बन गया जेंटलमैन (1992), क्रांतिवीर (1994), अग्नि साक्षी(1996), यशवंत (1997), गैंग (2000), तरकीब (2000), शक्ति (2002), आंच (2003), अब तक छप्पन (2004), वेलकम (2007), पाठशाला (2010), राजनीति (2010), कमाल धमाल मालामाल (2012), दी अटैक्स ऑफ़  26/11 (2013), वेलकम बैक (2015),दी जंगल बुक (2016) आदि उनकी लास्ट मूवी फिल्म “फाइनल कट ऑफ़ डायरेक्टर” थी व इनकी अपकमिंग फिल्मो में “हेरा फेरी” ३,वेलकम टू दी  जंगल और वेडिंग एनिवर्सरी जैसी फिल्मे है ।


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Mayapuri

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