एक सौम्य, जिंदादिल और मुस्कराते चेहरे वाले एक्टर हैं नरेश गोंसाई

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लोगों ने उनको विज्ञापन फिल्मों में देखा है चटखारे लेनेवाले दादाजी के रूप में, टीवी के धारावाहिकों में देखा है अलग अलग किरदार निभाते हुए,  फिल्मों में देखा है कॉमेडी पुलिस वाले के रूप में तथा और भी कई अन्य रूपों में। अब वह वेब सीरीज के व्ज्ज् पर भी आने लगे हैं। यह है अभिनेता नरेश गोंसाई का विविध रूप। इस कोरोना संकटकाल में भी वह बॉलीवुड में काम करते दिखाई पड़े हैं। मुम्बई में मुलाकात होती है तो वह एक इन हाउस शूट पर होते हैं।

बॉलीवुड में पहुचने की आपकी कहानी क्या रही है?

मैं दिल्ली से हूं। वहां काफी काम किया लेकिन, कहते हैं ना कि कलाकार को मुम्बई पहुंचकर ही शुकुन मिलता है। मेरी भी कहानी कुछ वैसी ही है। पिताजी श्री कुलदीप गोसाई सरकारी सेवा में थे, साथ ही कलाकार भी थे। वह रामलीला, स्टेज किया करते थे। उनका शौक मैंने बचपन से देखा है इसलिए कलात्मक रुझान और अपने कल्चर से लगाव मुझमे उनसे ही आया है। मैं भी थियेटर वगैरह करने लग गया था। दिल्ली में बने हुए धारावाहिकों ‘फिर वही तलाश’, ‘दूसरा केवल’ में मैंने  काम किया। लेख टंडन जी ने मेरा हौसला बढ़ाया। प्रातःकाल के प्रसारण वाले कुछ सीरियल किया- ‘पोपट जासूस’, ‘हमारे मैनेजर’ आदि। लेख टंडन जी ने कहा कुछ बड़ा करना है तो मुम्बई जाओ। दिल्ली में छोटे बड़े बहुत काम किए थे। हौसला दिल्ली ने ही दिया। फिर हसरतों ने उछाल मारा, मैं मुम्बई आगया। यह संयोग था कि उन्ही दिनों सुभाष घई अपनी नई शुरू होने जा रही फिल्म ‘कांची’  के लिए एक कलाकार देख रहे थे।

एक हंसमुख जिंदादिल पुलिस इंस्पेक्टर वाले का रोल था। इस रोल के लिए वह मार्केट के किसी कलाकार को काम ना देकर नए कलाकार को लेना चाहते थे। और यहां मेरी बात बन गयी। इस फिल्म ने मेरा रास्ता खोल दिया। सुभाष घई साहब एक बड़ा नाम है। उनकी फिल्म करना मेरे लिए एक परिचय बन गया। इसके बाद निर्देशक गुरुमीत सिंह के साथ किया-‘व्हाइट इज फिश’, मृगदीप लांबा के साथ किया- ‘तीन थे भाई’, दिबांकर बनर्जी के साथ- ‘लकी ओये लकी’ तथा रजत कपूर के निर्देशन की फिल्म ‘आंखों देखी’ में काम किया। धारावाहिक बहुत किया। होटल्स के एड्स किए-खाने के टेस्ट बताने वाले कई विज्ञापन किया। नरेश गोसाई ने वेबसीरीज ‘मिर्जापुर’ और ‘इन लीगल’ में भी काम किया है। वह कहते हैं- “मैं अपने काम से काम रखने वाला आर्टिस्ट हूं।”

कॉमेडी के अभिनय को बहुत मुश्किल जॉब माना जाता है। इस बारे में आपके क्या ख्याल हैं?

यह सही है। आजकल पहले वाली कॉमेडी नहीं है। कॉमेडी में प्रॉपर टाइमिंग का बहुत महत्व होता है। ‘कांची’ करने के समय घई साहब को एक हसमुख जिंदादिल इंस्पेक्टर चाहिए था। उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा। बेहतरीन संवाद, भावप्रणव अभिनय एक कलाकार में होना बहुत जरूरी होता है।

सुना है एक फिल्म में आप सनी लियोन के साथ भी काम कर रहे हैं?

हां, लेकिन मैं उनके बाप की भूमिका कर रहा हूं। फिल्म का नाम है ‘लकी’ और फिल्म के निर्देशक हैं टी एल वी प्रसाद।

चलते-चलते वह संदेश देना चाहते हैं कि कोरोना से बचाव करना अब हम सब की निजी जिम्मेदारी है। काम करिए लेकिन बच कर रहिए।


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Mayapuri

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