‘‘नसीर भाई और अनु कपूर मेरे बहुत नजदीक हैं’’ – परेश रावल-

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राजनीति और फिल्म तथा थियेटर, इन तीनों में सामंजस्य बनाना तो जैसे कोई परेश रावल से सीखे । क्योंकि आज वे अभिनेता है सांसद है और थियेटर पर भी सक्रीय है । लेकिन उन्होंने तीनों चीजों के लिये एक टाइम टेबल बनाया हुआ है और वे उसी के अनुसार चलते हैं । उनकी ताजा फिल्म का नाम ‘ धर्म संकट में’ । इस फिल्म के अलावा कुछ अन्य सवालों के साथ उनसे एक बातचीत

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इस फिल्म को करने की कोई खास वजह ?
खास वजह यही थी कि मुझे कहानी और अपनी भूमिका काफी अच्छी लगी । इस फिल्म के बारे में मुझे फिल्म के डायरेक्टर फवाद खान ने करीब एक साल पहले बताया था । उस वक्त मुझे कहानी में काफी कुछ अलग दिखाई दिया । मैने उन्हें कह दिया था कि आप फिल्म शुरू करो मैं फिल्म में काम कर रहा हूं ।
फिल्म में नसीरूद्दीन षाह और अनु कपूर जैस कलाकार हैं । क्या फिल्म करने की यह भी एक वजह थी ?
नसीरूद्दीन भाई और अनु कपूर मेरे बाद फिल्म में आये । मुझे जब पता लगा कि वे भी फिल्म में काम करने जा रहे हैं तो मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि नसीर भाई और अनु कपूर मेरे बहुत ज्यादा करीब हैं । दूसरे ऐसे आर्टिस्टों के साथ के काम करते हुये पता ही नहीं लगा कि फिल्म कब खत्म हो गई ।

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आपके लिये मीनिंग फुल सिनेमा के क्या मायने हैं ?
ऐसा सिनेमा जो लोगों के मनोरजंन के अलावा दर्शक को शिक्षित भी करे । ऐसा सिनेमा एक बार तो हर एक्टर को करना चाहिये। मैं तो हमेशा ऐसे सिनेमा के लिये तैयार रहता हूं ।

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आज आप तीन जगह बंटे हुये हैं । राजनीति, फिल्में और थियेटर । कैसे मैंनेज कर लेते हैं  ?
संसद में कोई  सारा साल नहीं देना होता । मैने संसद, फिल्म और थियेटर को कुछ इस तरह से बांटा हुआ है कि ज्यादा पेरशानी नहीं होती । जो थोड़ी बहुत होती भी है उसे मैनेज कर लिया जाता है।

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आप भी इस बात के गवाह हैं कि ज्यादातर अभिनेता राजनीति में सफल नहीं हो पाते ?
मैं इस बात से इत्तफाक नही रखता कि कलाकार राजनीति में सफल नहीं हो पाते । मैं आपको कितने ही ऐसे अभिनेता अभिनेत्री गिनवा सकता हूं जो राजनीति में भी बढ़िया काम कर रहे हैं । जैसे राज बब्बर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, सुनील दत्त साहब तो बेहद लोकप्रिय नेता थे ही । उनके अलावा शत्रुध्न सिन्हा, हेमा मालिनी तथा जया प्रदा और स्मृति इरानी अच्छा खासा काम कर रहे हैं।
 भूमिका के हिसाब से क्या इस फिल्म का मिलान ओह माई गॉड से करना चाहेगें ?
बिलकुल नहीं इस फिल्म में और ओह माई गॉड में काफी अंतर है । हां मैसेज दोनों में ही स्ट्रांग हो सकता है ।
ऐसी फिल्मों के दर्शक पर प्रभाव डालने के लिये उसके एक्टर का कितना यागदान होता है ?
अगर कहानी  और उसमें संदेश अच्छा है तो एक्टर थोड़ा कमजोर भी होगा तो चलेगा । क्योंकि कुछ फिल्में ऐसी होती है कि उनमें एक्टर कोई भी हो फिर भी वे दर्शक को बेहद पसंद आती हैं । इसके अलावा कभी कभी किसी फिल्म में ऐसा कुछ मिल जाता है जिसमें आपको विश्वास है  और जब आप उसे निभाते हैं तो अपने आप एक कन्नेक्षन जुड़ जाता है । बात में सच्चाई आ जाती है, आपकी वाईस चेंज हो जाती है । सबसे बड़ी बात कि आप उस बात को आसानी से कह जाते हैं ।

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यह किसी अंग्रेजी फिल्म का रीमेक हैं?
जी हां । मुझे निर्देशक ने ओरीजनल की डीवीडी देनी चाही थी लेकिन मैने मना कर दिया था क्योंकि  मैं ओरीजनल नहीं  देखना  चाहता था । वो इसलिये क्योंकि  फिर आप पर उस फिल्म का प्रभाव बना रहता है ।
एक्टर्स की नई खेप के बारे में क्या साचतेे हैंं ?
मेरा मानना है कि ये एक्टिंग और एक्टरों के लिये ये सुनहरा दौर हैं । क्योंकि जिस तरह के एक्टर आज आ रहे हैं वैसे मैने अपनी पूरी लाइफ में नहीं देखें । नवाजूद्दीन, राज कुमार राव, नील भूपलन, दर्शन कुमार है, आदिल हुसॅन आदि, क्या एक्टर हैं । मैं तो इन सभी के साथ काम करने के लिये आतुर रहता हूं ।
इसके अलावा आने वाली फिल्में?
वैलकम बैक 2 रीलीज होगी तथा हेरा फेरी शुरू होने जा रही है ।


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Mayapuri

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