मैं सिर्फ प्यार की खातिर शादी करूंगी – नीतू सिंह

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मायापुरी अंक 53,1975

जी नहीं, मैं चिंटू से शादी करने के ख्वाब नहीं देख रही हूं? मुझे समझ नहीं आता, ये अजीब अजबी किस्म की बातें पत्रिकाओं में कैसे छप जाती हैं? मैं तो एक लेख में यहा तक पढ़ चुकी हूं कि नीतू सिंह की शादी ऋषि कपूर से 16 मार्च, 1974 को हो चुकी है तथा दोनों हनीमून मनाने बैरूत गये थे! मेरा हनीमून भी हो चुका और मुझे खुद को ही पता नहीं? यह तो बहुत शर्म की बात है और अफसोस की भी? मोहन स्टूडियो के एक मेकअप कमरे से आवाज़ उठी।

बड़ी-बड़ी आंखे करके जब नीतू इस कदर बोली तो मैं यह फैसला नहीं कर पा रहा था, कि दिमाग से उनकी बात ध्यान देकर सुनूं या आंखो से उनके सुंदर चेहरे के बदलते भावों पर गौर करूं! लेकिन नीतू के साथ जोऱ जोऱ से हंसने से मैं अपने आप को न रोक सका। जरा सोचिये, मैंने कितनी गंभीरता से उनसे सवाल किया था कि क्या वह सचमुच चिंटू को अपना जीवन साथी बनाने का निर्णय कर चुकी हैं जैसा कि कहा जाता है? और नीतू ने तो प्रश्न का चुटकुला-सा बना कर रख दिया!

फिर भी मैं बोला, लेकिन क्या इसका मतलब आपको ऋषि पसंद नहीं हैं?

क्या मतलब पसंद नहीं है क्यों? आप तो यूं कह रहे हो जैसे वह (चिंटू) किसी दुकान में रखा खिलौना हो नीतू कुछ बुदबुदाये स्वर में बोलीं, मैंने इस बात से कब इंकार किया है मुझे चिंटू बहुत-बहुत अच्छा लगते हैं। अरे उनके साथ तो मैं बहुत खुश रहती हूं। चाहे हम फिल्म की शूटिंग कर रहे हों, या बैठकर गप्पे हांक रहे हों। बहुत खुश मिजाज हैं वे। हां, पहले कुछ चुप-चुप से रहते थे व ज्यादा घुलना मिलना पसंद नहीं करते था, मगर अब लगता है कि उनपर बड़े भाई डब्बू का असर हो गया है। यह कहकर नीतू हंसने लगी।

अच्छा, यह बताओ कि आप अन्य बहुत सी हीरोइन की तरह फिल्मी महफिलों में क्यों शामिल नहीं होती? नहीं आप किसी हीरो के साथ (ऋषि के इलावा) काम के बाद घूमती नज़र आती हैं ?

हां, नीतू ने आंखे कुछ मटकाते हुए कहा, यह ठीक है। मैं सचमुच शूटिंग के बाद फिल्मी लोगों में रहना पसंद नहीं करती। अब तुम्हीं बताओं, जब सारा दिन में काम करती रहती हूं और अन्य फिल्म कलाकारों में घिरी रहती हूं, तो क्या अपनी फुर्सत की चंद घड़िया मैं उस महौल से दूर नहीं बिताना चाहूंगी? मैं तो यह मानती हूं कि Off sets हर कलाकार का अपना जीवन निजी जीवन होना चाहिये।

मगर आप करती क्या फुर्सत मैं? मैंने पूछा।

ओफो! आप तो यूं कह रहे हो जैसे मेरे पास घंटो कुछ करने को नहीं होता। शाम के 7-8 बजे तक तो शूटिंग चलती है, और कभी-कभी तो रात को 12-1 भी बज जाते हैं घर पहुंचने में जब भी मैं कुछ देर फ्री होती हूं तो या तो मम्मी से बातें करती रहती हूं, या फिर कॉमिक्स पढ़ती हूं।

और जो कहा जाता है कि आप की मम्मी कुछ जरूरत से ज्यादा आपके साथ चिपकी रहती है? मैंने अपने फैन की ओर देखते हुए कहा। नीतू को जरा़ गुस्सा चढ़ा हां हा, लोग तो यही चाहेंगे कि मैं अकेली ही काम पर जाऊं और अकेली ही फिल्म निर्माताओं आदि से मिलू ताकि वे उसका किसी न किसी तरह से नाजयाज फायदा उठा सके। मम्मी के साथ होने के कारण ही तो मैं बेफ्रिक होकर अभिनय की तरफ पूरा ध्यान लगा पाती हूं। मैं यह नहीं कहती कि फिल्म इंडस्ट्री में सभ्य लोग नहीं हैं, पर एक जवान लड़की के साथ किसी न किसी जिम्मेदार रिश्तेदार का होना मैं जरूरी मानती हूं। और तो और, मैं तो जब तीस साल की हो जाऊंगी तब भी मम्मी के बिना कहीं नहीं जाऊंगी। यह भांपते हुए कि राजी के बारे में पूछना अधिक अच्छा न होगा, मैंने बात पलटते हुए पूछा, रोमांचक दृश्यों की शूटिंग करते समय आपको क्या महसूस होता है?

अम्म वैसे तो यह जानते हुए कि काम-काम है और मुझे कैमरा के सामने केवल एक्टिंग ही करनी है, दिल में कोई ऐसी-वैसी भावुकता आने का सवाल पैदा नहीं होता, लेकिन शुरू- शुरू में मुझ पर ‘इंटीमेट’ सींस का कई बार असर हो जाता था और मैं कुछ अजीब-सी कसक महसूस करती थी। पर अब तो आदत हो चुकी है खाना खाने के बराबर हां, पर एक बात बलात्कार के दृश्यों की शूटिंग से अभी भी मुझे सख्त नफरत है दीज रेप शॉट्स आर हॉरिबल

क्या आपने कभी महसूस किया है, कि गंभीर रोल्स के बजाय चमक धमक वाली भूमिकाएं ज्यादा अच्छी निभा पाती हो? मैंने उनसे साफ-साफ पूछा।

कुछ क्षण सोच कर नीतू बोली, नहीं, ऐसी बात नहीं है। दरअसल क्या होता है कि हम हीरोइन किसी एक प्रकार की भूमिकाओं के लिये टाईप हो जाती हैं। और अन्य प्रकार के रोल्स मिलते नहीं। यही हाल मेरा भी हुआ है। मैं अधिकतर बड़े ग्लैमर वाले रोल करती आई हूं जिन में गीत व कैबरे आदि भी शामिल हो! सो, हो सकता है कि आपको भी और लोगों की तरह यह गलतफहमी हो गई हो कि मुझे गंभीर रोल अदा नहीं करने आते।

इस जवाब से संतुष्ट होकर मैंने अपना अगला प्रश्न छोड़ा, अपने प्रशंसको के बारे में कुछ बताइये?

नीतू खुशी से ताली बजाकर बोली, अरे आप क्या जानो, हमारे चाहने वाले सिर्फ आप ही नहीं मुझे तो हर रोज ढेर सारे खत आते हैं और टेलिफोन पर भी बहुत से प्रशंसक दूर-दूर से ट्रंक-कॉल भी करते हैं और मजे की बात तो यह है कि उनमें से 85 प्रतिशत तो लड़को व नौजवानों के पत्र होते हैं जो सभी मुझसे मिलना चाहते हैं या फिर शादी करना चाहते हैं। इसीलिये फोन पर तो मैं किसी प्रशंसक से बात करती ही नहीं।

बात शादी से शुरू हुई थी सो शादी से ही खत्म करनी चाहिये मैंने कहा, आप कितने वर्ष ही होकर शादी करेंगी?

उम्र से इसका कोई ताल्लुक नहीं, मैं जब भी शादी करूंगी, सिर्फ प्यार की खातिर करूंगी!


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Mayapuri

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