स्वीट सेवनटीन गर्ल नीतू सिंह

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मायापुरी अंक 01.1974

बच्चे मन के सच्चे’ बड़ी ही प्यारी आवाज में कुछ ही दिनों पहले ‘दो कलियां’ फिल्म में तुतला कर गीत गाने वाली छोटी सी बच्ची आज सैक्स और सौन्दर्य की कसौटी पर इस तरह कसी जायेगी किसे पता था? हां किसे पता था कि सफेद दूध से उजले दांतों वाली नीतू जब यकायक जवान हो जायेगी तो क्या होगा ? बचपन से जवानी तक का सफर नीतू इतनी जल्दी पार कर गई कि लिखने वालों ने न जाने क्या-क्या उल्टा सीधा लिख दिया उसके बारे में। अब भला यह भी कोई तुक हुई कि कोई पत्रकार नीतू से सीधा पूछ बैठे, इतनी जल्दी जवान कैसे हो गई? नीतू स्वंय नही जानती कि वह क्या है? उसे व्यर्थ के प्रश्नों के उत्तर देने से कोफ्त होती है, बस हंसती है खिल खिल खिल खिल, चुहिया के से दांत चमकाती हुई। कोई फोटोग्राफर आ जाएगा नीतू के चित्र खींचने के लिए तो झट से तैयार हो जाएगी। जिस-जिस कोण से, जो एक्सप्रैशन वह चाहेगा देती जाएगी और जब किसी पत्र-पत्रिका में ‘सैक्स सुन्दरी’ या ‘पिन अप सुन्दरी’ के नाम से उसका फोटो छपेगा तो वह चिहुंक उठेगी।

‘कौन है ये फोटोग्राफर ? मैंने तो कभी ऐसा चित्र खिंचवाया ही नही’ देखते ही उस चित्र पर सैकड़ों आड़ी तिरछी रेखाएं खींच डालेगी। उसकी इस आदत का उसके मम्मी और डैडी को अच्छी तरह पता है। वे जानते है कि नीतू बड़ी सरल और साफ-साफ कहने वाली लड़की है। फिल्मोद्योग में इस प्रकार कि लड़कियों की सफलता संदेहास्पद होती है क्योंकि तड़क-भड़क की इस दुनिया में तो वाचलता और फरेब का ही बोलबाला है। सीधेपन से यहां काम नही चलता। इसके बावजूद आज नीतू सिंह एक व्यस्त अभिनेत्री है। दर्जनों फिल्में उनके पास है और यह भी क्या कम गौरव की बात है कि उनकी तुलना हेमामालिनी जैसी स्वप्न सुन्दरी से की जाती है।

पिछले दिनों जब मेरी मुलाकात नीतू से हुई तो वह आराम कुर्सी पर लेटी किसी पत्रिका के पन्ने पलट रही थी। ‘हैलो स्वीट सिक्सटीन’ मैंने नीतू को सम्बोधित किया तो उनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट उभर आई। स्वीट सिक्सटीन नही सेवनटीन कहिए जनाब, नीतू तपाक से बोली। ‘अब मुझे सोलहवां साल नही सत्रहवां लगा है, क्यों डैडी ? नीतू ने अपनी बात की पुष्टि के लिए डैडी की ओर देखा।

‘जी हां, 8 जुलाई को नीतू पूरे सोलह साल की होकर सत्रहवें में लगी है। उम्र से क्या होता है, अभी तो निरी बच्ची है और यही समय तो होता है काम करने का।

‘सुना है कि आप राजकपूर की खोज है’ इस बात में कहा तक सच्चाई है?

‘राज जी ने मुझे सबसे पहले फिल्म ‘बॉबी’ के लिए साईन किया था। जब दूसरे निर्माताओं को यह बात पता चली तो उन्होनों भी अपनी फिल्मों के लिए मुझे अनुबंधित कर लिया। बाद में ‘बॉबी’ में डिम्पल आ गई। इसलिए जब मुझसे कोई पूछता है तो मैं अपने को राज साहब की ही खोज बताती हूं।

‘यदि राज साहब जैसा कोई अच्छा निर्माता निर्देशक आपसे अपनी फिल्म में नग्न दृश्य देने लिए या अंग प्रदर्शन के लिए कहे तो क्या आप तैयार होगी ?

‘बिल्कुल नही। कोई भी मुझे नग्न दृश्य देने के लिए बाध्य नही कर सकता। आखिर मेरी एक मर्यादा है और मैं नही चाहूंगी कि मर्यादा का उल्लघंन हो।

‘पत्र पत्रिकाओं’ में आपकी और ऋषि कपूर की बहुत चर्चा है। कहा जा रहा है कि आप दोनों में रोमांस चल रहा है। क्या यह सच है ?

कहने को तो यह भी कहा जा रहा है कि मैं ऋषि कपूर से शादी करने वाली हूं मगर यह एकदम नामुमकिन बात है। अभी तो इस विषय में मैं सोच तक नही सकती।

‘यश चोपड़ा की फिल्म का मुहूर्त होने के बाद सुना है आपको उस फिल्म से निकाल दिया गया जबकि पहले आप फिल्म में काम कर रही थी ?

‘हां, उस फिल्म का नाम ही ‘गर्दिश’ था सो गर्दिश में फंस गई। बात दरअसल यह है कि यश चोपड़ा एक साथ कई फिल्में बना रहे है। काम ज्यादा है इसलिए उन्हें इस फिल्म का मोह त्यागना पड़ा वैसे मेरे लिए यह एक अच्छी ही बात हुई क्योंकि फिल्म की सारी कहानी मुझ पर ही केन्द्रित थी। परवीन की इसमें एक छोटी-सी रोमांटिक भूमिका थी। कहानी के अनुसार मैं अमिताभ की बहन थी जो गांव से शहर आती है। कुछ शुभचिन्तकों ने मुझे सलाह दी कि इस फिल्म के बाद दर्शक मुझे नायिका के रूप में स्वीकार नही करेगे। अत: अच्छा ही हुआ फिल्म रुक गई। नही तो आप जानते ही है कि इस इंडस्ट्री में जिस पर एक बार जो ठप्पा लग जाए तो बस लग ही जाता है।

बात ठीक है आपकी। मगर जहां तक मैं समझता हूं विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं का चयन करना चाहिए आपको।

वो तो मैं पूरा ध्यान रख ही रही हूं क्योंकि मेरा अपना विचार है कि विविधता अवश्य होनी चाहिए। मेरी आने वाली फिल्में ‘आशियाना’ ‘खेल खेल में’ ‘जहरीला इंसान’ तथा ‘रफूचक्कर’ में आप मुझे इस कसौटी पर खरा पायेंगे।

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Mayapuri