गांधी जी के साथ-साथ नेताजी का भी योगदान है इस देश की आज़ादी में

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जिस वक़्त गांधी जी अंग्रेज़ों पर देश छोड़ने और भारत को आज़ाद करने के लिए डिप्लोमेटिक प्रेशर बना रहे थे उसी वक़्त नेताजी सुभाष चंद्रबोस भी अपनी सेना जिसे हम INA (Indian National Army) के नाम से जानते हैं; को लेकर अंग्रेज़ों के साथ संघर्ष कर रहे थे। यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि नेताजी की सेना द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के सहयोग में थी। वही जापान जिसने अमेरिकन बंदरगाह पर्ल हार्बर पर हमला किया था। जापान जो जर्मनी  के सहयोग में विश्वयुद्ध लड़ रहा था वहीं ब्रिटेन की तरफ से भारतीय फौज जर्मनी के खिलाफ लड़ रही थीं। शायद यही कान्फ्लिक्ट वो वजह रही कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को जो सम्मान जापान में मिला, वैसा यहाँ भारत में उस वक़्त न मिल पाया।

ये एक वीडियो देखिए जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस का स्वागत सिंगपुर में किस तरह हो रहा है

रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बक्शी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये कहा भी था कि भारत को आज़ादी दिलाने में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी उतना ही योगदान है जितना महात्मा गाँधी का है। लेकिन देश ने उन्हें भुलाकर सिर्फ और सिर्फ पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी को ही सम्मान की नज़रों से देखा है और उन्हें ही आज़ादी का क्रेडिट दिया जाता है। netaji subhash chandra bose ( netaji subhash chandra bose ( netaji subhash chandra bose ( netaji subhash chandra bose (

नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बारे में विस्तार से जानने के लिए फिल्म बोस ज़रूर देखें।


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