यूट्यूब पर नहीं अपलोड कर सकेंगे अश्लील फ़िल्मी सीन

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पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा कि सेंसर बोर्ड द्वारा आपत्तिजनक करार दिए गए फिल्म के हिस्से को इंटरनेट पर भी नहीं दिखाया जा सकता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने इस संबंध में एक निर्णय लिया है। फिल्म निर्माता ऐसे हिस्सों को वेब सहित किसी भी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं कर सकेंगे।

फिल्म मेकर्स सेंसर्ड हिस्सों को सिनेमा हॉल या टीवी पर तो रिलीज नहीं कर सकते थे, लेकिन उसे इंटरनेट पर जारी कर सकते थे। इसके चलते कुछ फिल्मों के सेंसर्ड हिस्से इंटरनेट, खासतौर से यूट्यूब पर जारी हो जाते थे।

कोर्ट ने मिनिस्ट्री और सेंसर बोर्ड की ओर से इस संबंध में दाखिल हलफनामे को स्वीकार कर लिया। एफिडेविट में कहा गया कि सिनेमैटोग्राफ एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे इंटरनेट पर मौजूद कन्टेंट को सर्टिफाई किया जा सके। एफिडेविट के अनुसार, बोर्ड फिल्मों के थिऐटर या सैटेलाइट/टेलिविजन चैनलों, प्रोमो, ट्रेलर आदि के दौरान प्रदर्शन के लिए सर्टिफिकेट देता है। इससे पहले सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952, सिनेमैटोग्राफ (सर्टिफिकेशन) रूल्स, 1983 ऐंड गाइडलाइंस 1991 के प्रावधानों के अनुसार पूरे कन्टेंट को देखा जाता है। इसमें कहा गया कि टेलिविजन चैनलों पर कन्टेंट का गवर्नेंस केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रूल्स 1994 के तहत किया जाता है।


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Mayapuri

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