नोशन प्रेस प्रकाशन ने आठ भारतीय भाषाओं में किया विस्‍तार

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भारत के सबसे बड़े पुस्‍तक प्रकाशन मंच, नोशन प्रेस ने लगभग आठ प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं की आगे बढ़ने में मदद के लिए भारतीय भाषा में प्रकाशन के क्षेत्र में कदम रखने की घोषणा की है। यह प्‍लेटफॉर्म अब अंग्रेजी के अलावा हिंदी, मराठी, कोंकणी, गुजराती, बंगाली, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं की पुस्तकें भी प्रकाशित करेगा। भारतीय लेखक अब जल्द ही पेपरबैक और ई-बुक दोनों तरह से अपनी पसंद की क्षेत्रीय भाषा में अपनी कहानियां प्रकाशित कर सकते हैं, जिन्हें 100 से अधिक देशों में पाठकों को बेचा जा सकेगा।

पिछले साल, नोशन प्रेस ने एक्‍सप्रेस पब्लिशिंग को लॉन्च किया था – यह अपनी तरह का पहला डू-इट-योरसेल्‍फ प्लेटफॉर्म है – जो कि उभरते हुए लेखकों को केवल 30 मिनट में उच्‍च गुणवत्‍ता वाली पुस्तकों को प्रकाशित करने की सुविधा प्रदान करता है। यह प्‍लेटफॉर्म कुछ ऐसे टूल्‍स प्रदान करता है जो प्रकाशन प्रक्रिया की शुरूआत से लेकर अंत तक मदद करते हैं। एक्‍सप्रेस पब्लिशिंग को उपयोग करने की सबसे अच्‍छी बात यह है कि- यह लेखकों के लिए पूरी तरह से मुफ्त है।

लॉन्‍च के अवसर पर बोलते हुए, नोशन प्रेस के सीईओ नवीन वल्‍सकुमार ने कहा, “भारत में गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन की मांग बढ़ रही है। एक्‍सप्रेस पब्लिशिंग देश के उन उभरते हुए लेखकों के लिए एक समाधान है, जो अपना काम सिर्फ इसलिए प्रकाशित नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनकी पहुंच गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन तक नहीं है। हम देश में सभी लोगों के लिए प्रकाशन को सुलभ बनाने के अपने दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए यह एक बड़ा कदम उठा रहे हैं।

 नोशन प्रेस की शुरुआत 2012 में हुई थी, इसका मुख्‍यालय चेन्‍नई में है। नोशन प्रेस भारत, सिंगापुर और मलेशिया में कार्यरत है। कंपनी अब तक 10,000 से अधिक लेखकों को प्रकाशित कर चुकी है और यह 150 से अधिक देशों में किताबें बेचती है। नवीन बताते हैं कि, “हर महीने लगभग 20,000 लोग अपनी पुस्तकों को प्रकाशित करने का तरीका जानने के लिए इंटरनेट पर सर्च करते हैं। हालांकि, इस संख्या का केवल एक बहुत छोटा हिस्‍सा ही इसमें सफलता प्राप्‍त करता है। हम फिलहाल हर महीने अपनी लेखन यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर मौजूद लेखकों के कम से कम 3000 सवालों पर ध्‍यान रहे हैं। हम हर महीने करीब 750 किताबें प्रकाशित कर रहे हैं, यानि लगभग 55 मिनट में एक किताब! भारतीय भाषाओं में ए‍क्‍सप्रेस पब्लिशिंग के विस्तार के साथ, हम इस संख्या बड़ी वृद्धि की योजना बना रहे हैं। यह अगले 5 वर्षों में 100,000 लेखकों को प्रकाशित करने के हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।”

 2015 में आई एक नीलसन की एक स्‍टडी में भारत के प्रकाशन उद्योग का आकार 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर बताया गया था, जो 19.3 प्रतिशत के सीएजीआर से बढ़ रहा है। यह दुनिया में छठा सबसे बड़ा प्रकाशन बाजार है और अंग्रेजी भाषा के प्रकाशन के मामले में यह दूसरे नंबर पर है। यहां 16 भाषाओं में पुस्तकों को प्रकाशित करने वाले 9,000 से अधिक प्रकाशक हैं। उद्योग काफी हद तक असंगठित और बेहद बिखरा हुआ है। इसकी वजह से यहां नई तकनीक को अपनाया नहीं गया है, जिसके चलते नवोदित लेखकों के लिए पुस्‍तकों को प्रकाशित करना मुश्किल हो गया है। नोशन प्रेस के सीटीओ भार्गव अदेपल्‍ली कहते हैं, “भविष्य के लिए हमारा एजेंडा स्पष्ट है। हम न केवल इस देश में सभी के लिए प्रकाशन को सुलभ बनाना चाहते हैं, बल्कि हम प्रत्येक प्रकाशित पुस्तक को उसके बाजार में उभरने का सही मंच

प्रदान करना चाहते हैं। हम पहले से ही अपने लेखकों के लिए उनकी पुस्तकों को बढ़ावा देने और अधिक पाठकों द्वारा खोजे जाने के लिए अधिक से अधिक ऑटोमेटेड मार्केटिंग टूल्‍स विकसित करने पर काम कर रहे हैं।”

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