‘आजकल के सिंगर ज्यादा टेलेंटिड है’ – अदिति सिंह शर्मा

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आज न्यू टेलेन्ट की भरमार है । इनमें से कुछ सफल हैं ओर कुछ अभी सफल होने के लिये संघर्षशील हैं । अदिति सिंह शर्मा एक ऐसा नाम है जिसने रषिया में अपनी शुरूआत अंग्रेजी गीतों से की थी । बाद में इंडिया आने के बाद उसने भी बाॅलीवुड की राह पकड़ी । आज वो हिन्दी फिल्मों की सफल गायिका है । कैसे मिली उसे सफलता । बता रही है स्चयं इस मुलाकात में ।

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बाॅलीवुड में बिना संघर्श के सफलता किस प्रकार मिली ?

मुझे एलबम‘ हाई स्कूल म्युजिक टू’ मिला, जो डिजनी का प्रोजक्ट था । वहीं पर मुझे कई सिंगरों  से मिलने का मौंका मिला । इसके बाद मैने आने गीतों को लेकर एक डेमों बनाया ।उसे तकरीबन सारे संगीतकारों को भेज दिया । वो डेमो सबसे सुना एहसान ने । बाद में उन्होंने उसे अपने पार्टनर शंकर को सुनाया तो कुछ दिन बाद मेरे पास उनका फोन आया । उन्होंने मुझे बुलाकर सुना । और फिर कहा तुम्हारे साथ जरूर काम करेगें । उसके बाद मोन्टी शर्मा से मिली जो उस समय यू मी और हम का बैकग्राउंड म्युजिक तैयार कर रहे थे । उनके साथ मैने बैकग्राउंड म्युजिक में अपनी आवाज दी । सलीम सुलेमान से भी मिली। मैने उन्हें अपनी सीडी दी जो उन्होंने बाहर गाड़ी में सुनी तो पांच मिनिट बाद ही उनका फोन आ गया । उन्होंने भी मुझे मिलने के लिये कहा ।मुझे पहला बे्रक मिला फिल्म ‘ देव डी ’ में जिसके कंपसेजर अमित त्रिवेदी थे । गाना था ‘ये ही मेरी जिन्दगी’ । बाद में उस गाने के लिये मुझे बेस्ट डेब्यू सिंगर के लिये अवार्ड मिला। इस एक गाने ने मुझे बाॅलीवुड में सफलता का रास्ता दिखाया ।

सफलता कैसे हासिल हुई ?

उस साल मैने करीब बारह गाने गाये । लेकिन मुझे पहचान मिली रफ्ता और धूम-3 के टाइटल सांग से । आईफा में भी यह दोनों गीत ही चुने गये ।मैने बाद ज्यादा टाइटल ट्रैक गाये हैं ।  अभी तक मैं तकरीबन सारे कंपोजर्स के साथ गा चुकी हूं ।

सिंगरों की नई खेप के लिये क्या सोचती हैं ?

आज सिंगर्स ज्यादा टेलेंटिड हैं । वह हर तरह के गीत गा रहे हैं । इनमें सबसे अच्छी बात ये है कि हम उम्र होने पर भी उनमें एक दूसरे के लिये स्वार्थ की भावना नहीं है ।  सलिये उनका एक साथ घूमना फिरना और पार्टी करना होता रहता हैं।

आपका पालन पोषण कहां हुआ ?

मेेरे घर में तो सभी संगीत के दीवाने हैं । मैं जब अपनी मां की कोख में थी तो मम्मी कनाडा से सिर्फ मुझे जन्म देने के लिये इंडिया आई थी। मैं मास्को के स्कूल में अकेली इंडियन लड़की थी वहां मुझे मेरी साथ की लड़कियां ब्लैक मास्क कहती थी । बाद में मैं मम्मी के साथ इंडिया आ गई ।

संगीत की प्रेरणा कहां से मिली ?

अपने घर से ही मुझे संगीत में सारेगामा सीखने का मिला । मेरी मां गाती हैं और पिता तबला वादक और गिटार बजाते हैं । इसलिये मेरे पहले गुरू मेरे मां बाप ही हैं । बाद में चार साल की उम्र में मम्मी ने मेरे लिये एक टीचर रख दी जो मुझे क्लासिक्ल सिखाती थी ।

तो क्या आपको एक सीखी हुई गायिका कहा जायें ?

मैने जो सीखा बचपन में ही सीखा । इसलिये अब सोचती हूं कि अगर मैने संगीत सीखा होता तो मैं और ज्यादा अच्छा गा रही होती ।

क्या कभी एक्टिंग करने का मौंका मिला ?

एक बार मुझे फिल्म राॅक स्टार में रणबीर कपूर के गिटार टेकनीशियन की भूमिका निभाने का अवसर मिल चुका है ।

आपके पसंदीदा सिंगर कौन हैं ?

मैं सोनू निगम की गायिकी की बहुत बड़ी फैन हूं वे क्या कमाल का गाते हैं । आप यकीन करें कि वे अकेले ही साढ़े तीन घंटे तक जिस तरह स्टेज सभांलते हैं वह हम मिलकर भी नहीं कर सकते । उनके बाद शंकर एहसान लाॅय भी बहुत अच्छे परफार्मर हैं । सुनिधि चैहान तो पूरी तरह मेरी प्रेरणा हैं ।

आज के लिरिक्स के बारे में क्या सोचती है ?

आज ढेर सारे गानों में कैसे भी षब्द पिरोये जा रहे हैं । मुझे वैसी वल्गेरिटीे पंसद नहीं । मैं ऐसे गानों के लिये कर देती हूं । लेकिन ये गीत गाने वाले भी ढेर सारे सिंगर मौंजूद हैं ।

ऐसा कोई्र वाकया जो भूले न भुलाया जा सका हो ?

मुझे आज भी याद है जब मुझे सलीम सुलेमान ने फिल्म काॅकटेल के लिये बुलाया था । उन्होंने मुझे एक स्पेनिष भाशा का गीत दिया, जिसे मुझे लिखना भी था गाना भी । मैने अपनी बहन को फोन किया जो क्यूबा में रह रही थी । उसने मुझे एक गाना लिख कर दे दिया था। वह मैने गाया अब पता नहीं वह सही था या गलत क्योंकि न तो स्पेनिश मुझे आती थी और न ही सलीम सलेमान को । इसी तरह एक बार फिल्म ये जवानी ये दिवानी के लिये मुझे फ्रेंच में एक गाना, लिखना और गाना था । मैने सारी रात यू टयूब पर बैठ कर उस गाने को लिखा। फिर अगले दिन गाया ।

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Mayapuri