हंसी मजाक दूसरा नाम मोती लाल थे

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मायापुरी अंक 42,1975

स्वर्गीय मोती लाल अपने ढंग के अलग ही कलाकार थे। मैं आपको जो बात सुनाने वाला हूं वह तब की है जब मोती लाल जवान थे और हीरो की भूमिकाएं किया करते थे। वह बड़ी जिंदादिली के साथ काम करते थे। इसलिए उस समय हंसी मजाक का दूसरा नाम मोती लाल हुआ करता था। उनका व्यवहार सब के साथ बड़ा ही सहानुभूति पूर्ण और प्रेममय होता था। यह घटना उस समय की है जब मोती लाल के नाम का आसमान नीचे झुकने लगा था। इसके बावजूद बतौर हीरो उनकी महानता अपनी जगह अटल थी। उन्हीं दिनों एक नई लड़की शमीम ने फिल्मी दुनिया में कदम जमाने शुरू किये थे। वह उस वक्त रणजीत मूवीटोन की फिल्म ‘अरमान’ में मोती लाल के साथ ही हीरोइन की भूमिका निभा रही थी। फिल्म के निर्देशक केदार शर्मा थे। शर्मा जी नये कलाकारों को प्रोत्साहन देने के मामले में सदा प्रसिद्ध रहे है। किंतु कभी कभार वह कलाकारों को प्रशंसा में इस कदर अतिश्योक्ति से काम लेते हैं कि कलाकार को बिना वजह अपने बारे मे गलतफहमी हो जाती है। ऐसा ही कुछ शमीम के साथ भी हुआ। एक शॉट के बाद शर्मा जी ने शमीम की इतनी ज्यादा प्रशंसा कर दी कि वह अपने आपको सर्वश्रेष्ठ कलानेत्री समझने लगीं और मोती लाल को अपने से कम दर्जे का कलाकार मान बैंठी।

‘अरमान’ के प्रणय दृश्य में मोती लाल ने शमीम को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ना था। शमीम को न मालूम क्यों मोतीलाल के इस तरह से पकड़ना अच्छा न लगा। अपने आपको बड़ी अभिनेत्री समझने के कारण उन्होंने रिहर्सल में मोती लाल से साफ-साफ कह दिया कि वह रिहर्सल में इस तरह न पकड़े जो करना है वह टैक में करें।

मोतीलाल को चार दिन की छोकरी की इतनी बड़ी बात दिल को लग गई। उन्होंने निश्चय किया कि आज इसका घमंड दूर करना ही पड़ेगा वरना दूसरों को तो यह गिनती में ही न लायेगी।

अंतिम रिहर्सल के पश्चात टेक ही तैयारी होने लगी और वह शॉट भी अच्छी तरह ले लिया गया। किंतु उसके तुरंत बाद उन्होंने एक छोकरे को बुला कर जल्दी से साबुन की टिकिया, डिटोल की एक शीशी, तौलिया और पानी लाने के लिए कहा।

छोकरा और सहायक निर्देशक मोती लाल के इस आदेश पर चकित रह गये। छोकरा जब यह सामान न जुटा सका तो मोती लाल ने कम्पनी के मालिक सेठ चंदूलाल शाह को संदेश भिजवाया कि जब तक ये सारी चीजें नही आयेंगी आगे शूटिंग नही होगी।

छोकरे ने सेठ जी से जाकर कह दिया। यह सुनकर सेठ जी दौड़े-दौड़े सैट पर आये। किंतु सेठ जी के कुछ बोलने से पूर्व ही मोती लाल ने तुरंत अपना वाण चला दिया। सेठ जी लाइफबॉय साबुन की टिकिया डिटोल की शीशी, तौलिया पानी की सख्त जरूरत है। मेहरबानी करके ये सारी चीजें फौरन मंगवा दें।

सेठ जी ने मोती लाल को टालने की बहुत कोशिश की किंतु सफलता न मिली। सेठ जी को अपनी जरूरत की अहमियत जताते हुए मोती लाल ने कहा, सेठ जी हमारा पेशा ही ऐसा गंदा है, सुबह से शाम तक न मालूम कैसे-कैसे लोगों को हाथ लगाना पड़ता है। अगर किसी के कीटाणु मेरे हाथो को लग गये तो मैं तो बीमार पड़ जाऊंगा और मैं बीमार नही होना चाहते हैं।

तंगदस्ती अगरचे हो गालिब। तंदरुस्ती हजार नेमत है।।

इसलिए कृपया जल्दी से यह सामान मंगवा दें।

सेठ चंदूलाल को वे सारी चीजें मंगवा कर देनी पड़ी ताकि शूटिंग आगे बढ़ सके। शमीम भी कोई मूर्ख लड़की ना थी। वह मोती लाल की बातों को अच्छी तरह समझ रही थी और अंदर ही अंदर पश्चाताप की आग में जल रही थी। वह शर्म के मारे कुछ बोल ना पा रही थी। सामान आने पर मोती लाल ने हाथ धोये फिर शॉट देने चले गये। शमीम में मोती लाल का सामना करने की हिम्मत नही हुई। किंतु मोती लाल ने इसी पर बस नही किया। वह हर बार शॉट देने के बाद पहले साबुन से हाथधोते, फिर डिटोल लगाते और दूसरे शॉट के लिए कैमरे के सामने जा खड़े होते। मोती लाल के इस अजीब व्यवहार से सैट पर मौजूद लोग शमीम को घूर-घूर कर देखते रहे। और मोती लाल सारा दिन इसी तरह हाथ धोते रहे और शॉट देते रहे।

आखिर शाम को जब पैक अप हुआ तो शमीम ने मोती से क्षमा मांगी और इस बात का आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी भूल नहीं करेंगी। इस तरह मोती लाल ने शमीम के घमंड को नीचा दिखाने के बाद उससे पुन: दोस्ती कर ली।


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Mayapuri

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